मातृभाषा
*मातृभाषा--:* भाषा का प्रथम रुप ```'मातृभाषा'``` है। मातृभाषा का शाब्दिक अर्थ है -- माँ से ग्रहण की हुई भाषा, किन्तु हम 'जननी जन्मभूमिश्च' कह कर मां के विशाल रूप में मातृभूमि को भी देखते हैं। अतः जन्म भूमि में व्यवहृत भाषा को मातृभाषा कहते हैं । कभी-कभी मां की भाषा और मातृभूमि की स्वीकृत भाषा में अंतर होता है । उत्तर प्रदेश में अधिकांश छात्र प्रारंभ में अपनी माता के मुंह से अवधी,ब्रज, भोजपुरी, आदि सुनते हैं किंतु उत्तर प्रदेश की मातृभाषा हिंदी है। अवधी, ब्रज, भोजपुरी आदि हिंदी की बोलियां है । ये स्वतंत्र भाषाएँ नहीं है। इन्हें जनपद भाषा भी कहा जाता है। संसार के सभी देशों में स्वीकृत भाषाओं की अपनी-अपनी बोलियां भी है। अंग्रेजी इंग्लैंड की मातृभाषा है। किंतु वेल्स - जैसी समृद्ध भाषा को भी बोली का ही स्तर मिल सका है। जनपद भाषाओं को मातृभाषा के समकक्ष नहीं रखा जा सकता। बैलार्ड़ ने घर की बोली को 'माता की भाषा' और समाज द्वारा स्वीकृत भाषा को 'मातृभाषा' कहा है।
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