मुकदमा होने के कारण नहीं रोक सकते नियुक्ति

मुकदमा होने के कारण नहीं रोक सकते नियुक्ति
केस में बरी होने पर दरोगा अभ्यर्थी को नियुक्ति देने का आदेश
इलाहाबाद (ब्यूरो)। हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि किसी व्यक्ति को सरकारी सेवा में नियुक्ति देने से इस आधार पर नहीं रोका जा सकता है कि कभी वह आपराधिक मुकदमे में लिप्त था। यदि अभ्यर्थी मुकदमे से बरी हो चुका है और उसके विरुद्ध कोई अपील लंबित नहीं है तो उसे नियुक्ति दी जानी थी। बरी होने के बाद माना जाएगा कि अभ्यर्थी के खिलाफ कोई मुकदमा था ही नहीं। कोर्ट ने चयनित सब इंस्पेक्टर पुनीत कुमार को प्रशिक्षण पर भेजने का निर्देश दिया है।
पुनीत कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति डॉ. डीके अरोड़ा ने यह आदेश दिया। याची का पक्ष अधिवक्ता सीमांत सिंह ने रखा। उन्होंने बताया कि पुनीत कुमार सिविल पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर चयनित हुआ। चयन प्रक्रिया के दस्तावेजों और पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान उसने जानकारी दी कि उसके विरुद्ध बुलंदशहर के सिंकदराबाद थाने में 12 नवंबर 2011 को एक आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मुकदमे में अब वह बरी हो चुका है। इस सूचना के बाद उसे ट्रेनिंग पर जाने से रोक दिया गया जबकि अन्य अभ्यर्थियों जो कि उसी के साथ चयनित हुए थे, उनको प्रशिक्षण पर भेज दिया गया। इसके खिलाफ उसने याचिका दाखिल की।
प्रदेश सरकार के अधिवक्ता का कहना था कि याची के खिलाफ कोई लिखित या मौखिक आदेश नहीं पारित किया गया है कि उसे प्रशिक्षण पर नहीं भेजा जाए। कोर्ट ने कहा यह बात निर्विवाद रूप से साबित हो चुकी है कि याची मुकदमे से बरी हो चुका है और उसके खिलाफ कोई अपील भी लंबित नहीं है।

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