सोंध माटी---- खोरठा एक परिचय।

सोंध माटी

रचनाकार- प्रो. बिनोद कुमार।
जन्म-1961
जन्म स्थान- दारू,झुमरा,हजारीबाग
पिता- मथुरा प्रसाद
पुस्तक का प्रकाशन- 1990,2017
प्रकाशक-: जनजातीय भाषा अकादमी बिहार/झारखंड,रांची। इस संग्रह में कुल 10 कहानियाँ और 31 कविताएं शामिल है।
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कहानियों के नाम-: उबार, जिनगीक डोंआनी, धुआ-धुँध, माय के लोर, अजवाइर भउजीक बेंडाइल चेंगा, दू पइला जोंढरा, ओद दीदा,मलकी बहू, भीतर बाहर और हूब।

सोंध माटी का कविता खण्ड

1. आजादीक रइसका-: आजादी आंदोलन के शहीदों के जोश और जज्बे का गुणगान।
2. जुवान -: देश की रक्षा और उसकी उन्नति में जवानों के योगदान का वर्णन ।♓🅰️♉🚩🅾️♏
3. माटी-: मातृभूमि की महिमा का गुणगान।
4. दहेज सामाजेक करिखा -: दहेज प्रथा एक सामाजिक बुराई है सभी सभ्य समाज के लिए कलंक है।
5. आस -: संसार में सभी जन या वस्तु, सब एक दूसरे की जरूरत है। सब को एक दूसरे से आस रहती है।
6. आजादीक गीत-; देश की आजादी में शहीदों के योगदान का बखान।
7. माटी और संसकीरति-: अपने देश की धरती और संस्कृति का बखान।
8. नारी-: स्त्री की महिमा और सामाजिक दशा का वर्णन है।
9. खोढर - एक भीख मांगा की दारुण दशा का चित्रण।
10. आंखित कांदना-; औद्योगिकीकरण और शहरीकरण से उत्पन्न पर्यावरण प्रदूषण की चिंता।
11. धरती मांय-: मातृभूमि की महिमा का वर्णन।♓🅰️♉🚩🅾️♏
12. किसानेक जिनगी-: किसान समुदाय के जीन संघर्ष का चित्रण।
13. गुलौंची फूल-: गुलौंची फूल के बहाने प्रकृति के सौंदर्य का चित्रण।
14. नीम-: नीम एक अत्यंत गुणकारी वनस्पति होते हुए भी समाज में उपेक्षित है ।
15. पियासल धरती-: अंगरेजो की गुलामी से तड़पती भारत की धरती की करुण पुकार।
16. मम्मी- पापा -: पश्चिमी सभ्यता की अंधी नकल करने वालों पर चोट।
17. रे मान-: विज्ञान के दुरुपयोग और बढ़ते कदम से उत्पन्न मानवता के संकट पर चिंता।
18. जुवान और किसान-- फौजी जवानों और किसानों की काम का गुणगान।
19. बरिसा ऋतु -: वर्षा ऋतु में प्रकृति के परिदृश्य में आए बदलाव का चित्रण।♓🅰️♉🚩🅾️♏
20. जिनगी एक मजूरा-: मजदूर के जीवन की समस्याओं और उसके संघर्ष का वर्णन।
21. बोनेक डाक-: औद्योगीकरण और शहरीकरण से जंगल को हो रहे नुकसान की चिंता।
22. जाडा रितु-: जाडा के रितु में गरीबों की दशा का चित्रण।
23. रक्षाबंधन-: भाई बहन के पवित्र रक्षाबंधन के महत्व का वर्णन।
24. बछरेक कांदना-: समय का चक्र चलता है और दुनिया में बदलाव आते रहता है।
25. करिया हीरा-: कोयला के महत्व झारखंड में उसकी लूट खसोट पर चिंता।
26. अदमी निक जीव हे-: जाति धर्म ऊंच-नीच के भेदभाव से इंसानियत खत्म हो रही है।
27. भागजोगनी-: आदमी को खुद की काबिलियत को भगजोगनी तरह साबित करना चाहिए।
28. नेता और नीयत-: आजकल की राजनेताओं की नीति और चरित्र में आई गिरावट पर कटाक्ष।
29. बिजलिक महिमा-: वर्तमान समय में सभी क्षेत्रों में बिजली की अहमियत का वर्णन।
30. नसापान-: नशा पान के चलते हुए नुकसान का वर्णन।
31. पेपर बिचवा-: घर- घर अखबार देने वाली के काम का और उसके व्यवहार का गुणगान।

हमेशा बेहतर से बेहतरीन की ओर साथ चलने को हम है तैयार, तो देर किस बात की चलिये करते है सफर की शुरूआत।😁😆😆
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