दाम्पत्य जीवन में तंत्र की उपयोगिता

                               .यद्यपि दाम्पत्य जीवन का विषय बहुत विस्तृत है और हर समस्या दाम्पत्य जीवन से जुडी होती है ,किन्तु एक समस्या के रूप में यदि हम दम्पति युगल के संबंधो को देखे तो आधुनिक परिवेश में इसमें तंत्र के उपयोग की सम्भावना भी नजर आती है और आवश्यकता भी ..पहले के समय में संस्कारो के कारण दाम्पत्य जीवन में कटुता ,अन्मुक्ताता ,अवहेलना कम थी ,समर्पण और त्याग की भावना थी ,किन्तु आज वास्तविक प्यार ,लगाव ,संवेदनशीलता कम हो रहा है ,दाम्पत्य जीवन समझौते की तरह हो रहा है ,स्वार्थपरता ,स्व की भावना ,त्याग -समर्पण का आभाव अक्सर दिख रहा है ,अतः बड़ी संख्या में दम्पति युगलों में कलह-कटुता -असंतुष्टि दिखाई देती है ,दोनों में से कोई कभी उन्मुक्त व्यवहार कर सकता है ,बेपरवाही पनप रही है ,इससे दाम्पत्य की मधुरता कम हो रही है ,विघटन बढ़ रहे है ,मानसिक अशांति ,उन्नति में अवरोध आ रहे है ,,अतः तंत्र की भूमिका यहाँ पहले से अधिक दिख रही है |तंत्र अजूबा नहीं इसका उपयोग तो हर घर में हो ही रहा है ,हर दम्पति कर ही रहा है किन्तु वह जानता नहीं की जो कुछ वह कर रहा वह तंत्र है |कोई टोटका कर रहे तो तंत्र है ,कोई उपाय कर रहे तो तंत्र है ,देवी देवता को विशेष चीज चढ़ा रहे वह तंत्र है |काली ,दुर्गा ,गणेश ,भैरव ,शिव की पूजा कर रहे तो वह तंत्र है |हर जगह तंत्र का उपयोग किया जा रहा |यदि समस्या विशेष पर तंत्र का सही उपयोग किया जाए तो समस्या का समाधान हो सकता है |
                  तंत्र प्रकृति की शक्तियों पर आधारित क्रिया प्रणाली है जो व्यक्ति के शारीरिक चक्रों ,रासायनिक क्रियाओं ,उर्जा संरचना को प्रभावित करता है ,यदि समस्या विशेष के अनुसार इसका उपयोग किया जाए तो व्यक्ति की उर्जा संरचना ,रासायनिक क्रिया को नियंत्रित कर उसके सोच और स्वभाव में परिवर्तन किया जा सकता है ,सोच की दिशा बदल सकती है ,पसंद-ना पसंद बदल सकती है ,वह किसी के अनुकूल या किसी के प्रतिकूल हो सकता है ,व्यवहार में परिवर्तन हो सकता है |कोई भी अपने जीवन साथी की अवहेलना करता हो ,प्रताड़ित -उत्पीडित करता हो ,किसी अन्य के प्रति लगाव या झुकाव रखता हो ,दाम्पत्य जीवन या साथी के प्रति गंभीर न हो तो दाम्पत्य जीवन में आने वाले कष्टों में कमी तंत्र के उपयोग से उस पुरुष या स्त्री के स्वभाव आदि में परिवर्तन कर किया जा सकता है ,व्यक्ति को नियंत्रित कर किसी और तरफ झुकाया जा सकता है |व्यक्ति को नियंत्रित कर सही रास्ते पर लाया जा सकता है |व्यक्ति के स्वभाव -व्यवहार ,आदतों ,सोच ,संवेदनशीलता में परिवर्तन किया जा सकता है |कोई अपने परिवार पर ध्यान नहीं दे रहा ,नशे ,विलाश ,गलत आदतों का शिकार है तो उस आदत को तंत्र से छुडाया जा सकता है |कोई आलसी है ,अकर्मण्य बन रहा ,उन्नति की ओर ध्यान नहीं दे रहा ,परिवार कष्ट पा रहा पर वह निष्क्रिय बना हुआ है तो इसे भी तंत्र से सुधारा जा सकता है ,आदि आदि ,|यह तंत्र का सदुपयोग भी है |तंत्र का उपयोग इसी तरह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में किया जा सकता है…………………………………………………………………….हर-हर महादेव

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