उलूक पागल है है कब नहीं माना फिर भी किसलिये पागल सिद्ध करने के लिये पागल सरदार का हर पागल अपने खोल से बाहर निकल निकल कर आ रहा है
वैसे भी
कौन
लिख पाता है
पूरा सच
कोशिश
सच की ओर
कुछ कदम
लिखने की होती है
कोशिश जारी
रहती है
जारी रहनी चाहिये
आप लिख रहे हैं
लिखते रहें
आपके लिखने
ना
लिखने से
किसी को
कोई फर्क
नहीं पड़ता है
हाँ
ज्यादा
मुखर होने से
कुछ समय बाद
आपको महसूस
होने लगता है सच आप पर ही
भारी पड़ रहा है
आप कौन है
होंगे कोई
आपके गले में
कोई पट्टा
अगर
नहीं दिख रहा है
पट्टे डाले हुऐ
गली के
इस कोने से
लेकर उस कोने
तक
दिखेगा
आपसे
कुत्तों की तरह
निपट रहा है
इन्सान मत ढूँढिये
अब कहीं
ढूँढिये
कोई हिंदू
कोई मुसलमान
अगर आप को
किसी भी कोने से
दिख रहा है
खुद कुछ भी
नहीं सोचना है
ध्यान से सुनें
खुद
कुछ भी नहीं
सोचना है
सियार की तरह
आवाज करने की
कोशिश में
कुत्ते के गले से
निकलती हुई
आवाज
हुआ हुआ
की ओर
ध्यान लगा कर
कोई आसन
कोई योग
सोचना है
घर छोड़ चुके हैं
लोग
ना जाने क्यों
घर में रहकर
भी
लग रहा है
उन्हें
क्या करना है
किसलिये
देखनी है
मोहल्ले की गली
अरे हमें तो
देश के लिये
बहुत ही आगे
कहीं और
निकलना है
क्या करे
पागल ‘उलूक’
उस के लिखते ही
हर गली का पागल
उसे पागल
सिद्ध
करने के लिये
अपने पागल
सरदार की
टोपी
हाथ में
लहराता हुआ
सा
निकल रहा है।
चित्र साभार:
https://graphicriver.net/item/psycho-owl-cartoon/11613131
कौन
लिख पाता है
पूरा सच
कोशिश
सच की ओर
कुछ कदम
लिखने की होती है
कोशिश जारी
रहती है
जारी रहनी चाहिये
आप लिख रहे हैं
लिखते रहें
आपके लिखने
ना
लिखने से
किसी को
कोई फर्क
नहीं पड़ता है
हाँ
ज्यादा
मुखर होने से
कुछ समय बाद
आपको महसूस
होने लगता है सच आप पर ही
भारी पड़ रहा है
आप कौन है
होंगे कोई
आपके गले में
कोई पट्टा
अगर
नहीं दिख रहा है
पट्टे डाले हुऐ
गली के
इस कोने से
लेकर उस कोने
तक
दिखेगा
आपसे
कुत्तों की तरह
निपट रहा है
इन्सान मत ढूँढिये
अब कहीं
ढूँढिये
कोई हिंदू
कोई मुसलमान
अगर आप को
किसी भी कोने से
दिख रहा है
खुद कुछ भी
नहीं सोचना है
ध्यान से सुनें
खुद
कुछ भी नहीं
सोचना है
सियार की तरह
आवाज करने की
कोशिश में
कुत्ते के गले से
निकलती हुई
आवाज
हुआ हुआ
की ओर
ध्यान लगा कर
कोई आसन
कोई योग
सोचना है
घर छोड़ चुके हैं
लोग
ना जाने क्यों
घर में रहकर
भी
लग रहा है
उन्हें
क्या करना है
किसलिये
देखनी है
मोहल्ले की गली
अरे हमें तो
देश के लिये
बहुत ही आगे
कहीं और
निकलना है
क्या करे
पागल ‘उलूक’
उस के लिखते ही
हर गली का पागल
उसे पागल
सिद्ध
करने के लिये
अपने पागल
सरदार की
टोपी
हाथ में
लहराता हुआ
सा
निकल रहा है।
चित्र साभार:
https://graphicriver.net/item/psycho-owl-cartoon/11613131

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