नैतिकता का अर्थ--
*नैतिकता का अर्थ--* साधारण भाषा में कहा जा सकता है कि परिवार, समाज व समूह के नैतिक नियमों का अनुपालन करना ही नैतिकता है। नैतिकता के अंतर्गत समाज द्वारा निर्धारित व्यवहार और आदर्श आते हैं, व्यक्ति के कार्य और व्यवहार नैतिकता से संबंध हो जाते हैं। नैतिकता की कोई निर्धारित परिभाषा नहीं दी जा सकती, इसके विकास में विद्यालय और अध्यापक, परिवार, पड़ोस, समूह, समुदाय और समाज की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
नैतिकता से अभिप्राय सामाजिक समूह के नैतिक नियमों को स्वीकार करने से है।MORAL शब्द लैटिन भाषा में MORES शब्द से निकला है। जिसका तात्पर्य है रीति, रिवाज अथवा लोकरीति। नैतिक रुप से कार्य करने का अर्थ है --- समूह में आचरण के प्रति आस्था होना और और अनैतिकता से तात्पर्य है-- सामाजिक आदर्शों का पालन करने में असमर्थ होना । अनैतिक व्यवहार समूह के अनुरूप नहीं होता । इसका यह अर्थ नहीं कि उसमें व्यक्ति की हानि होती है अथवा व्यक्ति जानबूझकर अनैतिक कार्य करता है, अपितु सामाजिक मर्यादाओं का ज्ञान ना होना भी इसका कारण है।
नैतिकता सामाजिक नियंत्रण का साधन है। सामाज - सम्मत व्यवहार तथा आदर्शों का सम्मिलित रुप ही नैतिकता का स्वरूप धारण करता है। समाज के आदर्शों के प्रति स्वेच्छा से आचरण करना इसका ध्येय है। बाहर से अंदर की ओर अधिकार की पुष्टि ही इसका ध्येय है।भय ना होकर स्वेच्छा ही इसके आचरण का आधार है। व्यक्ति की भावनाएं कार्य से जुड़ जाती है। किसी भी कार्य को करते समय व्यक्ति यह सोचता है कि यह कार्य अनैतिक तो नहीं है। नैतिकता इतनी जटिल होती है कि वह बच्चों में नहीं पाई जाती। नैतिकता में दो प्रकार के उच्चतम दृष्टिकोण निहित होते हैं-- 1)-: बौद्धिक, 2)-:स्नायुविक। बालक को यह जानना आवश्यक हो जाता है कि वह यह जाने कि सच क्या है और क्या झूठ। क्या गलत है और क्या सही साथ ही उसमें यह भावना भी विकसित होनी चाहिए कि वह सही कार्य करें और गलत कार्य से बचें।
एल्डरिच के अनुसार, "बालक जब भी किसी कार्य को करने की इच्छा करता है तो उसे समाज से स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक हो जाता है। जब भी सामाजिक नियमों और व्यक्तित्व व्यवहार में संघर्ष उत्पन्न है तब नैतिक रूप से परिपक्व व्यक्ति उसके संतोष के लिए संघर्ष की स्थिति को कुशलतापूर्वक संभाल लेता है। संज्ञान का अर्थ" जानने के लिए यहाँ क्लिक करें
नैतिकता से अभिप्राय सामाजिक समूह के नैतिक नियमों को स्वीकार करने से है।MORAL शब्द लैटिन भाषा में MORES शब्द से निकला है। जिसका तात्पर्य है रीति, रिवाज अथवा लोकरीति। नैतिक रुप से कार्य करने का अर्थ है --- समूह में आचरण के प्रति आस्था होना और और अनैतिकता से तात्पर्य है-- सामाजिक आदर्शों का पालन करने में असमर्थ होना । अनैतिक व्यवहार समूह के अनुरूप नहीं होता । इसका यह अर्थ नहीं कि उसमें व्यक्ति की हानि होती है अथवा व्यक्ति जानबूझकर अनैतिक कार्य करता है, अपितु सामाजिक मर्यादाओं का ज्ञान ना होना भी इसका कारण है।
नैतिकता सामाजिक नियंत्रण का साधन है। सामाज - सम्मत व्यवहार तथा आदर्शों का सम्मिलित रुप ही नैतिकता का स्वरूप धारण करता है। समाज के आदर्शों के प्रति स्वेच्छा से आचरण करना इसका ध्येय है। बाहर से अंदर की ओर अधिकार की पुष्टि ही इसका ध्येय है।भय ना होकर स्वेच्छा ही इसके आचरण का आधार है। व्यक्ति की भावनाएं कार्य से जुड़ जाती है। किसी भी कार्य को करते समय व्यक्ति यह सोचता है कि यह कार्य अनैतिक तो नहीं है। नैतिकता इतनी जटिल होती है कि वह बच्चों में नहीं पाई जाती। नैतिकता में दो प्रकार के उच्चतम दृष्टिकोण निहित होते हैं-- 1)-: बौद्धिक, 2)-:स्नायुविक। बालक को यह जानना आवश्यक हो जाता है कि वह यह जाने कि सच क्या है और क्या झूठ। क्या गलत है और क्या सही साथ ही उसमें यह भावना भी विकसित होनी चाहिए कि वह सही कार्य करें और गलत कार्य से बचें।
एल्डरिच के अनुसार, "बालक जब भी किसी कार्य को करने की इच्छा करता है तो उसे समाज से स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक हो जाता है। जब भी सामाजिक नियमों और व्यक्तित्व व्यवहार में संघर्ष उत्पन्न है तब नैतिक रूप से परिपक्व व्यक्ति उसके संतोष के लिए संघर्ष की स्थिति को कुशलतापूर्वक संभाल लेता है। संज्ञान का अर्थ" जानने के लिए यहाँ क्लिक करें
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