जुगल ऑटो चालक से ऑटो मालिक बना  

ग्वालियर। सुरेशनगर निवासी जुगल चतुर्वेदी एवं उनके परिवार का भरण पोषण का जरिया किराए का ऑटो रिक्शा था। इस रिक्शा से मुश्किल से तीन से चार हजार रूपए प्रतिमाह मिल पाते थे, जिससे परिवार का भरण पोषण मुश्किल से हो पाता था। लेकिन मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का लाभ लेकर जुगल ऑटो चालक से ऑटो मालिक बन गया है। प्रतिमाह बैंक की किस्तें नियमित जमा कर 8 से 9 हजार रूपए की बचत कर अब परिवार का भरण पोषण भी बेहतर तरीके से कर रहा है।  
ग्वालियर के सुरेश नगर निवासी जुगल चतुर्वेदी किराये की ऑटो रिक्शा चलाकर अपने बुजुर्ग पिता एवं एक भाई के तीन सदस्यीय परिवार का भरण पोषण करता था। कभी-कभी तो ऐसी स्थिति आ जाती कि सवारियां नहीं मिल पाती थीं। लेकिन किराए के ऑटो रिक्शा से सवारियों को लाने एवं ले जाने पर ऑटो रिक्शा का प्रतिदिन किराया देने के पश्चात प्रतिमाह तीन से चार हजार रूपए मिल पाते थे। इस राशि से परिवार का खर्चा चलाना बड़ा मुश्किल था। अचानक एक दिन अपने मकान की छत से गिर जाने पर जुगल का पैर फ्रेक्चर हो गया। जिससे आमदनी का जरिया खत्म हो गया और परिवार के भरण पोषण की परेशानी बढ़ गई। 
श्री जुगल ने बताया कि मुझे जानकारी मिली कि जिला हथकरघा कार्यालय से मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का लाभ लेकर अपना व्यवसाय शुरू कर अपने परिवार का भरण पोषण कर सकते हैं। उन्होंने जिला पंचायत कार्यालय ग्वालियर में जाकर अधिकारियों से संपर्क कर जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि आप योजना के तहत सीएनजी ऑटो रिक्शा प्राप्त कर सकते हैं। जिसके लिए आवेदन करने पर योजना के तहत भारतीय स्टेट बैंक शाखा सिटी सेंटर के सहयोग से 2 लाख 42 हजार रूपए के ऋण की राशि से सीएनजी ऑटो स्वीकृत हो गया। साथ ही विभाग से 69 हजार की अनुदान राशि का भी लाभ मिला। सीएनजी ऑटो रिक्शा से होने वाली आय से प्रतिमाह 3500 रूपए ऋण किस्त भी नियमित जमा कर 8 से 9 हजार रूपए प्रतिमाह की अतिरिक्त आय हो रही है। अब परिवार का भरण पोषण भी बेहतर ढंग से होने से परिवार भी खुश है।  
उप संचालक, अनूप सिंह भारतीय


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