D.C. Motor (डी.सी. मोटर)

डी.सी. (D.C. Motor):-
वह मशीन जो विद्युत शक्ति को यांत्रिक शक्ति में परिवर्तित करती है डी.सी. मोटर कहलाती है l जबकि इस मशीन के आर्मेचर और फील्ड में डी.सी. सप्लाई दी जाती है ।
मोटर की बनावट, डी.सी. जनरेटर के समान होती हैं लेकिन यह जनरेटर की व्युत्क्रम क्रिया (Reverse action) करता है जनरेटर वि.वा. बल के रूप में विद्युत पावर उत्पन्न करता है जबकि मोटर विद्युत पावर से चलती है और उसकी शाफ्ट पर मैकेनिकल पावर प्राप्त होतो है ।

Electrical Power ---> Motor ---> Mechanical Power
D.C. Supply (Electrical Power) --->D.C. Motor ---> Mechanical Power

कार्य सिद्धान्त (Working Principle):-

चित्र में दर्शाये अनुसार एक चालक जिसमें से धारा प्रवाहित हो रही हैं एक चुम्बकीय क्षेत्र में रखा हुआ है। चालक में से धारा प्रवाहित होने के कारण इसके चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।
चित्र (अ) के अनुसार चालक में धारा प्रवाह हो रही है तथा मुख्य चुम्बकीय क्षेत्र भी उपस्थित है। चालक में धारा के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र, चालक के ऊपर मुख्य क्षेत्र के साथ कार्य करता है लेकिन चालक के नीचे मुख्य क्षेत्र का विरोध करता है। इसका परिणाम यह होता कि चालक के ऊपर के क्षेत्र में फ्लक्स का जमाव हो जाता है तथा नीचे वाले क्षेत्र में फ्लक्स घनत्व (Flux density) कम हो जाता है।

इससे यह स्पष्ट है कि जब चालक पर बल कार्य कर रहा है तो वह चालक को नीचे की ओर धकेलने का कार्य करता है जैसा कि चित्र (अ) में तीर के निशाने से दिखाया गया है।

चित्र (ब) के अनुसार यदि चालक की धारा की दिशा में परिवर्तन कर दिया जाये तो फ्लक्स का जमाव नीचे की ओर हो जायेगा तथा वह चालक को ऊपर की ओर ले जाने का प्रयत्न करेगा । वास्तव में आर्मेचर पर कई क्वायल्स (Coils) लगाई होती है । अत: ज्योंही आर्मेचर आगे की दिशा में घूमेगा तो पूर्व चालक के स्थान पर पीछे के चालक (Conductor) आते रहेंगे I जिन पर पुन: N तथा S ध्रुवों के अधीन पूव दिशा में बल प्रभाव पड़ता रहेगा जिसके कारण आर्मेचर एक ही दिशा में घूमता रहेगा ।

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