नये चाचा याद करो अंकल कह कर ही सही चिल्लाओ
लाल हो
शेरवानी हो
जरूरी नहीं बच्चो
समय देखो
चाचा
पुरानी सोच
का रिश्ता है
नये
रिश्ते खोजो
नये चाचा में
नया जोश होगा
पुराने
की कब्र में
बरबाद
ना करो फूल
फूल
मालायें बनाओ
नये रिश्तों पर
ले जाकर चढ़ाओ
चौदह
नवम्बर
एक
अंक है
वोट के
हिसाब से
रंक है
मत फैलाओ
देखो
सामने
कोई है
चाचा
ही नही
सब है
मतलब
रब है
रब के
गुणगान
गाओ
पूजो
कुछ चढ़ाओ
बच्चो
संगठित होकर
कोई संगठन बनाओ
चाचा के
कुछ तो
काम आओ
हर
जगह हैं
फैले हुऐ हैंं
चाचा
पहचानो
अपने अपने
आस पास के
चाचाओं को
चरण
वंदन करो
चाचाओं के
मोक्ष
पा लेने
के लिये
कुछ बलिदान
कर ले जाओ
‘उलूक’
की आँख
रात की
रोशनी में
जगमगाते
दिये के
तेल में
डूबती
बाती की
तरह है
कभी
एक
दियासलाई
जलाओ
आग
लगाओ
कहीं भी
कुछ पके
कुछ नया बने
नया
चाचा तैयार है
पुकार कर बुलाओ
बच्चो
समय के
साथ बदलो
लाल
गुलाब
शेरवानी
भूल जाओ
नये चाचा
याद करो
अंकल
कह कर
ही सही
जोर से
चिल्लाओ
बाल
दिवस मनाओ।
चित्र साभार: https://khabar.ndtv.com/

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