पी. टी. उषा प्रेरणादायक जीवनी |

पी. टी. उषा प्रेरणादायक जीवनी |



नवें दशक में जो सफलतायें और ख्याति पी. टी. उषा – PT Usha ने प्राप्त की है वे उनसे पूर्व कोई भी भारतीय महिला एथलीट नहीं प्राप्त कर सकी। एशियाड, 82 (Asiad, 82) के बाद से अब तक का समय पी. टी. उषा के चमत्कारी प्रदर्शन से भरा पड़ा है। उषा को भारतीय इतिहास की सबसे महानतम एथलिट में से एक काहा जाता है और साथ ही उषा को “भारतीय ट्रैक एंड फील्ड की क्वीन” की उपाधि भी दी गयी है। उनका उपनाम पय्योली एक्सप्रेस भी रखा गया है।

पी. टी. उषा की जीवनी /

पूरा नाम – पिलावुलकंडी थेक्केपारंबिल उषा (PT Usha)
जन्म – 27 जून, 1964
जन्मस्थान – कन्नूर (केरल)
पिता – पैतल
माता – लक्ष्मी
विवाह – वी. श्रीनिवासन के साथ
पिलावुल्लाकंदी ठेक्केपराम्बिल उषा साधारणतः पी.टी. उषा के नाम से जानी जाती है, वह केरला राज्य की एक भारतीय ट्रैक एंड फील्ड एथलिट है। उषा भारतीय एथलिट से 1979 से जुडी है। वर्तमान में उषा केरला के कोयीलान्द्य में उषा स्कूल ऑफ़ एथलिट चलाती है। उषा का जन्म केरला राज्य के कोजहिकोदे जिले के पय्योली ग्राम में हुआ था। 1976 में ही केरला राज्य सरकार ने महिलाओ के लिये स्पोर्ट स्कूल की शुरुवात की थी और उसी समय उषा ने जिले का प्रतिनिधित्व करने का निर्णय लिया था।
खेल जीवन
1979 में पी.टी. उषा ने राष्ट्रिय शालेय खेलो में भाग लिया था, जहाँ ओ.एम. नम्बिअर को उन्होंने अपने खेल प्रदर्शन से काफी प्रभावित किया था, बाद में वही उनके कोच बने और उन्होंने उषा को प्रशिक्षण भी दिया। 1980 के मास्को ओलंपिक्स में उन्होंने खेलो में अपना पर्दापण किया था। 1982 में नयी दिल्ली के एशियन खेलो में उषा ने 100 मीटर और 200 मीटर में सिल्वर मेडल जीता था लेकिन इसके एक साल बाद ही कुवैत में एशियन ट्रैक एंड फील्ड चैंपियनशिप में उषा ने 400 मीटर में गोल्ड मेडल अपने नाम किया था और यह एक एशियन रिकॉर्ड भी था। एशियन ट्रैक एंड फील्ड चैंपियनशिप में उषा ने कुल 13 गोल्ड अर्जित किये थे।
1984 में लोस एंजेल ओलंपिक्स में 400 मीटर की बाधा दौड़ में सेमी फाइनल प्रथम स्थान पर रहते हुए जीत लिया लेकिन फाइनल में वह मेडल जीतने से थोड़े से अंतर से चुक गयी थी, यह पल 1960 में मिल्खा सिंह की हार की याद दिलाने वाला था। लेकिन फिर भी उषा तीसरे पायदान पर स्थान बनाने में सफल रही थी। लेकिन उषा ने 1/100 सेकंड के अंतर से ब्रोंज मेडल खो दिया था।
1986 में सीओल में आयोजित 10 वे एशियन खेलो में ट्रैक एंड फील्ड खेलो में पी.टी. उषा ने 4 गोल्ड मेडल और 1 सिल्वर मेडल जीते। इसके साथ ही 1985 में जकार्ता में आयोजित छठे एशियन ट्रैक एंड फील्ड चैंपियनशिप में उषा ने 5 गोल्ड मेडल अपने नाम किये थे। किसी भी एक इंटरनेशनल चैंपियनशिप में इतने मेडल जीतना भी किसी एकल एथलिट का रिकॉर्ड ही है।
उषा ने तक़रीबन 101 इंटरनेशनल मेडल अपने नाम किये है। इसके साथ ही दक्षिण रेल्वे में PT Usha ऑफिसर के पद पर भी कार्यरत है। 1985 में उन्हें पद्म श्री और अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
फिलहाल वर्तमान में वह केरला में अपनी ही अकैडमी में युवा एथलिट को ट्रेनिंग देती है, जिसमे टिन्तु लुक्का भी शामिल है जिसने 2012 के लन्दन ओलंपिक्स में विमेंस 800 मीटर में सेमीफाइनल में क्वालीफाई किया था।
कहा जाता है कि प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती। प्रतिभावान इंसान उस सूरज के समान है जो पुरे संसार को अपनी रौशनी से जगमग कर देता है। कुछ ऐसी ही प्रतिभा हमें उडन परी पी.टी. उषा में दिखाई देती है। 101 अंतर्राष्ट्रीय पदक जीतने वाली पी. टी. उषा एशिया की सर्वश्रेष्ट महिला एथलिट मानी जाती है। पी.टी. उषा की उपलब्धियों को एक लेख में लिखना निश्चित ही असंभव होंगा क्योकि सैकड़ो बार उन्होंने देश को गौरवान्वित किया है।

PT Usha short biography – एक नजर में पी.टी. उषा का जीवन

1. 12 साल की उम्र में उन्होंने कन्नूर के ‘स्पोर्ट्स स्कूल’ में प्रवेश लिया वहा उन्हें सर्वाधिक सहयोग अपने प्रशिक्षक श्री. ओ. पी. नब्बियारका मिला।
2. 1978 को केरल में हुए अंतरराज्य मुकाबले में उषा ने 3 स्वर्ण प्राप्त किये।
3. 1982 के एशियाई खेलो में (Asian Games) में उसने 100 मीटर और २०० मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता था। कुवैत में भी इन्ही मुकाबलों में उसने दो स्वर्ण पदक जीते थे। राष्ट्रीय स्तर पर उषा ने कई बार अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दोहराया।
4. 1984 के लॉस एंजेलस ओलंपिक खेलो में भी चौथा स्थान प्राप्त किया। यह गौरव पाने वाली वे भारत की पहली धाविका है। इसमें वे 1/100 सेकिंड्स से पिछड गयी थी।
5. PT Usha ने 1983 से 1989 के बीच हुई एशियान ट्रैक एंड फिल्ड चैम्पियनशिप में 13 स्वर्णपदक, 3 रजत और एक कांस्य पदक प्राप्त किये।
6. जकार्ता की एशियन चैम्पियनशिप में भी उन्होंने स्वर्ण पदक लेकर अपने को बेजोड़ प्रमाणित कर दिया। ‘ट्रैक एंड फिल्ड मुकाबलों’ में लगातार 5 स्वर्ण पदक एवं एक रजत पदक जीतकर वह एशिया की सर्वश्रेष्ठ धाविका बन गई है।
घुटने में दर्द के कारण उषा ने रीटायर्ड होने का निर्णय लिया, लेकिन उनकी ‘उषा अकादमी’ द्वारा भारतीय एथेलेट्स निर्माण करने का कार्य उन्होंने शुरु रखा प्रशिक्षण और मेहनत के दम पर भारतीय भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एथलेटीक्स में महत्वपूर्ण प्रदर्शन कर सकते है, ये आत्मविश्वास भारतीय खिलाडियों में निर्माण करने का श्रेय पी. टी. उषा को जाता है।
P. T. Usha उपलब्धियाँ :-
1980
* मास्को ओलम्पिक खेलों में भाग लिया।
* कराची अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण खेलों में ४ स्वर्ण पदक।
1981
* पुणे अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण खेलों में २ स्वर्ण पदक।
* हिसार अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण खेलों में १ स्वर्ण पदक।
* लुधियाना अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण खेलों में २ स्वर्ण पदक।
1982
* विश्व कनिष्ठ प्रतियोगिता।
* सियोल में १ स्वर्ण व एक रजत जीता।
* नई दिल्ली एशियाई खेलों में २ रजत पदक।
1983
* कुवैत में एशियाई दौड़कूद प्रतियोगिता में १ स्वर्ण व १ रजत।
* नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण खेलों में २ स्वर्ण पदक प्राप्त किए।
1984
* इंगल्वुड संयुक्त राज्य में अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण खेलों में २ स्वर्ण पदक।
* लॉस एञ्जेलेस ओलम्पिक में ४००मी बाधा दौड़ में हिस्सा लिया और १/१०० सेकिंड से कांस्य पदक से वंचित हुईं।
* ४x४०० मीटर रिले में सातवाँ स्थान प्राप्त किया।
* सिंगापुर में 8 देशीय अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण खेलों में ३ स्वर्ण पदक।
* टोक्यो अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण खेलों में ४००मी बाधा दौड़ में चौथा स्थान प्राप्त किया।
1985
* चेक गणराज्य में ओलोमोग में विश्व रेलवे खेलों में २ स्वर्ण व २ रजत पदक जीते, उन्हें सर्वोत्तम रेलवे खिलाड़ी घोषित किया गया।
* भारतीय रेल के इतिहास में यह पहला अवसर था जब किसी भारतीय स्त्री या पुरुष को यह सम्मान मिला।
* प्राग के विश्व ग्रां प्री खेल में ४००मी बाधा दौड़ में ५वाँ स्थान लंदन के विश्व ग्रां प्री खेल में ४००मी बाधा दौड़ में कांस्य पदक ब्रित्स्लावा के विश्व ग्रां प्री खेल में ४००मी बाधा दौड़ में रजत पदक पेरिस के विश्व ग्रां प्री खेल में ४००मी बाधा दौड़ में ४था स्थान बुडापेस्ट के विश्व ग्रां प्री खेल में ४००मी दौड़ में कांस्य पदक लंदन के विश्व ग्रां प्री खेल में रजत पदक ओस्त्रावा के विश्व ग्रां प्री खेल में रजत पदक कैनबरा के विश्व कप खेलों में ४००मी बाधा दौड़ में ५वाँ स्थान व ४००मी में ४था स्थान जकार्ता की एशियाई दौड़-कूद प्रतियोगिता में ५ स्वर्ण व १ कांस्य पदक।
1986
* मास्को के गुडविल खेलों में ४००मी में ६ठा स्थान।
* सियोल के एशियाई खेलों में ४ स्वर्ण व १ रजत पदक मलेशियाई मुक्त दौड़ प्रतियोगिता में १ स्वर्ण पदक सिंगापुर के लायंस दौड़ प्रतियोगिता में ३ स्वर्ण पदक नई दिल्ली के चार राष्ट्रीय आमंत्रिण खेलों में २ स्वर्ण पदक।
1987
* सिंगापुर की एशियाई दौड़ कूद प्रतियोगिता में ३ स्वर्ण व २ रजत पदक।
* कुआला लंपुर की मलेशियाई मुक्त दौड़ प्रतियोगिता में २ स्वर्ण पदक नई दिल्ली के अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रिण खेलों में ३ स्वर्ण पदक कलकत्ता दक्षिण एशिया संघ खेलों में ५ स्वर्ण पदक रोम में दौड की विश्व चैंपियनशिप में भाग लिया।
* ४००मी बाधा दौड़ के फ़ाइनल में प्रवेश पाने वाली वे पहली भारतीय बनीं।
1988
* सिंगापुर मुक्त दौड़ प्रतियोगिता में ३ स्वर्ण पदक।
* नई दिल्ली में ओलंपिक पूर्व दौड़ प्रतियोगिता में २ स्वर्म पदक सियोल ओलंपिक में ४००मी बाधा दौड़ में हिस्सा लिया।
1989
* नई दिल्ली की एशियाई दौड़ कूद प्रतियोगिता में ४ स्वर्ण व २ रजत पदक।
* कलकत्ता में अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण खेलों में ३ स्वर्ण पदक मलेशियाई मुक्त दौड़ प्रतियोगिता में ४ स्वर्ण पदक।
1990
* बीजिंग एशियाई खेलों में ३ रजत पदक।
1994
* हिरोशिमा एशियाई खेलों में १ रजत पदक।
* पुणे के अंतर्राष्ट्रीय अनुमति खेलों में १ कांस्य पदक।
1995
* चेन्नई के दक्षिण एशियाई खेलों में १ कांस्य पदक।
* पुणे के अंतर्राष्ट्रीय अनुमति खेलों में १ कांस्य पदक।
1996
* ऍटलांटा ओलंपिक खेलों में भाग लिया।
* पुणे के अंतर्राष्ट्रीय अनुमति खेलों में १ रजत पदक।
1997
* पटियाला के अंतर्राष्ट्रीय अनुमति खेलों में १ स्वर्ण पदक।
1998
* फ़ुकोका की एशियाई दौड़-कूद प्रतियोगिता में १ स्वर्ण।
* १ रजत व २ कांस्य पदक।
* नई दिल्ली में राजा भालेंद्र सिंह दौड़ प्रतियोगिता में २ स्वर्ण व १ रजत पदक बैंकाक एशियाई खेलों में ४x४०० रिले दौड़ में १ रजत पदक।
1999
* काठमंडू के दक्षिण एशियाई खेलों में १ स्वर्ण व २ रजत पदक।
* नई दिल्ली में राजा भालेंद्र सिंह दौड़ प्रतियोगिता में 1 स्वर्ण पदक।

इनाम व पुरस्कार / P. T. Usha Awards And Honours

1 अर्जुन पुरस्कार विजेता, १९८४।
2 पद्मश्री १९८४ में।
3 जकार्ता एशियाई दौड़ प्रतियोगिता की महानतम महिला धाविका, १९८५ में।
4 सर्वश्रेष्ठ धाविका के लिए विश्व ट्रॉफ़ी, १९८५, १९८६।
5 १९८६ सियोल एशियाई खेल में सर्वश्रेष्ठ धाविका होने पर अदिदास स्वर्णिम पादुका ईनाम।
6 एशिया की सर्वश्रेष्ठ धाविका १९८४, १९८५, १९८६, १९८७ व १९८९ में।
7 सर्वश्रेष्ठ रेलवे खिलाड़ी के लिए मार्शल टीटो पुरस्कार, १९८४, १९८५, १९८९, व १९९० में।
8 दौड़ में श्रेष्ठता के लिए ३० अंतर्राष्ट्रीय इनाम।
9 केरल खेल पत्रकार इनाम, १९९९।

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