राष्ट्र आज उनकी जय बोल!...
मिटे प्राण की बलि चढ़ाकर,
डटे राष्ट्र की पूजा गाकर,
जिनकी रक्त लालिमा से है,
पाई आजादी अनमोल!
खुली हवा में साँस मिली है,
खुशहाली की आस मिली है,
वंदन उनका करने को तू
हृदयों के दरवाजे खोल!
जाति-धर्म के तोड़ें बंधन,
भूल भेद महके ज्यों चंदन,
उनसे तुलना करके अपनी,
खुद से उनका जज्बा तोल!
शपथ आज उनकी हम खाएँ,
सपने उनके फिर चमकाएँ,
भेदभाव के कड़वे रस को,
प्रेम-चाशनी में तू घोल!
त्याग सदा वह अमर रहेगा,
शौर्य सदा वह अजर रहेगा,
वीर शहीदों की देनों का,
कौन चुका सकता है मोल?
© निशान्त जैन
बाल कविता संकलन 'शादी बन्दर मामा की' में संकलित।
डटे राष्ट्र की पूजा गाकर,
जिनकी रक्त लालिमा से है,
पाई आजादी अनमोल!
खुली हवा में साँस मिली है,
खुशहाली की आस मिली है,
वंदन उनका करने को तू
हृदयों के दरवाजे खोल!
जाति-धर्म के तोड़ें बंधन,
भूल भेद महके ज्यों चंदन,
उनसे तुलना करके अपनी,
खुद से उनका जज्बा तोल!
शपथ आज उनकी हम खाएँ,
सपने उनके फिर चमकाएँ,
भेदभाव के कड़वे रस को,
प्रेम-चाशनी में तू घोल!
त्याग सदा वह अमर रहेगा,
शौर्य सदा वह अजर रहेगा,
वीर शहीदों की देनों का,
कौन चुका सकता है मोल?
© निशान्त जैन
बाल कविता संकलन 'शादी बन्दर मामा की' में संकलित।

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