Oscilloscope Practical in Hindi

उद्देश्य (Aim) :- ऑस्कीलोस्कोप यंत्र का अध्ययन करना।

ऑस्कीलोस्कोप में निम्नलिखित मुख्य कन्ट्रोल होते हैं :
1) on - off स्विच : सप्लाई को on - off करने के काम आता है ।
2) फोक्स कन्ट्रोल : केथोड-रे-टूयूब पर ट्रेस को तीखा करने के काम आता है ।
3) ब्राइटनैस कन्ट्रोल : यह सी.आर.टी. की चमक घटाने बढ़ाने के काम आता है ।
4) वर्टीकल एवं हॉरिजैन्टल कन्ट्रोल : स्क्रीन पर वेव को ऊपर नीचे एडजस्ट करने के काम आता है ।
5) स्वीप स्लैवटर : यह विभिन्न फ्रिक्वैंसी पर वेव फार्म देखने के लिए आस्कीलोस्कोप को सैट करने के काम आता है ।
6) सिंक स्लैक्टर : यह इनपुट कन्ट्रोल को सिन्क्रोनाइज करने के काम आता है ।
7) वर्टीकल गैन स्लैक्टर : यह वेव फार्म की ऊचाई को एडजस्ट करने के काम आता हैँ ।
8) हॉरिजैन्टल गैन स्लैक्टर : यह वेव फार्म की चौड़ाई सैट करने के काम आता है ।
9) सिंक : वेव फार्म को स्थिर अवस्था में रखने के लिए अर्थात ड्रिफ्ट को कम करने के काम आती है ।

मैन्युअल निर्देश :-
1) ब्राइट नैस तथा फोक्स को रैंज के मध्य रखें ।
2) सिंक स्लैक्टर को आई.एन.टी. पर सैट करें ।
3) सिंक को एकदम बन्द रखें ।
4) स्वीप का स्विच ऑन करने के बाद दो-तीन मिनट यंत्र को गर्म होने दें ।
5) वेव फार्म देखने के लिए यंत्र के वर्टीक्ल इनपुट को ए.सी. सिग्नल स्त्रोत से जोड़े ।
6) वेव की सही पिक्चर के लिए वर्टीकल गैन स्लैक्टर को एडजस्ट करें ।

सावधानियाँ (Precautions) :-
1) स्क्रीन पर स्थिर बिन्दु को अधिक समय तक नहीं रहने देना चाहिए ।
2) सी.आर.टी. को अधिक ब्राइट नहीं करना चहिए ।

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