How Did Life Begin On Earth Theories

how did life begin on earth theories



इसके बारे में बहुत सारे वैज्ञानीकों (Scientist) ने अपना अपना मत यानि सिद्ध प्रतिपादन किया।

पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति कैसे हुई


जीवन कि उत्पति के सिद्धान्त(Theories of Origin of Life):-इस समस्या को लेकर अनेक मत प्रस्तुत किये गए है जो निम्नलिखित है प्रमुख हैं.

क्रम  विकास(evolution):-इस सिद्धान्त के अनुसार जितने भी वर्तमान जिव जंतु इस संसार में है,उनकी उत्त्पति उनके पूर्व अनेक जिव जंतु से हुई है,उनके पूर्वज अपेछाकृत सरल थे धिरे-धीरे  कई पीढ़ियों (Generation) तक उनमे आनुवंशिक परिवर्तन(Geneticaly midification) होते हैं, ये सभी परिवर्तन उनमे एकत्र होता गया,फलतःवर्तमान जिव जंतु का उदय हुआ.

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life on earth
              
           अतः जिव जंतुओं में क्रम के अनुसार  होने वाले परिवर्तन या विकास को क्रम विकास (evolution )कहते हैं!

(1).स्वतः जनन (Self Reproduction):-

इस मत के अनुसार अधिकांशजंतुओं( creatures )की उत्पति स्वतः अजीवी पदार्थों से होती है,मिश्र वासियों का विस्वास था की निल नदि के कीचड़ सूखने के बाद मछली(fish),मेढक(frogs),सांप(snake ) घड़ियाल(Gharial) इत्यादि जीवित जंतु अपीने आप पैदा हो जाते हैं,इस सिद्धान्त(मत) के अनुसार मखियां(Flies) मांस(meet) से उत्पन हुई है तथा तितलियाँ पनीर(paneer) से उत्पन हुई है!

(2).रेडी का प्रयोग        Redi's  ExprimentExpriment):-

रेडी ने मांस के टुकड़े को चौड़े मुंह वाले जार में रखा,जिनमे कुछ के मुंह कागज या मलमल के कपडे से बंद था तथा कुछ के मुंह खुले थे.
        कुछ दिन बाद रेडी ने उन जारो को देखा तो पाया की रेडी ने बंद जार में मखियां के लार्वा(larva's) नही पाया गया ,परंतु मखियां ने कागज एवं मलमल के कपड़े पर अंडे(eggs) दे रखे थें, जिनमे लार्वा बना ,परंतु खुले जार में मखियां मांस तक पहुच गए,और वहाँ वे अंडे दिए तथा वहां पर लार्वा बना.
           अतः इस प्रयोग से स्पस्ट है की मखियां  मांस से नहीं बल्कि अंडे  से उत्पन होती है,जिसके कारन इस सिद्धान्त(self reproduction) को अमान्य कर दिया गया!

(3) लुइ पास्चर का प्रयोग (Louis Pasteur expriment):-फ़्रांसिसी वैज्ञानिक लुइ पाश्चर louis Pasteur ने 1864 ई. में अपने प्रयोगों के आधार पर  स्वतः जनन(self reproduction) की भूल को प्रमाणित किया ,इसके प्रयोग निम्नलिखित हैं.



(1).उन्होंने एक फ्लास्क  flask में पोषक  पदार्थneutrientके घोल डाला इसके बाद उसकी गर्दन को अंग्रजी के अक्षर 'S' के आकार में मोड दिया.


(2).इसके घोल को पूर्णतः उबाला



(3).गर्दन के अंतिम  सिरे को इस प्रकार बंद किया की वातावरण से कोई व् जिव उसमे प्रवेश न कर पाये



(4).इस मिश्रण को ठंढा किया



(5).काफी समय के बाद भी उसमे कोई जिव उत्पन नहीं हुआ तो पास्चर ने फ्लास्क के गर्दन को तोड़ दियाऔर कुछ दिनों के बाद उस तरल पदार्थ की परीक्षा किया तो उसमे अनेक सूक्ष्म जिव पाये गए.               

             अतः इस प्रयोग से स्पस्ट होता है की जीवो की उत्पति धरती पर जो जिव पहले से ही थे  उन्ही से नए  जीवो की उत्पति हुई है , न की  अचानक अजैविक पदार्थो अर्थात पोषक तत्वों  से हुई है.

विशेष सृस्टि(Special creation)

इस मत के अनुसार जीवो की उत्पति किसी अलौकिक शक्ति के द्वारा एक बार या थोड़े थोड़े समय के अंतराल में हुई है
cosmojoic theory:- आर हेनियास( R. henius) ने 1903 ई.  में बताया की जीवो की उत्पति हुई नहीं बल्कि अन्य पदार्थों की तरह वे भी हमेशा से इस  पृथ्वी(earth) पर मौजूद(present) रहे हैं, लेकिन हम जानते हैं की जब तत्व ही हमेशा से इस पृथ्वी(earth) पर नही रहे हैं तो जिव हमेशा से कैसे रह सकता है,उनकी दूसरी कल्पना के अनुसार जीवो की उत्पति अन्य ग्रहों पर हुई है और वहां से वे पृथ्वी पर स्थानान्तरित हुए हैं परंतु इस मत को भी मान्यता नही मिल पाई.

प्रकृतिवादी सिद्धान्त (Natural Selection):-इस सिद्धान्त के प्रवर्तकों का कहना है की आदि समुद्र में जिव अनुकूलन वातावरण में स्वतः उत्पन हुए  हैं,उस समय समुद्र में अन्य पदार्थों के के अतिरिक्त अन्य प्रचुर मात्रा में अनेक कार्बनीक पदार्थ भी मौयुद्  थे जो जीवो में भी पाये जाते हैंअधिकांश आधुनिक वैज्ञानिक इस सिद्धान्त से काफी सहमत हैं.


चाल्स रोबर्ट डार्विन (Charles Robert Darwin) का मत:-1858 ई में चाल्स डार्विन(charls robbert drawin ) ने बताया की जीवन उत्पति के समय वर्तमान  में युग से स्थितियां भिन्न थी,उनका अनुमान था की एमिनो अम्ल( amino acide) जिव (orgnism)  के शारीर के बहार मौयुद्  थे ,उन्होंने फास्फेट (phosphet) एंड अमोनिया(amonea) का ताप (tempreture)  एवं प्रकाश(light) के प्रभाव में संयोजन कर प्रोटीन (protain) का संशलेशन किया और बताया की अब यह संभव नही हैकि एक पदार्थ जीवों के शारीर के बहार रह स्के क्योंकि सुछमजीव  इनको शीघ्र ही नष्ट कर देंगे

वैज्ञानिको (scientist's) द्वारा सर्वाधिक महत्त्व दिया जाने वाला जो बात है वो है 'अदि पृथ्वी या  big bang theory'




Big Bang Theory:-

अनुमान के अनुसार पृथ्वी का निर्माण आज से लगभग साढ़े चार -पाँच सौ करोड साल पहले हुआ था अधुनीक वैज्ञानिको  के अनुसार सूर्य(sun) एवं ग्रहो(setelight) की एक अति गर्म एवं तीव्र वेग से घूमते हुए  धुल cosmic एवं गैसों के बदल  के एक गोले से एक साथ हुआ है वह बादल का गोला बादल का मुक्त परमाणुओं(atom) का बना था जिसमे अधिकांस हाइड्रोजन ( hydrogen ) परमाणु थे ,


घूर्णन एवम गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के  कारन यह बादल का गोला चिपककर  चपटी एवंगोल तस्तरी के सामान हो गया बाद में यह टूट गया जिससे अनेक घूर्णन करने वाले पिंड बने जिसके मध्य में सूर्य था और उसके चारो और घूमते हुए छोटे छोटे गैसीय पिंड थे जिनसे ग्रहों का निर्माण हुआ जिसमे एक हमारी पृथ्वी भी  थी!
               लोहा एवं निकेल गुरुत्वाकर्षणके कारन पृथ्वी के सबसे आंतरिक भाग में एकत्र हुए,हलके तत्व जैसे एलुमिनियम ,सिलिकॉन फास्फोरस,तथा सल्फर उसके चारो और एकत्र होकर मध्य भाग का निर्माण किये,सबसे हलके तत्व जैसे हाइड्रोजेन ,ऑक्सीजन ,
नाइट्रोजेन ,कार्बन इत्यादि पृथ्वी के बाह्य भाग अर्थात वायुमंडल का निर्माण किया.


इस प्रारंभिक पृथ्वी को आदि पृथ्वी कहते हैं तथा इस सिद्धान्त को बिग बंग सिद्धान्त(big bang theory)कहते हैं

प्रलयवाद का सिद्धान्त (Doctrine of liberty):-

इस सिद्धान्त का प्रतिपादन फ्रांश के जीवाश्म विज्ञानं (Paleontology) एवं शारीर रचना विज्ञानं ( Anatomy)के वैज्ञानिक कुविअर(Caviar) ने किया था ,जीवाश्मों ( Fossils ) का अध्यन करने के बाद पता चला की जीवाश्म जंतुओं का जीवित प्रतिनिधि इस पृथ्वी पर मौयूद नही है,इनका कहना था की किसी युग में रहने वाला जिव युग के अंत में नस्ट हो जाते हैंऔर फिर नए युग में नए जीवों की
सृस्टि का निर्माण होता है

कार्बनिक क्रम विकासवाद:-

इस सिद्धान्त को सबसे अधिक मान्यता मिली ,इस सिद्धान्त के अनुसार किसी काल में धीरे- धीरे परिवर्तन होने से कालांतर में अर्थात युगों का अंतर में कितना परिवर्तन हो जाता है,की जीवों के नए रूप उनके पूर्वजों से बिलकुल भिन्न दिखाई देते हैं |
          
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