सागर किनारे लहरें देखते प्लास्टिक बैग लेकर बोतलें इक्ट्ठा करते कूड़ा बीनते लोग भी कवि हो जाते हैं
ना
कहना
आसान होता है
ना
निगलना
आसान होता है
सच
कहने वाले
के
मुँह
पर राम
और
सीने पर
गोलियों का
निशान होता है
सच
कहने वाला
गालियाँ खाता है
निशान
बनाने वाले का
बड़ा
नाम होता है
‘उलूक’
यूँ ही नहीं
कहता है
अपने
कहे हुऐ
को
एक बकवास
उसे
पता है
कविता
कहने
और
करने वाला
कोई एक
खास होता है
अभी
दिखी है
कविता
अभी
दिखा है
एक कवि
कूड़ा
समुन्दर
के पास
बीन लेने
वाले को
सब कुछ
सारा
माफ होता है
बड़े
आदमी के
शब्द
नदी
हो जाते हैं
उसके
कहने
से ही
सागर में
मिल जाते हैं
बेचारा
प्लास्टिक
हाथ में
इक्ट्ठा
किया हुआ
रोता
रह जाता है
बनाने
वालों के
अरमान
फेक्ट्रियों
के दरवाजों
में
खो जाते हैं
बकवास
बकवास
होती है
कविता
कविता होती है
कवि
बकवास
नहीं करता है
एक
बकवास
करने वाला
कवि
हो जाता है ।
चित्र साभार: https://www.dreamstime.com/

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