गुप्त साम्राज्य

मौर्य वंश से सम्बंधित जानकारी के लिए...                गुप्त साम्राज्य


1. गुप्त वंश का पहला महत्त्वपूर्ण शासक चन्द्रगुप्त प्रथम था, लेकिन इसके पहले श्री गुप्त(240-285 ई.) तथा घटोत्कच (280-320 ई.) का शासक के रूप में उल्लेख मिलता है।
2. चन्द्रगुप्त प्रथम(319-350ई) ने 320 ई में गुप्त संवत् की शुरूआत की। उसने महाराजाधिराज की उपाधि धारण की थी।
3. चन्द्रगुप्त प्रथम ने अपने राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए लिच्छवि राजकुमारी कुमार देवी से विवाह किया था। जो उस समय की महत्तवपूर्ण घटना थी।
4. समुद्रगुप्त (350-375 ई) चन्द्रगुप्त प्रथम का पुत्र था।
5. विभिन्न अभियानों के कारण इतिहासकार वी.ए. स्मिथ ने उसे 'भारत का नेपोलियन' कहा है।
मौर्य साम्राट से सम्बंधित जानकारी।
6. समुद्रगुप्त की विजयों और उसके बारें में जानकारी के स्रोत उसके दरबारी कवि हरिषेन द्वारा रचित प्रयाग प्रशस्ति या इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख है।
7. समुद्रगुप्त की अनुमति से सिंहल(श्री लंका) के राजा मेघवर्मन ने बोधगया में एक बौद्ध मठ स्थापित किया था।
8. समुद्रगुप्त को उसके सिक्कों पर वीणा बजाते हुए दिखाता गया है।
9. चन्द्रगुप्त द्वितीय(375-415 ई) का काल गुप्तकाल में साहित्य और कला का स्वर्ण काल कहा जाता है।
10. चन्द्रगुप्त द्वितीय ने शाकों को पराजित कर विक्रमादित्य की उपाधि धारण की तथा चाँदी के सिक्के चलाएँ।
11. चन्द्रगुप्त द्वितीय के कार्यकाल (399-412ई) में चीनी यात्री फाह्यान भारत आया था।
12. उसके दरबार में नौ विद्वानों की मण्डली थी ,जिसे नवरत्न कहा जाता था। जिसमें कालिदास,अमरसिंह आदि शामिल थे ।
13. कुमारगुप्त प्रथम (415-455 ई) के समय में नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी थी।
14. स्कंदगुप्त(455-467 ई) गुप्त वंश का अंतिम प्रतापी शासक था। उसने हुणों के आक्रमण को विफल किया था।
15. स्कन्दगुप्त ने भी चन्द्रगुप्त मौर्य के समय में निर्मित सुदर्शन झील का पुनरुद्धार करवाया।
16. गुप्तकालीन प्रशासन की सबसे छोटी इकाई ग्राम थी । जिसका प्रशासन ग्राफिक का हाथ में होता था।
17. कई गाँवों को मिलाकर पेठ बनते थे।
18. भारत में मन्दिरों का निर्माण गुप्त काल से शुरू हुआ। देवगढ़ का दशावतार मंदिर गुप्तकाल की कला का सबसे उत्कृष्ट मंदिर था ।
19. गुप्तकालीन बौद्ध गुफा मन्दिरों में अजंता वा बाघ की गुफाएँ प्रमुख है।
20. गुप्त शासकों की राजकीय वा अधिकारिक भाषा संस्कृत थी।
21. गुप्तकाल में भाग एवं भोग राजस्व कर था। भाग उपज का छठ हिस्सा होता था।जबकि भोग सब्जी तथा फलों के रूप में दी जाती थी।

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