AC Motor ( ए.सी. विद्युत मोटर )

ऐसे उपकरण जो विद्युतीय ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलकर उससे दूसरी मशीनों को चलाते हों, विद्युत मोटर कहलाते है।

विद्युत मोटर के कार्य करने का सिद्धांत :
एक शाफ्ट पर लगी हुई क्वायल को जब एक परिवर्तनशील चुम्बकीय क्षेत्र मे रखा जाता है तो इण्डक्शन (या प्रेरण ) के प्रभाव से उस क्वायल में एक करन्ट का प्रवाह होने लगता है। अब इस करन्ट के कारण क्वायल के चारो ओर एक और चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। इस प्रकार यहां पर दो चुम्बकीय क्षेत्र बन जाते है। इन दोनों चुम्बकीय क्षेत्र के आपस में टकराने से क्वायल पर एक बल लगने लगता है, जिसके कारण इस क्वायल से जुड़ा हुआ शाफ्ट घुमने लगता है। यही A.C. मोटर अर्थात् विद्युत मोटर के कार्य करने का आधारभूत सिध्दांत है।
यही कारण है कि सामान्य रूप से कहा जाता है कि A.C. मोटर, (विद्युत मोटर) इण्डक्शन (प्रेरण) के सिद्धांत पर कार्य करती है।
A.C. मोटर के विभिन्न भाग :
किसी भी A.C. मोटर या इण्डक्शन मोटर के तीन मुख्य भाग निम्नलिखित है -
1) रोटर 2) स्टेटर 3) योक (बाडी या फ्रेम)

रोटर :-
'रोटर' का शाब्दिक अर्थ होता है - घुमने वाला भागा अत: नाम से ही स्पष्ट है कि रोटर, मोटर का घुमने वाला भाग होता है। किसी भी मोटर में लगने वाले रोटर की संरचना (बनावट) उस मोटर विशेष के प्रकार पर निर्भर करती है। रोटर सामान्यत बेलनाकार आकृति का होता है जिस पर एक शाफ्ट लगा हुआ होता है।
कुछ मोटर्स के रोटर लेमिनेटेड पत्तियों को रिबिट करके बनाये गये हैं तथा ये पत्तियां एक शाफ्ट से जुड़ी हुई होती है। इसमें शाफ्ट के समानान्तर गोलाकार रूप में बहुत सारे स्लॉट्स बनाये गये होते है। प्रत्येक स्लॉट में तांबे की एक छड़ रख दी जाती है तथा इसे हाईड्रोलिक प्रेशर से दबा दिया जाता है। इस प्रकार लगाई गई सभी छड़ों को आपस मे दोनो सिरों पर एण्ड रिंग्स के द्वारा जोड़ दिया जाता है।
रोटर को किसी भी प्रकार की सप्लाई नहीं दी जाती है, यह पूर्णतः इण्डक्शन के सिध्दांत पर कार्य करता है। इस प्रकार के रोटर, स्कुअर्ल केज रोटर कहलाते हैं तथा जिन मोटरों में इस प्रकार के रोटर लगे होते हैं उन्हें स्कृअर्ल केज इण्डक्शन मोटर कहते हैं।
स्कुअर्ल केज रोटर के अलावाभी कई मोटर्स के घूमने वाले भाग के रूप में आर्मेचर का उपयोग किया जाता है। इस आर्मेचर पर एक कोर होती है, जिसे आर्मेचर कोर कहा जाता है। आर्मेचर कोर के बीच में एक लोहे का शाफ्ट लगाया जाता है। आर्मेचर कोर की सतह पर बहुत सारे स्लॉट्स बने हुये होते हैं। इन स्लॉट्स पर इन्सुलेटेड कापर वायर से बनायी गई क्वायलें लगाई जाती है। अब इनके उपर बांस की पतली-पतली पट्टियां लगाकर स्लॉट्स को बंद कर दिया जाता है। इन क्वायलों को इसी आर्मेचर पर बने विभिन्न सेग्मेन्ट्स के द्वारा सप्लाई प्राप्त होती है।

स्टेटर:-
नाम से ही स्पष्ट है कि यह मोटर का स्थिर भाग होता है। स्टेटर, लेमिनेटेड पत्तियों को आपस में जोडकर बनाया जाता है। स्टेटर पर बहुत सारे खांचे या स्लॉट्स बने हुये होते हैं। इन स्लॉट्स पर तांबे के इन्सुलेटेड तार की क्वायल (वाईण्डिंग्स) बनाई जाती है। अलग-अलग मोटर्स के स्टेटर में वाईण्डिंग्स की संख्या भी भिन्न- भिन्न होती है I हम वाईण्डिंग्स को इस प्रकार जोड़ा गया होता है कि ये एक रोटेटिंग (घूमता हुआ) मेग्नेटिक फिल्ड तैयार करें। जब इन क्वायल्स को AC सप्लाई दी जाती है तो इनके चारों ओर विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र बन जाता है। स्टेटर के बीच में रोटर लगा हुआ होता है जो स्टेटर में उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र के कारण घूमने लगता है।
आजकल लगभग 90% इण्डक्शन मोटर्स इसी प्रकार की बनाई जाती है।

योक (बॉडी या फ्रेम)
योक, मोटर का वह भाग होता है, जिस पर स्टेटर वाईण्डिंग लगी हुई होती है। मोटर का रोटर भी इसी भाग मे लगाया जाता है। छोटी साईज की मोटर्स के लिये यह ढले हुये अर्थात् कास्ट आयरन का बना हुआ होता है। जबकि बड़ी साईज की मोटर्स के लिये यह स्टील की प्लेटों से फ्रेबीकेट (कटिंग-वेल्डिग) करके बनाया जाता है। इसके नीचे के भाग मे एक स्टेण्ड होता है, जिसकी सहायता से मोटर को किसी आधार पर नट-बोल्ट के द्वारा कस दिया जाता है। मोटर की बॉडी पर बाहर की तरफ कुछ खाड़ी-आड़ी प्लेटें लगी हुई होती हैं। ये प्लेटें मोटर के लिये हीट सिंक का कार्य करती हैं।

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