भारत की चीन के प्रति विदेश निति

भारत सदैव से चीन के प्रति मित्रता पूर्ण व्यवहार में विश्वास करता है 1931 में जापान के द्वारा चीन पर आक्रमण के समय भारत ने चीन का समर्थन किया 1 अक्टूबर 1949 को चीन के साम्यवादी गणराज्य होने की घोषणा के बाद 30 दिसंबर 1949 को भारत में नए राज्यों को अपने मान्यता प्रदान कीसम्बन्धों की ऐतिहासिकता को देखा जाए तो वर्ष 1949 से 1957 का काल युद्धकाल तथा पंचशील की मित्रतापूर्ण भावना से प्रेरित रहा है । भारतीय नेतृत्व की तुष्टिकारी मनोवृत्ति के तहत चीनी छद्म मित्रता से 25 अक्टूबर , 1950 को चीन द्वारा तिब्बत पर आक्रमण को अन्तर्देशीय मामला माना गया ।

 1954 में 8 वर्षीय व्यापारिक समझौते में पंचशील के सिद्धान्तों को स्वीकारते हुए बहिर्देशीय अधिकारों को बिना सीमा निर्धारित किए सौंप देना , भारतीय तुष्टिकारी नीति की पराकाष्ठा थी । वर्ष 1957 से 1976 का काल — यह काल दोनों के तनाव की पराकाष्ठा का काल रहा , जबकि 20 अक्टूबर , 1962 को चीन ने सारी पूर्वधारणाओं को तोड़कर भारत पर आक्रमण किया । वर्ष 1978 से 2014 तक – माओत्तर नेताओं के बाद से सम्बन्धों का संवादकाल रहा , जबकि सीमा विवाद पर टकराव के साथ सम्बन्ध सुधार के प्रयास होते रहे । । तनाव के मूल कारण 1 , एशिया का नेतृत्व जनसंख्या शक्ति प्राकृतिक संसाधनों , भौगोलिक कारकों में भारत व चीन में साम्यता पायी जाती है ।

 दोनों राष्ट्र महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में एशिया के नेतृत्व के प्रतिस्पर्धी हैं । 1955 के बाण्डंग सम्मेलन में पण्डित नेहरू ने जहां अफ्रीका व एशियाई राष्ट्रों की एकजुटता का आहान किया वहीं चीन द्वारा 1962 के आक्रमण द्वारा भारत को दूसरे दर्जे का सिद्ध करने की मनोवृत्ति रही है । | 2 . विचारधाराओं का संघर्ष – भारतीय विदेश नीति शक्ति , लोकतन्त्र , मित्रता , सहिष्णुता का आह्वान करती है , जबकि माओवादी नीतियों पर आधारित चीनी विदेशनीति का मूलमन्त्र साम्राज्य विस्तार , शक्तिवादी , सैन्यवादी , माओवादी नीतियों पर आधारित है । लोकतान्त्रिक , सहयोग - मित्रता के आदर्शों पर अवलम्बित भारतीय विदेश नीति व सैन्यवादी साम्राज्य विस्तार , शक्तिवाद का मुलमन्त्र लिए चीनी विदेश नीति के मध्य संघर्ष का कारण है ।

 3 . तिब्बत का अधिग्रहण व सीमा विवाद जनवरी , 1950 में तिब्बत के चीनी अधिग्रहण को भारत ने स्वीकार लिया , किन्तु 1956 में तिब्बत के खम्पाक्षेत्र में दलाईलामा के नेतृत्व में विद्रोह को कुचलने के बाद भारत में दलाईलामा व शरणार्थियों के बसने को चीन ने । शत्रुतापूर्ण माना । । भारत - चीन सीमा - विवाद - 1954 में चीन द्वारा बुझे नामक स्थान ( भारत के बडा होतो ) पर दावा और 1962 के चीनी आक्रमण के उपरान्त ( G ) 35 हजार वर्ग किलोमीटर का भारतीय भू - भाग पर कब्जा , अक्साई भू - भाग को अपने देश का हिस्सा मानना । ( ii ) अरुणाचल प्रदेश को भारतीय भू - भाग के रूप में मान्यता न देना ।

 भारत में चीन के मध्य एक निश्चित सीमा - रेखा , जिसे अंग्रेजों ने निर्धारित की थी — मैकमोहन रेखा ने माना । 4 , ‘ मास्को - दिल्ली मैत्रीपूर्ण ध्रुव – पीकिंग द्वारा पाक को हथियारों को आपूर्ति व भारत - मास्को मैत्री पर माओवादियों की भारत - नेपाल मैत्री में बाधा प्रस्तुत करना आदि तथ्य भी तनाव के कारण रहे हैं । मास्को - नयी दिल्ली गठबन्धन को सन्तुलित करने के लिए इस्लामाबाद पीकिंग गठबन्धन किया गया । वर्तमान स्थिति – ' मधुरता की तलाश ' 1988 में राजीव गांधी को चीन यात्रा से आरम्भ , सर्वध सुधार की प्रक्रिया का एक महत्त्वपूर्ण चरण , सितम्बर 1903 को चीन यात्री वे चन समझौता है जिसमें दोनों देशों के बीच 4 हजार किलोमीटर लम्बे हिमालयी समिति शांति बहाल किए जाने , वास्तविक नियन्त्रण रेखा निर्धारण हेतु समझौता तथा क्षेत्रों में शांति बहाल किए ।

 हिमाचल सिक्किम में शिव की धरा खोलकर नया व्यापार मार्ग एवं व्यापार क्षेत्र बढ़ाए जाने संबंधी समझौते द्वारा संबंधों को आयाम दिए गए सिक्किम को भारत के अंग के रूप में प्रदर्शन 2000 4 मई 2004 में प्रकाशित वर्ल्ड प्रेस ईयर बुक 2003 4 में चीन ने पहली बार सिक्किम को भारत के अंग के रूप में प्रदर्शित किया जिसे प्रधानमंत्री वाजपेई की जून 2003 की चीन यात्रा के दौरान हुए सीमा व्यापार समझौते को बल मिला वेन जियाबाओ की भारत यात्रा 2000 5 अप्रैल 2005 में चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ दिल्ली हाय अतीत की कड़वी यादों को बुलाकर भारत और चीन ने नए रास्ते पर चलने की पहल की दोनों देशों ने जिस समझौते पर हस्ताक्षर किए उसे तय हो गया कि सीमा विवाद को संबंधों के आड़े नहीं आने दिया जाएगा?

 भारत ने चीन को भरोसा दिलाया कि उसकी जमीन से चीन विरोधी आंदोलन नहीं चलेगा हु जिंताओ की भारत यात्रा 2006 चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ भी से 23 नवंबर 2006 तक भारत की 3 दिन की यात्रा पर हैदराबाद हाउस में 21 नवंबर को संपन्न वार्ता के बाद कृषि विज्ञान एवं जल संसाधन आदि क्षेत्रों में सहयोग के 13 विभिन्न समझौते पर सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर हुए संयुक्त घोषणापत्र में सन 2010 तक द्विपक्षीय व्यापार $40 करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया पर्यटन के जरिए वर्ष 2007 को भारत चीन में 3 वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय किया भारत चीन संबंध 2009 10 जनवरी 2008 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चीन यात्रा के समय 21वी शताब्दी का संचालक दस्तावेज भी जारी किया गया था सितंबर 2009 तक दोनों देशों के मध्य सीमा विवाद वार्ता के 13 दौर संपन्न हो चुके थे''

 आसियान देशों के शिखर सम्मेलन में चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के साथ भारतीय प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की वार्ता 24 अक्टूबर 2009 को हुई जिसमें दोनों देशों के नेताओं ने पारस्परिक विश्वास स्वार्थ वह बेहतर समझ के महत्व को रेखांकित किया तथा दोनों पक्षों ने इस बात पर भी सहमति व्यक्त की कि किसी भी पक्ष के मतभेदों को विकसित हो रे मैत्रीपूर्ण संबंधों की राह में बाधक नहीं बनने देंगे इसी के साथ दोनों देशों के बीच कारोबारी संबंधों की मजबूती के लिए चीनी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहन करने का आश्वासन चीनी प्रधानमंत्री ने दिया जुलाई-अगस्त 2010 में दोनों देशों के संबंधों में कुछ कड़वाहट पैदा हो गई थी जिसे दोनों ने वार्ता के द्वारा अपने संबंध को सुलझा लिया |

और परिपक्व स्थिति का परिचय दिया भारत और चीन रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमत 2012 चीन ने चीन के रक्षा मंत्री जनरल लियांग वांगली ने 4 सितंबर 2012 को भारत यात्रा के दोनों देशों ने रक्षा आदान-प्रदान से जुड़े अनेक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने के लिए सहमति व्यक्त की यह आदान-प्रदान और संयोग इस वर्ष और इसके बाद भी जारी रहेगा नई दिल्ली में हुई शिष्टमंडल स्तरीय बैठक में दोनों पक्षों के बीच इस बात पर सहमति बनी कि संयुक्त सैन्य अभ्यास का अगला चरण शिविर आयोजित कराया जाएगा दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने सुरक्षा के क्षेत्र में परस्पर विश्वास बढ़ाने और भारत चीन के सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सद्भाव बनाए रखने की दिशा में काम करने पर सहमति व्यक्त की दोनों देशों के नेताओं ने वर्ष 2012 को भारत-चीन मैत्री और संयोगवश नामित किया

|भारतीय प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की चीन यात्रा टूबर 2013 भारतीय प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने 21 से 23 अक्टूबर 2013 तक चीन की 3 दिवसीय यात्रा की भारत और चीन दोनों देशों के संबंधों को बेहतर बनाने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री ने चीनी प्रधानमंत्री ली क्विंग से मुलाकात की इस दौरान भारतीय प्रधानमंत्री सिंह ने कहा कि जब भारत व चीन के हाथ मिलते हैं तो दुनिया देखती है भारत और चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सेना के बीच टकराव सीमा पर तनाव टालने के लिए 23 अक्टूबर 2013 को एक व्यापक समझौता पर हस्ताक्षर किए साथ ही दोनों पक्षों ने फैसला किया कि कोई भी पक्ष दूसरे पक्ष पर हमला करने के लिए सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल नहीं करेगा और नई सीमा पर गश्ती दलों का पीछा करेगा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा 2014 17 से 19 सितंबर 2014 की तीन दिवसीय चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा आर्थिक संबंधों में दोनों देशों के लिए एक नया अध्याय जोड़ने में सफल रही''

चीनी राष्ट्रपति एवं भारत के नवनियुक्त प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की बातचीत से दोनों देशों के नेताओं में निम्न मुद्दों पर सहमति बनी कैलाश मानसरोवर यात्रा के नए मार्ग को लेकर सहमति रेलवे के क्षेत्र में सहयोग तथा आधुनिकरण में मदद करने पर सहमति चीन अगले 5 साल में भारत में 20 अरब डॉलर निवेश करेगा शंघाई और मुंबई को ट्विन सिटी बनाने पर सहमति बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग और असहमति नागरिकों में मेलजोल बढ़ाने हेतु सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर सहमति दोनों देशों के नेताओं ने इस मुलाकात को भारत-चीन सहयोग की नई शुरुआत बताया इस यात्रा के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत के साथ को संबंध बनाने पर जोर दिया तथा कई बड़ी योजना में द्विपक्षीय सहयोग का वादा किया निष्कर्ष 1947 से लेकर अब तक भारत की विदेश नीति में अनेक उतार-चढ़ाव आए हैं आर्थिक तथा शनि दृष्टि से निर्बल होते हुए भी भारत ने विश्व राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है भारत की विदेश नीति पड़ोसी देशों के प्रति हमेशा सकारात्मक तथा मित्रता पूर्ण रही है भारत हमेशा सहनशीलता तथा भाईचारे में विश्वास करता है तथा इसी को अपना आधार मानते हुए सभी पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने में विश्वास करता है

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