दिव्या विजय की कुछ कविताएँ
युवा लेखिका दिव्या विजय कविताएँ भी लिखती हैं. उनकी कुछ छोटी छोटी कविताएँ- मॉडरेटर
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अक्सर जब मुझे
रात में नींद नहीं आती
तो उसकी वजह
अब तुम नहीं होते
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तुम मेरे कोई नहीं
तुमने मात्र एक बार कहा था
कि तुम मेरे कुछ होते हो
उस एक बार को
मैंने भुला दिया है
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मैं सात साल की थी
जब मुझे पहली बार मालूम हुआ
अकेलापन किसे कहते हैं
हम तब से चिरसाथी हैं
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अब मुझे उन स्त्रियों से
कोई सरोकार नहीं
जिनमें तुम रुचि लेते हो
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मैं चुप रहती हूँ
कोई वजह नहीं
कुछ कहने की भी
कोई वजह नहीं
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तुमने मुझे भोगा एक रोज़
अगली दफ़ा कहा
प्रेम से बढ़कर
काम बहुत हैं
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मैं सम्पूर्ण जड़ नहीं हूँ
मैं चेतन भी नहीं हूँ
उतनी चेतना शेष मुझमें
लकड़ी के तने में जितनी होती है
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