किसी ने कहा लिखा समझ में आता है अच्छा लिखते हो बताया नहीं क्या समझ मे आता है
Your few poems touched me.
इस बक बक
️को कुछ लोग समझ जाते हैं । वो *पागल* में कुछ *पा* के *गला*
️हुआ इंसान देख लेते हैं । ऐसे लोगो की कविताओं में गूढ़ इशारे होतें हैं । जो जागे हुए लोगों को दिख जातें हैं । मुझे आपकी कविताओं में कुछ अलग दिखा, जिसके कारण में आने उद्गारों को रोक नही पाया ।
मैँ आपकी बक बक का मुरीद हुं
आगे और भी सुन्ना चाहूंगा यूट्यूब पर । वी पी सिंह
इस बक बक
मैँ आपकी बक बक का मुरीद हुं
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नहीं लिखने
और लिखने के बीच में
कुछ नहीं होता है
दिन भी संख्याओं में गिने जाते हैं
लिखने लिखाने के दिन
या
या
नहीं लिख पाने के दिन
सब एक से होते हैं
दर्द अच्छे होते हैं जब तक गिने जाते हैं
संख्याओं के खेल निराले होते हैं
कहीं जीत के लिये संख्या जरूरी होती है
कहीं हार जरूरी होती है संख्या के जीतने से अच्छा
सब से बुरा होता है गाँधी का याद आना
मतलब साफ साफ
एक धोती एक लाठी एक चश्मे की तस्वीर का
देखते देखते सामने सामने द्रोपदी हो जाना
चीर अब होते ही नहीं हैं
हरण जो होता है उसका पता चल जाये
इससे बड़ी बात कोई नहीं होती है
अजीब है जो सजीव है बेजान में जीवन देखिये
जान है नजर भी आ जाये
मुँह में बस एक कपड़ा डाल लीजिये
निकाल लीजिये
नहीं समझा सकते हैं किसी को
समझाना शुरु हो जाते हैं
समझदार लोग पुराने साल
कत्ल हो भी गया
कोई सवाल नहीं करना चाहिये
क्योंकि कत्ल पहली बार जो क्या हुआ है
सनीमा भीड़ का घर से देखकर
घर से ही कमेंट्री कर
उसे परिभाषित कर देने का
मजा कुछ और है
क्योंकि लगी आग में झुलसा
अपने घर का कोई नहीं होता है
लगे रहिये गुंडों के देवत्व को
महिमामण्डित करने में
भगवान करे तुम या तुम्हारे घर का
तुम्हारा अपना कोई
आदमखोर का शिकार ना होवे
और उस समय तुम्हें अपनी छाती पीटने का
मौका ही ना मिले
‘उलूक’ की बकवास किसी की समझ में आयी
और उसने ईमेल किया कि बहुत कुछ समझ में आया
बस रुक गया कहने से कि बहुत मजा
जो अभी आना है क्यों नहींं आया।
चित्र साभार: https://www.pngfly.com/

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