पद्म पुरस्कारों के आगे पीछे



भारत सरकार के पद्म पुरस्कारों की घोषणा होने वाली है. पद्म पुरस्कारों को लेकर सदानंद पॉल ने एक रोचक लेख लिखा है- मॉडरेटर 
=======================

भारत की आबादी 125 करोड़ से भी कई करोड़ अधिक है, किन्तु भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या (25जनवरी) को घोषित किये जानेवाले 'पद्म सम्मान' (Padma Award) की संख्या 125 भी नहीं है, क्योंकि 125 में 25 से ऊपर तो विदेशी या विदेशी मूल के भारतीय या भारतीय मूल के विदेशी मेहमान होते हैं । इन सवा अरब आबादी वाले देश में प्रत्येक साल किसी भी केंद्र सरकार की नज़र में '100' व्यक्ति भी मेधावी अथवा  प्रतिभाशाली नहीं हैं । ऐसे में सरकार की नज़र में अपने ही आवाम के प्रति ये उपेक्षा या उदासीनता किसी भी दृष्टि में अच्छा नहीं है ।

निर्गुण की अपेक्षा 'भौतिक' देह से नहीं की जा सकती है और सगुण-उपासना के लिए देह्यष्टि तो चाहिए ही । सगुण जहाँ जैविक शरीर की ओर इंगित करता है, जो कि हाड़-माँस के देह के विहित है और हाड़-माँस के देह में तनिक ही सही, अवश्य ही 'निजी स्वार्थ' रहता है । निःस्वार्थ सेवक के अंदर भी प्रकाश (Highlight) में आने की उत्कठ कामना होती है, जो कि कोई पुरस्कार या सम्मान उन्हें एक मंच या प्लेटफ़ॉर्म या पहचान देता है । 'पद्म सम्मान' भी उनके काम की मुहर और 'catalyst' है। संत मदर टेरेसा को कुष्ठ रोगियों के महान सेविका के तौर पर जानी जाती है, ऐसे ही बाबा आम्टे रहे । उनके कार्य धरती पर के महान कार्यों में एक है, क्योंकि कोई सुख-चैन की ज़िन्दगी छोड़ वैसी ज़िन्दगी चुनने को हिचकिचाते हैं, परंतु सभी कुछ त्यागकर ही मिलता भी है तो अंश- मात्र ! कोई इन सब चीजों को 'सोच' कार्य करते भी नहीं हैं, तथापि निःस्वार्थ व्यक्ति भी न चाहकर भी अपना मूल्यांकन औरों के मुख से सुनने की चाह रखता है । यह हाड़-माँस के देहेच्छा की बानगी-भर है । तभी तो अन्य देश से आये व अन्य देशों के संत टेरेसा, नेल्सन मंडेला व खान अब्दुल गफ़्फ़ार खान भी 'भारत रत्न' से सम्मानित हो जाते हैं, यह उनके कृतित्व और व्यक्तित्व का महान पक्ष है, किन्तु हम अपने प्रतिभासम्पन्न लोगों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते !

'पद्म सम्मान' के नामांकनार्थ पैरवियों के लिए जहाँ पापड़ बेलने पड़ते रहे ! माननीय सांसदों, विधायकों, गणमान्यों इत्यादि से अनुशंसा कराना टेढ़ी खीर साबित होती रही है । समाजसेवा के नाम पर करोड़पति उद्योगपतियों, अभिनेताओं, अभिनेत्रियों, खिलाड़ियों इत्यादि इन सम्मानार्थ-सूची में शामिल हो जाते रहे हैं, हालांकि कई वर्षों से स्व-नामांकन की भी प्रथा रही है, किन्तु इस पद्धति को सर्वप्रथम मैंने RTI के माध्यम से प्रकाश में लाया । परंतु इस पद्धति से किसी को पद्म सम्मान मिला है या नहीं, RTI माध्यम से भी पता नहीं चल पाया है । 2015 के लिए प्राप्त होनेवाले इस सम्मान प्राप्ति के तुरंत पहले यानी जनवरी माह के शुरूआती सप्ताह में श्री सायना नेहवाल, श्री सुशील कुमार आदि के कीच-कीच सुनाई पड़े, तो दिसंबर-2014 में श्री श्री रविशंकर, स्वामी रामदेव भी 'पद्म विभूषण' के प्रसंगश: भारत सरकार की नज़र में आये, किन्तु स्वामी रामदेव को छोड़ यह सम्मान के लिए उन तीनों के नाम की घोषणा 25जनवरी 2016 को हुई ।

आश्चर्य तो होता ही है, अभिनेता राजेश खन्ना को मरणोपरांत पद्म सम्मान मिला, मरहूम ओम पुरी को 1990 में ही 'पद्म श्री' मिला था, उसके बाद 'पद्म' संबंधी कुछ मिला नहीं । प्रथम व्यक्तिगत ओलंपिक पदक विजेता के. डी. जाधव को मिला ही नहीं । दो राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार प्राप्तकर्त्ता अजय देवगन को 'पद्म श्री' उनकी पत्नी काजोल को मिलने  के बाद ही प्राप्त होती है । अभी पिछले वर्ष (2016) ही अभिनेत्री रेखा को 'पद्म श्री' प्राप्त हुई है । सानिया मिर्ज़ा को पद्म श्री उनकी किशोरी अवस्था में ही प्राप्त हो चुकी है, तो उसे पद्म भूषण भी प्राप्त हो चुकी है, यह तो तब जब हम श्रीमती सोनिया गांधी को विदेशी मानते रहे और सानिया मिर्ज़ा विदेश की बहू हो गयी । किन्तु नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी को अबतक प्राप्त नहीं हुआ । उसे तो 'भारत रत्न' मिलना चाहिए । ऐसे कई असमानता है, पंडित जवाहरलाल नेहरू और उनकी सुपुत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने तो अपने कार्यकाल में ही 'भारत रत्न' ले लिए । 'हंस' के संपादक और प्रख्यात साहित्यकार स्व. राजेन्द्र यादव ने एक बार 'हंस' के संपादकीय में लिखा था कि मन्नू भंडारी को एकबार 'पद्म श्री' प्रदानार्थ सहमति लेने कुछ सरकारी लोग घर पर आये थे, किन्तु सरकार से सिद्धांत नहीं मिलने के कारण मन्नू जी नहीं ली, ऐसी उदाहरण कभी रोमिला थापर ने भी पेश किया था । यह अलग बात है कि इंदिरा गोस्वामी को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलने के बाद उन्होंने 'पद्म श्री' को छोटा समझ ठुकरा दिया था । ऐसा नहीं लगता कि श्रीमान् वाजपेयी साहब को कई दशक पहले ही 'भारत रत्न' मिल जाना चाहिए था । शशि कपूर को दादा साहब फाल्के पुरस्कार ऐसी अवस्था में मिला, जब वे चलने, फिरने और समझने तक में सक्षम नहीं हैं । पद्म सम्मान को लेकर विवाद इतने क्यों है ? कभी एक उद्योगपति ने यहां तक कह दिया था कि उन्हें 'पद्म श्री' एक करोड़ रुपये खर्च करने पर मिला है। क्या ऐसा सच हो सकता है ?

मूलतः, 'भारत रत्न' हो या 'पद्म सम्मान' भारत के महामहिम राष्ट्रपति के नाम से जारी होता है, किन्तु माननीय गृह मंत्रालय को एतदर्थ आवेदन प्राप्त कराया जाता है, किन्तु 'पद्म सम्मान चयन समिति' में श्रीमान् गृह सचिव सहित महामहिम राष्ट्रपति सचिवालय के श्रीमान् प्रधान सचिव, श्रीमान् कैबिनेट सचिव, माननीय प्रधानमंत्री कार्यालय के श्रीमान् प्रधान सचिव सहित 3 या 4 की संख्या में अन्य गणमान्य व्यक्ति यथा- संस्कृतिकर्मी, रंगकर्मी, शिक्षाविद्, उद्योगपति इत्यादि को भी शामिल किया जाता है । हालांकि 2015 के 'पद्म सम्मान' से माननीय प्रधानमन्त्री कार्यालय के श्रीमान् प्रधान सचिव महोदय इस चयन-समिति से मुक्त नज़र आये, परंतु अन्य 3 श्रीमान् प्रधान सचिव रहे ही ! चयन-समिति के अन्य गणमान्य व्यक्ति रूपी सदस्यों में भी पलड़ा सरकार के पक्ष का भारी रहा है, तथापि क्या मात्र 7 या 8 व्यक्ति-विशेष मिलकर 130दिनों में (यदि अवकाश जोड़ा जाय, तो 100 से भी कम दिन हो जाएंगे) हज़ारों प्रतिभाशाली भारतीयों का मूल्यांकन कर सकते हैं ! इसबार से पहले एतदर्थ नामांकितों की संख्या 1,999 तक कभी नहीं हुई । इसबार तो नयी रचनात्मक सरकार की प्रतिबद्धता ने तो कई कदम आगे बढ़कर पहली मर्तबा सबके लिए नामांकन का मार्ग खोल दिया और यह 15सितम्बर 2016 के मध्यरात्रि तक का समय देकर online आवेदन लिए जाने का मार्ग प्रशस्त किये । अंतिम तिथि तक माननीय गृह मंत्रालय को लगभग 5,172नामांकनार्थ आवेदन प्राप्त हुए । पहले तो 1,999 तक आवेदन प्राप्त नहीं होते थे, इसबार सचमुच में अप्रत्याशित है । अब क्या 7-8सदस्यों वाली चयन-समिति 130 दिनों में 5,172 'पद्म सम्मानार्थियों' की उपलब्धियों के मूल्यांकन में पारखी नज़र डालकर बिलकुल ही खरे उतर पाएंगे ! उसे हर दृष्टि से उतरने चाहिए, तभी 'सत्यमेव जयते' वाक्य आदर्श ठहरेंगे ।

इसके साथ ही यह भी सतर्कता रखनी होगी कि एक ही उपलब्धिधारक दो नामांकित व्यक्ति पर निष्पक्ष भाव रखने होंगे, क्योंकि 'पद्म श्री-2013' प्राप्तकर्त्ता की उपलब्धि पर जब अन्य नामांकित व्यक्ति ने आपत्ति किया कि यह उपलब्धि तो उनकी है, पद्म श्री तो उन्हें मिलना चाहिए था ! तब इस सम्बन्ध में माननीय गृह मंत्रालय ने उस व्यक्ति को पत्र भेज कहा कि उनके नामांकनार्थ आवेदन तो 21.11.2012 को प्राप्त हुए हैं, जबकि इनकी अंतिम तिथि- 20.11.2012 ही थी । वे जब सम्बंधित नामांकनार्थ-पत्र को प्राप्ति कराने के बारे में श्रीमान डाक महानिदेशक, दिल्ली को पत्र भेजता है, तो वे उनका आवेदन प्राप्ति की रिसीविंग का प्रमाण, जो माननीय गृह मंत्रालय के द्वारा प्राप्ति लिए हैं, अंतिम तिथि-20.11.2012 को ही माननीय मंत्रालय में प्राप्ति बताया है । किसी के कैरियर को प्रभावित करनेवाली ऐसी लापरवाही से किसी भी माननीय मंत्रालय को निबटने होंगे ! अन्यथा, प्रतियोगी के साथ इसे निष्पक्ष न होना कहेंगे !

दि.31.12.2015 को 'पद्म श्री-2015' धारक के citations में विरोधाभास और खामियों की तरफ माननीय गृह मंत्रालय के श्रीमान् संयुक्त सचिव को email और speed post भेज ध्यान दिलाये गए थे कि 50 से अधिक citations में त्रुटियाँ हैं । ध्यातव्य है, यह citations गृह मंत्रालय ही तय करते हैं, यथा:-
1.)सुश्री सबा अंजुम, श्री सरदार सिंह किसी राज्य सरकार में 'पुलिस उपाधीक्षक' हैं, जो कि एतदर्थ नामांकित नहीं हो सकते थे !

2.)पद्म श्री-2015 के लिए नामांकनार्थ अंतिम तिथि-15.09.2014 है, जबकि सुश्री अरुणिमा सिन्हा के citation में दि.12.12.2014 को आत्मकथा-विमोचन का जिक्र है ।

3.))स्वर्गीय रवींद्र जैन को 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' और 'साहित्य अकादेमी पुरस्कार' प्राप्तकर्त्ता बताया गया है, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है ।

4.)श्री प्रसून जोशी के citation में 'स्वच्छ भारत अभियान' का जिक्र है, जिनका आरम्भ 'अभियान' के तौर पर दि. 02.10.2014 को हुआ, जबकि पद्म श्री-2015 के नामांकन की अंतिम तिथि- 15.09.2014 थी ।

5.)श्री संजय लीला भंसाली का जन्मवर्ष-1963 है और उन्हें वर्ष-1947 में ही फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार मिल जाता है । ऐसा citation में है ।

6.)श्री संजय लीला भंसाली निर्देशित हिंदी फ़िल्म 'बाजीराव-मस्तानी' का  रिलीज़ माह 'दिसंबर-2015' का उल्लेख citation में है, जो कि पद्म श्री  -2015 के नामांकनार्थ अंतिम तिथि-15.09.2014 के 15 माह बाद की तिथि है ।

7.)श्रीमती उषा किरण खान को ब्रजकिशोर प्रसाद पुरस्कार-2015 मिलने का जिक्र उनके citation में है, एतदर्थ अंतिम तिथि-15.09.2014लिए यह पुरस्कार नास्तित्व ही रहा है ।

8.)आदि-आदि ।

---ऐसे 50 से अधिक एतदर्थ 'साइटेशन' में विरोधास और खामियाँ हैं, इनके कृत्यकारक पर ध्यानबद्ध करते और इसे सुधारते हुए एवं इसबार के 5,172में से उपलब्धिधारक उम्मीदवार और उनके मौलिक-कृतित्व को निष्पक्ष और न्यायपूर्ण तरीके से वर्ष-2017 के 'पद्म सम्मानार्थी' का चयन किया जाय ।

©आलेखकार:-प्रो0 सदानंद पॉल- s.paul.rtiactivist75@gmail.com


Comments

Popular posts from this blog

Gove confirms mandatory housebuilding targets for councils will be abolished in face of Tory rebellion – UK politics live

Kotak Mahindra Bank Recruitment 2022 Released for Graduate Candidates And Apply Online