गाग़रोण का दुर्ग (झालावाड़)

गागरोन का किला दक्षिण पूर्वी राजस्थान के सबसे प्राचीन और विकट दुर्ग में से एक है यह दूर की कोटा से लगभग 60 किलोमीटर तथा झालावाड़ से 4 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है यह ख्यातनाम दुर्गे काली सिंध और आओ नदियों के संगम स्थल पर स्थित है तथा तीन तरफ से उक्त नदियों से घिरा होने के कारण हमारे प्राचीन शास्त्रों में वर्णित जल दूर की कोटि में आता है गागरोन का यह भव्य दुर्गे खींची चौहानों का प्रमुख संस्थान रहा है जिसके साथ योद्धाओं के शौर्य और पराक्रम तथा वीरांगनाओं के जोर की गाथा जुड़ी हुई है गागरोन एक ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व का स्थान है?

 यहां से पुरातत्व ताऊ ऐसे अनेक पाषाण कालीन उपकरण मिला है? जो सभ्यता के आदिमकाल पर प्रकाश डालते हैं पौराणिक मान्यता इसका संबंध भगवान कृष्ण के पुरोहित गर्गाचार्य से जोड़ती है जिनका यह निवास स्थान था तो कुछ विद्वान प्राचीन ग्रंथों में उल्लेखित गर्ग रायपुर के रूप में इसका पहचान करते हैं? ऐतिहासिक क्षणों के अनुसार गांव रोड पर पहले डोडिया डोडिया परमार राजपूतों का अधिकार था जिन्होंने इस दुर्ग का निर्माण करवाया उनके नाम पर यह दौड़ कर दिया धुलागढ़ के लाया इसके बाद यह दुर्गति चौहानों के अधिकार में आ गया चौहान कुल कल्पद्रुम के अनुसार गांव रोड के खींची चौहान राजवंश का संस्थापक देवेंद्र सिंह था जिसने बिजल देव नामक डॉट को मारकर दुर्लभ पर अधिकार कर लिया तथा उसका नाम गागरो रखा इस घटना का समय बारहवीं शती का उत्तरार्ध माना जाता है?

 गागरोन के खींची राजवंश में एक से बढ़कर एक वीर और प्रतापी शासक हुए सन 1303 में यहां के राजा जयसिंह के शासनकाल में सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने गागरोन पर आक्रमण किया था परंतु जीत सिंह ने उसका सफलतापूर्वक प्रतिरोध किया उसके शासनकाल में खुरासान से प्रसिद्ध सूफी संत के मुद्दीन चिश्ती गागरो ढाई दिन की समाधि वहां विद्यमान है यह सूफी संत मिठे मिठे साहब के नाम से लोग में पूजे जाते हैं गांव रोड के खींची राजवंश में जयसिंह के 3pd बाद पीपा राम प्रताप सिंह एक भक्ति प्राण नरेश हुए वे दिल्ली के सुल्तान फिरोजशाह तुगलक के समकालीन थे अपने जीवन के उत्तरार्ध में पीपा जी ने राज्य में क्या कर प्रसिद्ध संत रामानंद का शिष्य ताऊ स्वीकार कर लिया था गागरोन दुर्ग के पार्श्व में कालीसिंध और नदियों के संगम के समीप ही उनकी छतरी पीपा जी की छतरी बनी हुई है?

 यहां उनकी पुण्यतिथि पर हर वर्ष मेला भरता है गागरोन का सर्वाधिक ख्यातनाम और पराक्रमी शासक भोजराज का पुत्र दास हुआ जिस के शासनकाल में गागरोन का पहला का हुआ यह वाड़ा रहा था मांडू के सुल्तान अलका गौरी का एक विशाल सेना के साथ गांव रोड पर आक्रमण कर किले को घेर लिया लेते भीषण संग्राम हुआ जिसमें अचलदास ने अपने बंधु बांधों और योद्धाओं सहित शत्रु से जोड़ते हुए वीरगति प्राप्त की तथा उसकी रानियों विदुर की ललना उन्होंने अपने को जोर की ज्वाला में समर्पित किया अचलदास खींची के इस युद्ध संग्राम का उसके समकालीन चारण कवि शिवदास गार्डन ने लगभग 574 वर्ष पूर्व रचित अपने कार्य करती अचलदास खींची बचने का आदेश भी वर्णन किया है?

 जो डिंगल की आधी वतनिका होने के साथ ही उक्त युद्ध पर प्रकाश डालने वाली एकमात्र समसा एक रचना है अचल दास ने वंश रक्षा के लिए अपने जेष्ठ पुत्र फालेसी को दुर्ग से पलायन करने हेतु प्रेरित किया ऐसा माना जाता है कि वचन के का रचयिता गडर से उदास जी उसके साथ ही दुर्ग से बाहर निकल गए बंद के रचेता गार्डन उदास ने राजस्थान के सांको के बारे में लिखा है?
जिम राजा हमीर की ओर सा को रणथंबोर रायसेन का डैम की ओ पूरणमल कुमार अचलदास घाघरे ट्रेन मूल्य जैसा नो मंडावर पियो पियो सा कल सियाणा चित्तौड़ की अजमल चढ़े फल पावे दुर्गी श्री पठान खतरे का नक्शा को जिम गढ़ सोनगिरी?

गागरोन दुर्ग को अधिकृत करने के बाद होशंग शाह ने इसे अपने बड़े शहजादे गजनी कहां को सौंप दिया जिसने इस दुर्ग का विस्तार एवं परिवर्तन करवाया तथा उसे दुर्गे रूप प्रदान किया पालन से अचलदास खींची का पुत्र अपने खोए हुए पत्र राज्य को पुनः प्राप्त करने के लिए सामरिक तैयारी करता हुआ अनुकूल अवसर की प्रतीक्षा करने लगा अपने मामा राणा कुंभा की सैन्य सहायता से उसने 1437 ईस्वी में गागरोन के दुर्गा अध्यक्ष दिलशाद को प्राप्त कर किले पर अपना अधिकार कर लिया?

 पलट से का गांव रोड पर लगभग 7 वर्ष तक अधिकार रहा उक्त अवधि में पिछले अनुभव से प्रेरणा लेते हुए उसने दूर की रक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया तथा संभावित हुई थी को ध्यान में रखकर किले में रसद अधिकारी चकिया 1444 इसमें में महमूद खिलजी ने गांव रोड पर एक विशाल सेना के साथ जोरदार आक्रमण किया तब गागरोन का दूसरा साका हुआ मासी रे महमूद साई के अनुसार सुल्तान महमूद खिलजी अपने अमीर उमराव और 29 हाथियों सहित संयम कालीसिंध नदी के तट पर उतरा अपनी विशाल सेना से दूर को चारों ओर से घेर लिया पालन सीने दूर की रक्षा की पिछले 7 वर्षों से पूरी पूरी तैयारी कर रखी थी फिर भी उसने मेवाड़ के तत्कालीन महाराणा एवं अपने मामा से सैनिक सहायता की प्रार्थना की जिस पर घुमाने धीरे-धीरे देव के नेतृत्व में आयु व अन्य सामग्री से एक सैन्य दल उसके साथ भेज दिया ?

दोनों ओर से भीषण संग्राम हुआ जो लगातार 7 दिन तक चलता रहा इस युद्ध में राजपूत अत्यधिक संख्या में मारे गए फिर भी वह दूर की रक्षा में अंतिम क्षण तक चट्टान की तरह अविचल डटे रहे हैं युद्ध के सातवें दिन सेनापति तेरा अपने योद्धाओं सहित वीरता पूर्वक लड़ते हुए मारा गया जिससे पालन सी की हिम्मत टूट गई साथ ही महमूद खिलजी के सैनिकों ने दुर्ग में जल पहुंचाने के मार्ग को अवरुद्ध कर दिया फलत ए विजय की कोई खास आने दे पालन से अपने कुछ चुने हुए विश्वस्त सैनिकों के साथ रात्रि के अंधेरे में दुर्ग से बाहर पलायन कर गया परंतु जंगल में भटकते हुए उसका पाला बर्बर बिलों के एक गिरोह से पड़ गया?

 जिसने पालन सहित उसके दल के प्रत्येक सैनिक का वध कर दिया दुर्ग में सज रहे योद्धा केसरिया वस्त्र धारण कर शत्रु सेना पर टूट पड़े तथा वीरांगनाओं ने जोर का अनुष्ठान किया विजय सुल्तान महमूद खिलजी ने कुछ अरसे बाद दुर्ग में एक ओर कोर्ट का निर्माण करवाया तथा उसका नाम मुस्तफाबाद रखा दिया इसके बाद गागरो दूर पर मेवाड़ के राणा सांगा ने अपना आधिपत्य किया तथा इसे अपने विश्वासपात्र मेदिनी राय को सौंप दिया मांडू के सुल्तान महमूद खिलजी दितीय ने 1518 1519 के लगभग एक विशाल सेना के साथ गागरोन दुर्ग को घेर लिया इस पर राणा सांगा ने तत्काल मेदिनी राय को सैन्य सहायता भेजी जिससे महमूद खिलजी को किले का घेरा उठाने के लिए विवश होना पड़ा इसके बाद गुजरात के शासक बहादुर शाह ने चित्तौड़ अभियान करने से पहले 15 से 32 ईसवी के लगभग रोड पर अधिकार कर लिया?

शेरशाह सूरी जब बना तो मालवा के अधिकांश भूभाग सहित गांव रोड पर उसका अधिकार हो गया तदुपरांत गांव रोड पर मुगलों का आधिपत्य हो गया बादशाह अकबर ने 1561 में आदम खान के विद्रोह को दबाने के सिलसिले में मालवा गया तब उसकी सेना ने गागरो दूर पर डाला उस समय गागरोन का दुर्ग अध्यक्ष मांडू के सुल्तान बहादुर का कोई सा मंथ था जिसने अकबर जैसे शक्तिशाली शासक से युद्ध करना समझ कर उसके हवाले कर दिया खेती चौहान ने अपने संस्थान गांव रोड पर अधिकार स्थापित करने हेतु रायमल खींची के नेतृत्व में अपना संघर्ष जारी रखा किंतु मुगल सेना नायक अंबेर की गुमान सिंह और उनके भतीजे राव खंगार उनके इरादे विफल कर दिए 1567 में अपने चित्तौड़ अभियान के लिए जाते समय बादशाह अकबर कुछ दिनों के लिए गांव रोड में ठहरा था?

 जहां अबुल फजल के बड़े भाई जी ने उसे भेंट की थी अकबर ने गांव रोड दूर की बीकानेर के राजा कल्याणमल के पुत्र पृथ्वीराज राठौड़ को जागीर में दे दिया जो एक भक्त कवि और वीर योद्धा था विद्वानों का अनुमान है कि इस पृथ्वीराज राठौड़ ने अपना प्रसिद्ध ग्रंथ वेली किशन रुक्मणी री गांव रोड गढ़ में रहकर लिखा तत्पश्चात जांगिड़ ने इसे बूंदी के राव रतन हाड़ा को जागीर में इनायत कर दिया शाहजहां के शासनकाल में जब कोटा में हवाओं का पृथक राज्य स्थापित हुआ?

 तब गागरोन का यह दुर्ग कोटा के राव मुकुंद सिंह को इनायत हुआ तथा फिर स्वतंत्रता प्राप्ति तक कोटा के हाड़ा नरेश के अधिकार में रहा जिन्होंने इस प्राचीन दुर्ग का जीर्णोद्धार एवं विस्तार करवाया नैणसी री ख्यात के अनुसार राव मुकंद सिंह ने दुर्ग में अनेक महल इत्यादि बनवाकर उसे नए सिरे से सजाया संवारा राव दुर्जन साल इसी किले के भीतर भगवान मधुसूदन का भव्य मंदिर बनवाया तत्कालीन कोटा रियासत के सेनापति जालिम सिंह जाला ने गागरोन के किले की मराठों तथा अन्य संभावित आक्रांत से सुरक्षा के लिए अनेक भवनों के अलावा एक विशाल परकोटे का निर्माण करवाया जो उन्हीं के नाम पर जालिम कोर्ट के लाता है?

 यह दुर्ग आज भी न केवल हाड़ौती अंचल में राजस्थान में भेजो नमूना माना जाता है कि सबसे बड़ी विशेषता इसकी सुरक्षा व्यवस्था ऊंची पर्वत मालाओं की दीवारों पर वह मान नदियों और सघन वन ने गांव रोड को प्राकृतिक सुरक्षा कवच प्रदान किया है मालवा गुजरात मेवाड़ और हाडोती का सीमावर्ती दूर होने से गागरोन का सामरिक दृष्टि से बड़ा महत्व गागरोन का किला पर्वतमाला के आकार से इस तरह मिल गया कि दूर से सहसा दिखलाई नहीं पड़ता अपनी बनावट की इस अद्भुत विशेषता के कारण छात्रों के लिए दूर से किले की स्थिति का अनुमान करना कठिन होगा वृत्ताकार पाषाण शिला उन से निर्मित दुर्ग की विशालकाय गुर्जर तथा सतत जल से भरी रहने वाली गहरी खाई घुमावदार शूद्र प्रवेश द्वार इन सब की वजह से गागरोन के किले की सुरक्षा व्यवस्था को भेजना किसी भी आक्रांता के लिए लोहे के चने चबाने से कम नहीं था?

टी ओ रे सुरक्षित दूर के प्रवेश द्वार में सूरजपोल भैरव बोल तथा गणेश पोल प्रमुख तथा इसकी विशाल सुदृढ़ उर्दू में राम और देखनी है प्राचीन काल में गागरोन के मुख्य प्रवेश द्वार पर लकड़ी का उड़ने वाला पुल बना हुआ था यहां के विशिष्ट स्थलों में दुर्ग में विशाल जोर कुंड तथा राजा अचलदास और उनकी रानियों के महल कारखाना बारूद खाना टकसाल मधुसूदन और शीतला माता के मंदिर सूफी साहब की दरगाह तथा औरंगजेब द्वारा निर्मित बुलंद दरवाजा प्रमुख है गांव रोड दूर के दक्षिण में कालीसिंध एवं नदियों का मिलन होता है जहां से यह दोनों नदियां एकरूप होकर दुर्ग के पूर्वी बाकी परिक्रमा करती तथा चट्टानों के बीच खेलिया करती हुई प्रचंड वेग से किले के समानांतर बेकर गणेश घाट से सीधे उत्तर की ओर प्रवाहित हो जाती है इसके पास ही गागरोन के संत नरेश पीपा जी की छतरी है दूर के चतुर देर की तलाश आमजन नाना प्रकार के पक्षियों के कलरव और मयूर ध्वनि से गुंजित रहता है वहां के पक्षियों में मनुष्य की आवाज की हूबहू नकल करने वाले गागरोन के राय या हीरामन तोता बहुत प्रसिद्ध रहे हैं

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