Direct online starter (डायरेक्ट ऑन लाइन स्टार्टर)
5 हॉर्स पॉवर तक की मोटरों को स्टार्ट करने के लिए डायरेक्ट ऑन लाइन स्टार्टर का उपयोग किया जाता है। इस स्टार्टर के द्वारा मोटर को सीधा सप्लाई के साथ जोड़ते हैं। यह सप्लाई वोल्टेज को कम नहीं करता है इसलिए इसे डायरेक्ट ऑन लाइन स्टार्टर ऊर्फ डी.ओ.एल. स्टार्टर कहते हैं।
डायरेक्ट ऑन लाइन स्टार्टर के भाग :
1) हरे रंग का स्टार्ट पुश बटन : इस बटन को दबाने से मोटर स्टार्ट होती है। यह बटन स्टार्टर के कव्हर के बाहर लगा होता है।
2) लाल रंग का स्टॉप पुश बटन : इस बटन का उपयोग मोटर को बंद करने के लिए किया जाता है। यह बटन मोटर के कव्हर के बाहर लगा होता है।
3) ओवर लोड क्वायल : यह क्वायल दो धातु की पत्ती को लेकर बनाई जाती है। इसे प्रत्येक लाइन के सीरीज में जोड़ते हैं। इसके ऊपर मोटी तार और कम टर्ने लपेटी हुई होती है। अगर किसी कारण से मोटर में अधिक करंट बहने लगती है उस समय क्वायल की पत्तियाँ गर्म होकर मुड़ जाती हैं और यह एक स्विच से नो वोल्ट क्वायल का सर्किट खोल देती हैं जिससे वह अचुम्बकीय हो जाता है और सभी स्ट्रीप वापस अपनी पहली अवस्था में आ जाती है तथा मोटर में सप्लाई जानी बंद हो जाती है।
4) करंट व्यवस्थित : यह करंट को सैट करने के लिए लगाया जाता है, जिसको मोटर की करंट के अनुसार व्यवस्थित (एडजस्ट) करके सैट करते हैं।
5) धातु की पत्तियाँ : इन पत्तियों के द्वारा ही मोटर को सप्लाई पहुँचती है।
2) लाल रंग का स्टॉप पुश बटन : इस बटन का उपयोग मोटर को बंद करने के लिए किया जाता है। यह बटन मोटर के कव्हर के बाहर लगा होता है।
3) ओवर लोड क्वायल : यह क्वायल दो धातु की पत्ती को लेकर बनाई जाती है। इसे प्रत्येक लाइन के सीरीज में जोड़ते हैं। इसके ऊपर मोटी तार और कम टर्ने लपेटी हुई होती है। अगर किसी कारण से मोटर में अधिक करंट बहने लगती है उस समय क्वायल की पत्तियाँ गर्म होकर मुड़ जाती हैं और यह एक स्विच से नो वोल्ट क्वायल का सर्किट खोल देती हैं जिससे वह अचुम्बकीय हो जाता है और सभी स्ट्रीप वापस अपनी पहली अवस्था में आ जाती है तथा मोटर में सप्लाई जानी बंद हो जाती है।
4) करंट व्यवस्थित : यह करंट को सैट करने के लिए लगाया जाता है, जिसको मोटर की करंट के अनुसार व्यवस्थित (एडजस्ट) करके सैट करते हैं।
5) धातु की पत्तियाँ : इन पत्तियों के द्वारा ही मोटर को सप्लाई पहुँचती है।
डायरेक्ट ऑन लाइन स्टार्टर के कार्य करने का सिद्धांत :
स्टार्ट पुश बटन को दबाने के बाद थर्मल रीलेद्विरा नो-वोल्ट क्वायल सप्लाय से जूड जाती है जिस कारण उसमें चुम्बकीय क्षेत्र निर्माण हो जाता है। अब चुम्बकीय क्षेत्र निर्माण होने से प्लंजर आकर्षीत हो जाता है जिस कारण मूव्हिंग कॉन्टैक्टस और स्थाई कॉन्टैक्टस एक-दूसरे से जूड जाते है तथा मोटर शुरू हो जाती है।
अब यहाँ मन में एक सवाल आता है, की स्टार्ट पुश बटन से हात हटा लेने के बावजूद मोटर शुरू रहती है, ऐसा कैसे होता है? ऐसा इसलिए होता है क्योंकि स्टार्ट पुश बटन के पैरलल में एक कॉन्टैक्टर लगाया होता है जो विद्युत सप्लाय को मार्ग प्रदान करता है। अर्थात स्टार्ट पुश बटन से हात हटा लेने के बाद सप्लाय बंद हो जाना चाहिए था पर उसके पैरलल में कॉन्टैक्टर होने के कारण ऐसा नहीं हो पाता चुंकि स्टार्ट पुश बटन से हात हटा लेने के बाद करंट कॉन्टैक्टर से होकर गुजरता है और मोटर बंद होने की बजाय शुरू रहती है। स्टॉप पुश बटन को दबाने से नो-वोल्ट क्वायल से होकर गुजरने वाला करंट खंडित हो जाता है जिस कारण कॉन्टैक्टर ऑफ हो जाता है और मोटर बंद हो जाती हैं। यह डायरेक्ट ऑन लाइन स्टार्टर के कार्य करने का तरीका है।
स्टार्ट पुश बटन को दबाने के बाद थर्मल रीलेद्विरा नो-वोल्ट क्वायल सप्लाय से जूड जाती है जिस कारण उसमें चुम्बकीय क्षेत्र निर्माण हो जाता है। अब चुम्बकीय क्षेत्र निर्माण होने से प्लंजर आकर्षीत हो जाता है जिस कारण मूव्हिंग कॉन्टैक्टस और स्थाई कॉन्टैक्टस एक-दूसरे से जूड जाते है तथा मोटर शुरू हो जाती है।
अब यहाँ मन में एक सवाल आता है, की स्टार्ट पुश बटन से हात हटा लेने के बावजूद मोटर शुरू रहती है, ऐसा कैसे होता है? ऐसा इसलिए होता है क्योंकि स्टार्ट पुश बटन के पैरलल में एक कॉन्टैक्टर लगाया होता है जो विद्युत सप्लाय को मार्ग प्रदान करता है। अर्थात स्टार्ट पुश बटन से हात हटा लेने के बाद सप्लाय बंद हो जाना चाहिए था पर उसके पैरलल में कॉन्टैक्टर होने के कारण ऐसा नहीं हो पाता चुंकि स्टार्ट पुश बटन से हात हटा लेने के बाद करंट कॉन्टैक्टर से होकर गुजरता है और मोटर बंद होने की बजाय शुरू रहती है। स्टॉप पुश बटन को दबाने से नो-वोल्ट क्वायल से होकर गुजरने वाला करंट खंडित हो जाता है जिस कारण कॉन्टैक्टर ऑफ हो जाता है और मोटर बंद हो जाती हैं। यह डायरेक्ट ऑन लाइन स्टार्टर के कार्य करने का तरीका है।
डायरेक्ट ऑन लाइन स्टार्टर :
कन्ट्रोल सर्किट :

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