तितली रानी...
गुनगुन करती तितली आई,बच्चों के मन को है भाई।
टिंकू - टीना - टुनटुन - टिल्लू,
मिलकर सबने दौड़ लगाई।
लाख कोशिशें करने पर भी,
तितली रानी पकड़ न आई।
मदमाते - मुसकाते - मधुरिम,
फूलों पर लेती अँगड़ाई।
खुशबू की इतनी दीवानी,
मँडराती ही पड़े दिखाई।
मैडम! मुझको तितली रानी,
लगती शरमाई - सकुचाई।
© निशान्त जैन
बाल कविता संकलन 'शादी बन्दर मामा की' में संकलित।
(दैनिक ट्रिब्यून, 5 नवंबर 2006)
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