सर्द मौसम की वो शाम याद है
सर्द मौसम की वो शाम याद है ?
वो हरे घास के मैदान पर छोटी सी नीली झील
के पास,जब बैठे थे हम बहुत पास पास तुम्हे याद है ?
पहाड़ो से ठंड़ी हवा के झोके आ रहे थे ।
एक ही शोल मे जब हम दोनो सिकुड़ रहे थे ।
तेज थी सासे तुम्हारी और बढ़ रही थी धड़कने मेरी
थे करीब एक दूसरे के इतने,थी नजरें आमने सामने बेहद करीब थे लब हमारे तुम्हें याद है ?
सर्द मौसम की वो शाम याद है ?
सूरज आसमाँ से धीरे धीरे उस झील में उतर रहा था
जैसे तू हर रोज मेरे दिल में धीरे धीरे उतर रहा था
बढ़ रहे थे रात के साये मगर घर जाने का ना तुम्हारा ना मेरा मन था । तुम्हे याद है ?
सर्द मौसम की वो शाम याद है ?

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