खेल ही नहीं, चलने-फिरने, जिमिंग, काम करने के दौरान भी स्पोर्ट्स इंजरी, जानें इसके बारे में

यह आम धारणा है कि स्पोर्ट्स इंजरी से जुड़े मामले केवल खिलाड़ियों में ही होते हैं। असल में हर वह व्यक्ति जो काम या भागदौड़ करता है, जिम में वर्कआउट करता है उसे इस दौरान मसल्स में चोट लगने या खिंचाव की समस्या हो सकती है।

दर्द-सूजन पर ध्यान दें -
स्पोर्ट्स इंजरी ऐसी चोट होती है जिसमें जख्म तो नहीं दिखता लेकिन अंदरूनी रूप से शरीर में असहनीय दर्द होता है। इसमें हड्डियां टूटने, मोच आने, अंग, मांसपेशी आदि का अपनी जगह से खिसकने व लिगामेंट के क्षतिग्रस्त होने जैसी समस्या होती है। स्पोर्ट्स इंजरी सिर्फ खिलाड़ियों को ही नहीं रोजमर्रा की जिंदगी में किसी को भी हो सकती है। इस इंजरी में जोड़ या शरीर के किसी अन्य हिस्से के लिगामेंट या कोशिका में चोट लग जाती है जिससे पीडि़त को या खिलाड़ी को चलने-फिरने में परेशानी होने के साथ असहनीय दर्द की शिकायत भी हो सकती है। ऐसे में हर ऐसी चोट जिसमें जख्म न दिख रहा हो और दर्द या सूजन की स्थिति है तो उसका समय पर इलाज कराना चाहिए। इलाज के अभाव में रोजमर्रा के काम पर भी असर होने लगता है।

वॉर्मअप जरूरी -
जोड़ दो हड्डियों को जोड़ते हैं जबकि लिगामेंट उसे मजबूती देते हैं। चोट लगने पर लिगामेंट डैमेज होने से व्यक्ति मूवमेंट नहीं कर पाता। ऐसे में अचानक कोई भारी वस्तु उठाने, हैवी वर्कआउट करने या खेल के मैदान पर जाने से पहले 5-10 मिनट वॉर्मअप जरूर करें। ये वर्कआउट, एक्सरसाइज, काम या खेल किस तरह का है, इस पर निर्भर करते हैं। वॉर्मअप मुख्य रूप से 'नेक टू टो' फॉर्मूले के अनुसार करते हैं जिसमें स्ट्रेचिंग के साथ हल्की जंपिंग-रनिंग करते हैं। इससे मांसपेशियों की मजबूती व शारीरिक क्षमता बढ़ती है। स्पोर्ट्स इंजरी को नजरअंदाज करने से खिलाड़ी के खेलने की क्षमता कम होती है जबकि सामान्य व्यक्ति का जीवन मुश्किल हो जाता है।

लक्षण - किसी भी तरह की स्पोर्ट्स इंजरी में प्रभावित हिस्से पर सूजन, दर्द और त्वचा का रंग लाल या नीला हो जाता है। इसके साथ गहरी चोट में उस हिस्से में सुन्नपन, हाथ-पैरों के मूवमेंट में तकलीफ होना जैसी समस्या होती है। कुछ स्पोर्ट्स इंजरी के बाद कोई तकलीफ नहीं होती लेकिन अचानक क्रैंप आने लगता है। ऐसे में सतर्क रहना जरूरी है क्योंकि ये क्रैंप किसी भी वक्त मुश्किल में डाल सकता है। इंजरी का ग्रेड पता करने के लिए एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई व गंभीर स्थिति में मांसपेशी का कलर डॉप्लर टैस्ट भी करते हैं।



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