पन्नालाल कटारिया री कवितावां

म्हारो गांव
म्हारो ठाव
है एक गांव
जठै न बंगळा न हैलियां
न ढिगला थैलियां ।

अठै तो, सिणिया छाई झूपडियां,
लिप्या गुप्या आंगणा ।
नवी बिनणी रै हाथां रा,
रंग गेरू रा मांडणां ।

चारू खूंट रूंखावळी
मद बरसाता खेत
मिनख मिनख रो सारथी
हियै अणूतौ हेत ।।

सावण, भादो रूत मोवणी
छम छम नाचै मोर ।
बागां कुकै कोयलड़ी,
ले बटाऊ रौ चित चोर ।

घरां आयो मां जायो,
करै सरधा सूं खातरी ।
बोले मीठा बोल, उणसूं,
कमी नही किण बात री ।

माखणिया अर ग्रेनाइट नी
पळके मुखमल बेळू रेत ।
रोही-रोही धोरै-धोरै झूंपा दिसै,
दिसै हळोतिया उबा खेत ।

लेय मोत्यां जडी इंडाणी, घाघर,
पिणहारिया उबी पिणघट ।
पाणी भरे छाण-छाण,
गावै गीत उपजै घट-घट ।

जग चावी है, संस्कृति गांव री,
राखीजे चोखो बढेरा रो मान ।
लोक संस्कृति रा आगीवाण,
तेजा, पाबू, हडबू, पीरां रा थान ।

घर घर सूवाड़ी गाया भैस्यां,
मिले दूद दही री आथणियां ।
फागण में गीता रे साथै,
लूर रमती साथणियां ।

ऊंच नीच कोसां छेटी,
जूडी मिळे चौपाळां ।
सिझ्यां तांई भैळा मिळै,
हळोतियां अर गोपाळां।

हाथां हथफूल, नैणा सूरमौ,
कमर कणकती गळे तिमणियां ।
ओढ पंचरंगो लहरियों, कर सोळां
सिणगार, हिंडा हिडती तिजणियां ।

ऊंट बेहवे मधरौ मधरौ,
अणूता बळद नागौरी दौड़ै गाडियां ।
सवा हाथ रो काड घूंघटो,
माथै बैठी लजवंती लाडियां ।

छाछ राबडी ऊनो खाटो,
घर-घर मिळ जावै ।
घाट घूघरी अर खिचडो,
देख, हियो खिल जावै ।

बोर सांगरी, केर कुमटिया,
मीठा रसीला ढालूड़ां ।
जीमे सियाळे सैंधाणों,
गूँद मेथी रा लाडूडां ।

झिणौ झिणौ वायरो,
उडती बेळू रेत अठै ।
स्हेर सूं अळगो, म्हारो गांव,
मिलै अणूतो हेत अठै ।।
***


आपणी भासा राजस्थानी आपणौ राजस्थान
देस दिसावरी भेळा होय
सगळा ल्यौ थे ठाण
आपणी भासा राजस्थानी
आपणौ राजस्थान

रिपिया टक्का घणा ई
कमावौ थोड़ो देवो ध्यान।
आपणी भासा राजस्थानी
आपणौ राजस्थान

राजस्थान ओळखिजै
मायड़ भासा रे पाण।
आपणी भासा राजस्थानी
आपणौ राजस्थान

राजस्थान री राजस्थानी
कांई परतख ने परमाण।
आपणी भासा राजस्थानी
आपणौ राजस्थान

राजस्थानी मीठी भासा
अर गुणो री खाण ।
आपणी भासा राजस्थानी
आपणौ राजस्थान

मायड़ ने मान दिरावालां
हिरदे ल्यौ थे ठाण।
आपणी भासा राजस्थानी
आपणौ राजस्थान

अबै निंदाळा मत रहिजौ
थांने मायड़ भौम री आण।
आपणी भासा राजस्थानी
आपणौ राजस्थान

गांव गांव ढाणी ढाणी
मंडियो है घमसाण।
आपणी भासा राजस्थानी
आपणौ राजस्थान

दिल्ली सिंघासण धूंजण लाग्यो
लागी राजस्थानी री ताण।
आपणी भासा राजस्थानी
आपणौ राजस्थान

धरम राज कोई काढे़ला
मानता रौ फरमाण।
आपणी भासा राजस्थानी
आपणौ राजस्थान
***

दायजौ
गांव स्हैर अर ढाणी ढाणी
धणी खोटी दायजा री रीत।
कमती बैसी सगळा ही
राखे इणसूं गाढ़ी प्रीत।

दायजा ने जद गळे लगायौ
तो नाग बण फण उठायौ।
डसण सारू एक कंवळी कूंपळ ने
जो नी जाणे दायजा रा धूंसळ ने ।

देख ! सासू रे हाथ में
घासलेट री पीपी अर माचीस।
छोरी ने रै रै याद आई
मांयतां री सीख अर आसीस।

मांजी मत सुळगाओ जीवती ने
न्हाख दो तुळिया री पेटी।
थारे भी है एक म्हारे जिसी लाडली
म्हारा नणदल बाईसा थारी है बेटी।

ईसौ जुलम जद नणदल बाईसा
अर थारी बेटी पर होवेला।
जद थारो मन अर काळजो
माय सूं फाटेला घणौ रोवेला।

पर सासू नी मानी
सुळगावण लागी होळी।
बिनणी रोयी पगां पडी
मांगी जिनगाणी फैलाय झोळी।

सासू निर्दयी बणी जमदूतणी
वा बणगी गूंगी अर बोळी।
देखता ही देखता व्हीयो धुंआधार
बिनणी पड़ी खुणा में उतरगी खोळी।

सुळगायदी एक जीवती मूरत नै
मांयत पण नी ओळखी बेटी री सूरत नै।

बा रोई तड़पी कुरकाई
अर बदळगी राख री ढीगली में।
मायत रोय रोय नैण गमाया
चितारे लाडल चिड़कली ने।

दायजा में सगळो दीनो
धन माल अर साथे रिपिया री झेट।
इतरा सूं पण नी भरिज्यों
लोभी अर जमदूतां रो पेट।
***

रूड़ौ राजस्थान
दुनिया रौ सिरमौड ओ
म्हारो राजस्थान है।
घणौ गरबीलौ रूड़ौ रंगीलौ
म्हारो राजस्थान है।
प्रताप सरीखा वीरां रो जामी
म्हारो राजस्थान है। दुनिया रौ ......................

भामाशाह दान निराळौ
म्हारो राजस्थान है।
भक्त मीरा री जलम भौम
म्हारो राजस्थान है।
गोरा बादळ वीरा री धरती
म्हारो राजस्थान है। दुनिया रौ ....................... .......

बाबा रामदेव धजा फुरकावे
म्हारो राजस्थान है।
जगचावी मां करणी माता
म्हारो राजस्थान है।
अजयमेरू में ख्वाजा चिश्ती
म्हारो राजस्थान है। दुनिया रौ ..................

कोलायत में पावन कपिल धाम
म्हारो राजस्थान है।
पुष्कर धाम ब्रह्मा बिराजे
म्हारो राजस्थान है।
मुकाम धाम जाम्बो बिराजे
म्हारो राजस्थान है। दुनिया रौ ...................

आऊवौ है धरती रौ थाम्बौ
म्हारो राजस्थान है।
हाड़ी सीस काट दियो सेनाणी में
म्हारो राजस्थान है।
पद्मण रे जौहार री धरती
म्हारो राजस्थान है। दुनिया रौ ........................

आबू देवे ठण्डी लहरां
म्हारो राजस्थान है।
देलवाड़ा रौ देवळ जबर
म्हारो राजस्थान है।
उबौ अड़ीखम्ब अड़ावळ जठे
म्हारो राजस्थान है। दुनिया रौ ....................
***

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