Classification of D.C. Motors (डी.सी.मोटरों का वर्गीकरण)

1) सीरीज मोटर :- इस मोटर की फील्ड वाइंडिंग आर्मेचर के सीरीज में कनैक्ट की जाती है। फील्ड वाइंडिंग, कम टर्न और मोटे तार की होती है। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। इस मोटर को कभी बिना लोड के नहीं चलाया जाता है क्योंकि शून्य लोड पर स्पीड क्सी अधिक होती है। लोड बढ़ाते रहने पर इसकी स्पीड कम होती जाती है। इसलिए यह ऐसे स्थान पर प्रयोग की जाती है जहाँ हर समय लोड लगा रहता है।

2) शन्ट मोटर :- इस मोटर की फील्ड वाइंडिंग आर्मेचर के समानान्तर क्रम में लगी होती है। फील्ड वाइंडिंग में टर्नों की संख्या अधिक और तार बारीक होते है I इसके फील्ड की रेसिस्टेंस अधिक होती है। इस मोटर की स्पीड लगभग स्थिर रहती है चाहे इस पर लोड रहे या न रहे। यह मोटर अधिक लोड पर स्टार्ट नहीं की जाती है। यह ऐसे स्थान पर उपयोग की जाती है जहाँ पर लोड एक समान रहता है।

3) कम्पाउन्ड मोटर :- जिस मोटर में फिल्ड वाइंडिंग एक भाग, आर्मेचर के सिरीज में और दूसरा भाग, आर्मेचर के शंट में कनैक्ट हो वह कम्पाउन्ड मोटर कहलाती है। यह दो प्रकार की होती हैं।
1) क्युम्युलेटिव कम्पाउन्ड मोटर (Cumulative Compound Motor) 
2) डिफरैन्शियल कम्पाउन्ड मोटर (Differential Compound Motor)
1) क्युम्युलेटिव कम्पाउन्ड मोटर :-
इसमें सिरीज वाइंडिंग में उत्पन्न फ्लक्स तथा शन्ट वाइंडिंग में उत्पन्न फ्लक्स दोनों एक-दूसरे की साहायता करते हैं जैसा चित्र में दर्शाया गया है। यह दो प्रकार की होती है :-
a) शॉर्ट शंट टाईप (short shunt type)
b) लाँग शंट टाईप ( long shunt type)

2) डिफ्रैन्शियल कम्पाउन्ड मोटर :-
इस मोटर में सीरीज वाइंडिंग शन्ट वाइंडिंग का विरोध करती है। इस कारण सिरीज-वाइंडिंग शन्ट-वाइंडिंग के विपरीत लगी होती है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है । इस मोटर को स्टार्ट करने से पहले सीरीज-फील्ड को शार्ट-सर्किट कर दिया जाता है जिससे मोटर शंट-वाइंडिंग पर स्थिर गति से चलती रहती है। अधिक लोड होने पर सिरीज-फील्ड प्रयोग किया जाता है। इसका उपयोग बहुत कम होता है।  

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