जोकर का भूत - Joker Ghost Story In Hindi

जोकर किसको नहीं पसंद क्योंकि जोकर सबको हंसाता है वो एक बोहोत ही अच्छा मनोरंजन करने वाला व्यक्ति होता है। जिसके रंग बिरंगे कपडे, नकली लाल बाल, नाक पर एक लाल रंग का नकली नाक पहने वो सबको गुद गुदाता है।

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परंतु क्या आपने कभी सोचा है कि वही जोकर जो सबको हंसाता है वो कभी कभी आपको डरा भी सकता है। चौकिए मत कभी कभी वो नादान सा भोला चेहरा एक डरावना सकल भी ले लेता है और सच मानिए वो बोहोत ही भयंकर होता है। तो इसी के साथ हम अपनी "Ghost Story In Hindi" कहानी की शुरुआत करते है

ये कहानी है हरिओम की जो मध्यप्रदेश के भोपाल में SBI बैंक के मैनेजर है। एक दिन हरिओम को 2 दिन की सरकारी छूटी मिली वैसे तो हरिओम काम में बोहोत व्यस्थ रहते है और अपने घर वालो से ज्यादा मेल जोल नहीं कर पाते।
इस बार छुट्टी मिलने पर उन्होंने अपने बच्चों को जो की एक 10 साल का और दूसरा 14 साल का है कही बाहर जाने का प्लान बनाया।

तो वो संडे के दिन अपने बच्चों को गाडी में ले कर निकल गए घूमने वैसे तो उनका प्लान Zoo जाने का था पर जब वो वहाँ पोहोंचे तो zoo बंद पड़ा था। ये देख कर बच्चो का मन उदास पड़ गया। ये उदासी हरिओम से नहीं देखी जा रही थी।
क्योंकि इतने दिनों के बाद तो वो बच्चो को बाहर घुमाने लाया था। पर अब क्या करते क्योंकि अब और कही जाने में और प्लान बनाने में ज्यादा देरी हो जाती। तो वो भारी मन से वापस घर की और चलने लगे।

अभी आधे रास्ते में हो थे तो उन्होंने देखा की रोड की दाहिने तरफ जंगल है और उस जंगल के पेड़ो से बडे बड़े झूले दिख रहे है। उसको देख कर साफ़ साफ़ पता चल रहा था कि वो सर्कस है।


पर हरिओम सोच में पड़ गया क्योंकि वो उसी रास्ते से गया था पर वो सर्कस और झूले नहीं दिखे पर अब ये कहाँ से इतनी जल्दी आगए।

हरिओम ने सोचा की शायद उसी ने ध्यान नहीं दिया हो। इतने ही देर में बच्चों ने भी सर्कस में जाने की जिद्द करने लगे तो हरिओम ने भी गाडी जंगल जहाँ सर्कस लगा था कि तरफ मोड़ लिया।

वो जैसे जैसे सर्कस की और जा रहे थे लोगो के शोर गुल की आवाज़े आ रही थी मानो बोहोत से लोग सर्कस में हो।

सर्कस का दरवाज़ा अब दिखने लगा था हरिओम ने गाडी गाते के पास खड़ी कर दी और बच्चों को ले कर चल पड़ा सर्कस के अंदर।

पर हरिओम क्या देखता है कि सर्कस पूरा सुनसान खाली पड़ा है। कोई भी नहीं है वहाँ। जो आवाज़े आ रही थी वो भी नहीं सुनाई दे रही है।

लेकिन फिर भी हरिओम ने इसे अंदेखा किया और टिकट काउंटर की और चल दिया। जैसा की हमने बताया कि वहाँ कोई भी नहीं था इसी लिए वो काउंटर पर सीधा पहुच गया काउंटर पर एक आदमी लाल शर्ट पहना हुआ था और अपना सर नीचे झुकाए हुआ था। ऐसा लग रहा था मानो की वो कुछ पढ़ रहा हो।

हरिओम ने उससे 3 टिकेट मांगे उसने सिर झुकाए ही टिकेट दे दिये। हरिओम ने पैसे पूछे तो तो उसने मना कर दिए उसने बोला। "साहब यहाँ कोई नहीं आता आप इसे मुफ्त में ही ले लो हमें कोई पैसे नहीं चाहिए"

ये बोलते ही उसने टिकेट काउंटर बंद कर दिया। हरिओम को बड़ा जी अजीब लगा। अब वो सर्कस के टेंट की और बढ़ने लगा। टेंट के बाहर पोहोचते ही उसको ऐसा लगा जैसे अंदर से टेंट में लोग भरे पड़े है। क्योंकि लोगो के हसने की सिटियो की आवाज़ आ रही थी।

हरिओम अपने बच्चों के साथ अंदर गया तो वहाँ कोई नहीं था। वो बोहोत ही हैरान था। वो अभी खड़ा हो कर सोच ही रहा था तभी उनके बच्चों ने भाग कर सीट पकड़ ली। वो भी जा कर वही बैठ गया पर अब भी वो शोक में था। 

अब तक हरिओम को कुछ गलत होने का शक हो गया था। तभी सर्कस शुरू हो गया। जोर जोर से ड्रम और ढोल बजने लगे। 

सर्कस में हाथी घोड़े आने लगे। और बोहोत से जोकर आ कर करतब दिखाने लगे करीब आधे घंटे के बाद अब सारे अंदर वापस चले गए और अब एक दूसरे जोकर की बारी आई। वो अकेला ही आया और बीचों बीच रखे कुर्सी पर आकर बैठ गया।

वो खिल खिला कर हँस रहा था ऐसा लग रहा था मानो की वो चुटकुले सुनाने वाला है। अभी तक सब सही चल रहा था हरिओम और उसके बच्चे पुरे सर्कस में अकेले थे पूरा show केवल उनके लिए ही हो रहा था।

अचानक वो बिच में बैठा जोकर हँसते हँसते ही रोने लगा। अभी हरिओम को कुछ समझ में आता तभी वो क्या देखता है कि पूरे सर्कस में अचानक से लोग भरे पड़े और अपने सीट पर बैठे हुए है उसके आगे पीछे दाएं बाएं हर तरफ। वो सब ज़ोर ज़ोर से हँस रहे थे। और जोकर रो रहा था। ये सब देख कर हरिओम बौखला सा गया उसे समझ में ही नहीं आ रहा था कि वो क्या करे। उसके बच्चे भी उन दरसको के साथ हँस रहे थे। ऐसा लग रहा था मानो उसके बच्चो को पता ही नहीं चल रहा की यहाँ क्या हो रहा है।

हरिओम उस जोकर की तरफ देखता है वो जोकर रो रहा होता है तभी वो जोकर रोते रोते सीढियो से ऊपर चढ़ने लगा जहाँ करतब दिखाया जाता है। और वो ऊपर चढ़ते ही वहाँ से कूद गया। 

अब वो ज़मीन पर पड़ा था और चारो और खून ही खून था। पर अभी भी दर्शक हँस रहे थे। ये सब देखते हुए हरिओम भाग कर जोकर की तरफ गया। उसने जोकर को उठाया पर वो क्या देखता है कि उस जोकर की शकल पर कुछ है ही नहीं ना ही आँख है और ना ही मुँह। 

जोकर ने उसका हाथ पकड़ लिया। हरिओम ने हाथ छुड़ाने की कोशिश करी पर वो नहीं कर पा रहा था। उसमे चीला चीला कर मदद मांगी। पर कोई नहीं सुन रहा था अब सारे दर्शक हंस नहीं नहीं थे सब चुप बैठे थे और उसके तरफ ही देख रहे थे। वो अपने बच्चों की तरफ देखा तो वो भी चुप चाप बैठे तमाशा देख रहे थे।

अब हरिओम डर के मारे रोने लगा। तभी वो देखता है कि वो जोकर अपने आप खड़ा हो गया और उसे खिंच कर कहीँ ले जा रहा है। वो अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश कर रहा था। पर नाकामयाब था।

उसने देखा की आगे एक बोहोत बड़ी आग लगी हुई है वो समझ गया कि वो उस आग की तरफ ही ले जा रहा है। अब हरिओम का मुह सुख चूका था। उसने हिम्मत हार दी थी। वो अब बेहोश होने के कागार पर था।

तभी जोकर आग के पास जाते ही उसने हरिओम का हाथ छोड़ दिया और खुद आग के कूद गया और ज़ोर ज़ोर से दर्द में चिल्लाने लगा। हरिओम ने साहस जुटाया और वापस अपने बच्चों की तरफ भाग उसने उनका हाथ पकड़ा और सर्कस के बाहर भागने लगा।

वो जैसे तैसे गाडी में बैठा और गाडी भगा दी। अब हरिओम ने राहत की सांस ली। अभी जंगल का आधा राश्ता पर ही हुआ था तभी वो देखता है कि वो जोकर हाथ में एक बोर्ड लिया साइड में पेड़ के सहारे खड़ा है और उसके मुँह पर बोहोत बड़ी हँसी है। और उसके बोर्ड पर लिखा था "दुबारा जरूर आना"


धन्यवाद्

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