कुछ भी लिख ‘उलूक’ मगर लिख रोज लिख हर समय लिख किस लिये कोई दिन बिना कुछ लिखे ही बितारा
कल का
लिखा
क्या
बिक गया
सारा
आज
फिर से
उसी पर
किसलिये
वही कुछ
लिख लारा
दुबारा
देख
वो
लिख लारा
घड़ियाँ सारी
समय
सबको
जो
आज
सबका
दिखारा
समझ
पीठ में
लगी चाबियाँ
अपनी
टिक टिक की
दूर कहीं
कहाँ
जा कर
छुपारा
क्यों नहीं
पूछ
कर ही
लिख लेता
किसी से
कुछ
उसी
के
हिसाब का
ऐसा
सोच
क्यों नहीं
पारा
सोच
नहीं
सोचा जारा
जिससे
वो
लिखना छोड़
कुछ
पढ़ने को
चला आरा
बता
समझ
में आना
किस ने
कह दिया
जरूरी है
नहीं
आरा
समझ में
तो
नहीं आरा
बतारा
और
जो
समझ भी
जारा
कुछ
कुछ
कहने में
फिर भी
अगर
हिचकिचारा
कौन सा
कुछ
अजब गजब
जो
क्या हो जारा
एक
कविता कहानी साहित्य
के
पन्नों के
थैले बनारा
दूसरा
बकवास
की
मूँगफली के
छिलके
ला ला
कर
फैलारा
तीसरा
इसकी
टोपी
उसके सिर
में
रख कर
के
आरा
सबसे बड़ा
दीवार
चढ़कर
उतरकर
बड़ी खबर
पकारा
उसके
साथ खड़ा
असली
खबर को
देश दुनियाँ
की
फैली
घास बतारा
‘उलूक’
कविता
कहानियों
के बीच
बकवास
अपनी
कई
सालों से
पकारा
सिरफिरा
समझ रा
दिमागदारों
को
पढ़ारा
निचोड़
इन
सब का
अंत में
लिख कर
ये
रख जारा
कुछ
भी लिख
रोज
कुछ
लिखना
जरूरी है
मत कहना
नहीं
बताया
कम कम
लिखने
वालों
का
चिट्ठा दर्जा
आगे
आते आते
पीछे
कहीं
रह जारा।
चित्र साभार: https://www.amazon.in/dp/159020042X?tag=5books-21
क्या
बिक गया
सारा
आज
फिर से
उसी पर
किसलिये
वही कुछ
लिख लारा
दुबारा
देख
वो
लिख लारा
घड़ियाँ सारी
समय
सबको
जो
आज
सबका
दिखारा
समझ
पीठ में
लगी चाबियाँ
अपनी
टिक टिक की
दूर कहीं
कहाँ
जा कर
छुपारा
क्यों नहीं
पूछ
कर ही
लिख लेता
किसी से
कुछ
उसी
के
हिसाब का
ऐसा
सोच
क्यों नहीं
पारा
सोच
नहीं
सोचा जारा
जिससे
वो
लिखना छोड़
कुछ
पढ़ने को
चला आरा
बता
समझ
में आना
किस ने
कह दिया
जरूरी है
नहीं
आरा
समझ में
तो
नहीं आरा
बतारा
और
जो
समझ भी
जारा
कुछ
कुछ
कहने में
फिर भी
अगर
हिचकिचारा
कौन सा
कुछ
अजब गजब
जो
क्या हो जारा
एक
कविता कहानी साहित्य
के
पन्नों के
थैले बनारा
दूसरा
बकवास
की
मूँगफली के
छिलके
ला ला
कर
फैलारा
तीसरा
इसकी
टोपी
उसके सिर
में
रख कर
के
आरा
सबसे बड़ा
दीवार
चढ़कर
उतरकर
बड़ी खबर
पकारा
उसके
साथ खड़ा
असली
खबर को
देश दुनियाँ
की
फैली
घास बतारा
‘उलूक’
कविता
कहानियों
के बीच
बकवास
अपनी
कई
सालों से
पकारा
सिरफिरा
समझ रा
दिमागदारों
को
पढ़ारा
निचोड़
इन
सब का
अंत में
लिख कर
ये
रख जारा
कुछ
भी लिख
रोज
कुछ
लिखना
जरूरी है
मत कहना
नहीं
बताया
कम कम
लिखने
वालों
का
चिट्ठा दर्जा
आगे
आते आते
पीछे
कहीं
रह जारा।
चित्र साभार: https://www.amazon.in/dp/159020042X?tag=5books-21

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