गामक विकास को प्रभावित करने वाले कारक

*गामक विकास को प्रभावित करने वाले कारक ।*
*1-:वंशानुक्रम--:* बालक के गामक विकास पर उसके माता-पिता तथा पूर्वजों की स्वास्थ्य का प्रभाव पड़ता है।
*2-:गर्भावस्था की दशाएं--* बालक के गामक शक्तियों का विकास गर्भावस्था की दशाओं पर निर्भर करता है। गर्भावस्था में भ्रूण में विकार आने से उसकी गामक शक्तियों में क्षीणता आ जाती है। माता- पिता का खान-पान, स्वास्थ्य तथा शारीरिक दशाओं का भ्रूण के विकास पर प्रभाव पड़ सकता है जो उसके गामक विकास को प्रभावित करता है।
*3-: शारीरिक विकास की दशाएं---:* बालक की हड्डियों मांसपेशियों तथा स्नायु तंत्र का सामान्य रूप से विकास होता है तो उसका गामक विकास सामान्य रूप से संभव होगा। क्योंकि इन्हीं कारको पर गामक विकास निर्भर करता है।
*4-:परिपक्वता---:* बालक की विभिन्न गुणों के विकास की परिपक्वता का उसके गामक विकास पर प्रभाव पड़ता है। यदि किसी गामक क्रिया हेतु, उसके शारीरिक या मानसिक गुण एक विशेष स्थिति में परिपक्व नहीं हो जाते तो वह काम क्रिया को नहीं कर सकते। जैसे-- चलने के लिए आवश्यक है कि शिशु के पैर की हड्डियां इतनी परिपक्व हो कि वह शरीर का बोझ संभाल सके।
*5-:आहार-:* बालक का खान-पान  तथा आहार उसके गामक विकास को प्रभावित करते हैं। खान-पान अथवा आहार वह ऊर्जा प्रदान करती है, जिससे उसके अंगों तथा मांस पेशियों में गति तथा वेग उत्पन्न हो सके। गामक विकास हेतु पौष्टिक एवं संतुलित आहार आवश्यक है ,जिससे उसके शरीर के अंग तथा मांसपेशियों हृष्ट- पुष्ट हो सके।
*6-: स्वास्थ्य-:* बालक के स्वास्थ्य का उसके गामक विकास पर प्रभाव पड़ता है। अस्वस्थ अथवा रोगी बालक कार्य करने में सक्षम नहीं होता, जिससे उसके अंग माँसपेशियाँ तथा स्नायुतंत्र शिथिल हो जाते हैं। अतः उसका गामक विकास अवरुद्ध हो जाता है।
*7-: व्यायाम--:* बालक के गामक विकास पर व्यायाम एवं खेलकूद तथा मालिश आदि का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। इससे प्रत्येक आयु में उसके अंग- प्रत्यंग, मांसपेशियों तथा स्नायु तंत्र स्फूर्तिवान तथा संचालित रहते हैं तथा दृढ़ता प्रदान करते हैं। इसलिए जन्म के उपरांत से ही शिशु को तेल मालिश और व्यायाम कराया जाता है। खेल कूद और शारीरिक कार्य भी व्यायाम  का ही रूप है।
*8-: अधिगम--:*  अधिगम का भी प्रभाव बालक के गामक विकास पर पड़ता है। बालक विभिन्न प्रकार की परिस्थितियों के प्रति समायोजन स्थापित करने का प्रयास करता है और सफलता प्राप्त करने हेतु गामक कुशलता अर्जित करता है। बालक प्रायः सभी क्रियात्मक कार्यों को करना सीखता है, इसके लिए वह किसी कार्य को करने का अभ्यास करता है तथा त्रुटियों को सुधारता है। गामक कौशल के विकास में अनुदेश, प्रदर्शन तथा शिक्षण आदि का प्रभाव पड़ता है। जिनका संबंध अधिगम से ही होता है।

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