अपने पंख पसारो आकांक्षा
संडे के
दिन चाय
के कप
के साथ
शरद ने
अख़बार खोला
था। पूरे
सप्ताह ऑफ़िस
की व्यस्तता
के बाद
एक इसी
दिन उसे
कुछ आराम
का मौका
मिलता था।
कभी सोचता
अच्छा होता,
किसी बड़ी
कम्पनी का
उच्च अधिकारी
होने की
जगह किसी
कॉलेज में
प्रोफ़ेसर बन
जाता। कॉलेज
में छुट्टियां
तो मिलतीं।
अचानक उसकी
निगाह एक
विज्ञापन पर
पड़ी। रोज़-
गार्डेन में
गुलाबों की
प्रदर्शनी थी।
शरद का
मन खिल
उठा। फूलों
से उसे
बहुत प्यार
था विशेषकर
गुलाब
दिन चाय
के कप
के साथ
शरद ने
अख़बार खोला
था। पूरे
सप्ताह ऑफ़िस
की व्यस्तता
के बाद
एक इसी
दिन उसे
कुछ आराम
का मौका
मिलता था।
कभी सोचता
अच्छा होता,
किसी बड़ी
कम्पनी का
उच्च अधिकारी
होने की
जगह किसी
कॉलेज में
प्रोफ़ेसर बन
जाता। कॉलेज
में छुट्टियां
तो मिलतीं।
अचानक उसकी
निगाह एक
विज्ञापन पर
पड़ी। रोज़-
गार्डेन में
गुलाबों की
प्रदर्शनी थी।
शरद का
मन खिल
उठा। फूलों
से उसे
बहुत प्यार
था विशेषकर
गुलाब
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