तिथि भोजन की तर्ज पर अब बाल भोजन

तिथि भोजन की तर्ज पर अब बाल भोजन 

राजीव दीक्षित, लखनऊ

नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से सुझाये गए ‘तिथि भोजन’ कार्यक्रम को परिषदीय स्कूलों में लागू करने से पिछले साल मना करने वाली राज्य सरकार ने अब इसे ‘बाल भोजन’ के नाम से संचालित करने का इरादा जताया है। इस बारे में शासन स्तर पर सहमति बनने के बाद मध्याह्न् भोजन प्राधिकरण ने प्रदेश में बाल भोजन कार्यक्रम संचालित करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजकर जिलाधिकारियों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध किया है।

तिथि भोजन के तहत गुजरात में बच्चे के जन्म, व्यक्ति विशेष के जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ, त्योहार या ऐसे ही किसी खास मौके पर समुदाय के किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा सरकारी बेसिक स्कूलों के बच्चों को भोजन कराया जाता है या मध्याह्न् भोजन के अलावा नमकीन, मिठाई, फल, अंकुरित अनाज, सूखे, मेवे आदि खाने के लिए दिये जाते हैं। मध्याह्न् भोजन प्राधिकरण ने शासन को जो प्रस्ताव भेजा है उसके मुताबिक बाल भोजन का मेन्यू प्रधानाध्यापक या विद्यालय प्रबंध समिति (एसएमसी) के सदस्य तय करेंगे। 

प्रस्ताव में कहा गया है कि बाल भोजन के तहत बच्चों को बाहर से पका-पकाया भोजन देना उचित नहीं होगा। पूड़ी, पराठा व पकौड़ी जैसे तले हुए भोज्य पदार्थ और मिठाई स्वीकार नहीं की जाएगी। पोषक तत्वों को शामिल करते हुए भोजन तैयार किया जाएगा। प्रचुर मात्र में ताजे और मौसमी फल बांटे जा सकते हैं। जंक या फास्ट फूड, बर्गर व बिस्कुट का वितरण नहीं किया जाएगा। दूध के बने पदार्थों की गुणवत्ता परखने के बाद ही उन्हें भोजन में शामिल किया जाएगा। बाल भोजन के तहत यदि फल या सूखे मेवे बांटे जाएंगे तो उस दिन मिड-डे मील जरूर बनेगा।

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