Women's Health: गर्भाशय से जुड़े ऑपरेशन को आसान बनाती है टोटल लेप्रोस्कोपिक सर्जरी

Total Laparoscopic Hysterectomy In Hindi: टोटल लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टमी, सर्जरी द्वारा गर्भाशय (यूट्रस और सर्विक्स) को निकालने की प्रक्रिया है। यह स्त्री रोगों के लिए सबसे ज्यादा की जाने वाली विधि है। जिन्हें माहवारी के दौरान अत्यधिक रक्तस्त्राव की शिकायत होती है, उनमें यह जान बचाने वाली होती है। बच्चेदानी में गांठ, एडिनोमायोसिस, एंडोमेट्रियोसिस या गर्भाशय का कैंसर इसके कारण हो सकते हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में :-

सर्जरी के लाभ ( Total Laparoscopic Hysterectomy Benefits )
- इस सर्जरी में ब्लड चढ़ाने की जरूरत नहीं होती।
- सर्जरी में लेप्रोस्कोप से एचडी कैमरा जुड़ा है जो संबंधित अंग के कई दृश्यों की छाया लेता है। जिससे परेशानी की आसानी से पहचान हो जाती है व जटिलताओं की आशंका कम होती है।।
- विशेषज्ञ पेट पर छोटे 3 - 4 चीरे लगाते हैं जो 5 मिमी. से 1 सेंटीमीटर तक के होते हैं। इन्हें कम टांकों से बंद कर देते हैं। पेट पर निशान नहीं रहता।
- संक्रमण का खतरा बेहद कम हो जाता है।
- सर्जरी के बाद दी जाने वाली एंटीबायोटिक दवाओं से मरीज जल्द ही सही भी हो जाता है।
- आधुनिकतम तकनीक के होने से सर्जरी में दर्द और अन्य कोई परेशानी नहीं होती है।

3 तरह की गर्भाशय की सर्जरी ( Types Of Total Laparoscopic Hysterectomy )
ओपन टे्रडिशनल हिस्टेरेक्टमी ( Open Traditional Hysterectomy ) : इसमें पेट पर 6-7 इंच का बड़ा चीरा लगाकर सर्जरी करते हैं।

वेजाइनल हिस्टेरेक्टमी ( Vaginal Hysterectomy ) : इसके तहत वेजाइना के जरिए यूट्रस बाहर निकालते हैं। कुछ मामलों में इसके दौरान ब्लैडर, यूरेटर और वैजाइना के आसपास के अंगों को क्षति पहुंच सकती है।

टोटल लेप्रोस्कोपिक ( Total Laparoscopic ) : इसमें लेप्रोस्कोप (जिसमें एक छोटा कैमरा, लाइट व अन्य उपकरणों से लैस एक पतला फाइबर ऑप्टिक ट्यूब जुड़ा होता है) से सर्जरी करते हैं। इससे विशेषज्ञ पेट पर एक छोटा चीरा लगाकर गर्भाशय, अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब को 10 गुना बड़े आकार में देख पाते हैं। इसे करने की कुल अवधि 40-80 मिनट की है। इससे बड़े आकार का गर्भाशय भी हटा सकते हैं।

रिकवरी ( Total Laparoscopic Hysterectomy Recovery )

Total Laparoscopic Hysterectomy (TLH) Surgery के बाद लगभग 7 दिन के अंदर मरीज की रिकवरी हो जाती है। अस्पताल से रोगी या तो उसी दिन कुछ घंटों बाद या अगले दिन घर लौट सकती है। इस कारण वह जल्द ही दैनिक दिनचर्या के कार्यों में जुट सकती है। पहले की जाने वाली ओपन सर्जरी में मरीज को 4-5 दिन अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता था। साथ ही रिकवरी में लगभग 6-7 सप्ताह लगते थे।



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