रजनी पटेल की कविताएँ

खुशियों का स्वागत
चलो मिलकर एक नया काम करते हैं।
बांहें फैलाकर जिंदगी को खुशियों के नाम करते हैं।
गर क्या हुआ हमें कोई तन्हा छोड़ गया,
हम तन्हाइयों से हंसी का आगाज करते हैं।
चलो मिलकर एक नया काम करने हैं।
बांहें फैलाकर जिंदगी को खुशियों के नाम करते हैं।
छोङो उसे अभी जाने भी दो।
तुमसे बेहतर किसी को पाने तो दो।
हर शख्स तुमसां किरदार ना होगा।
हम अकेले ही जिन्दगी की नई शुरुआत करते हैं।
चलो मिलकर एक नया काम करते हैं।
बाहें फैलाकर जिंदगी को खुशियों के नाम करते हैं।
कभी यूँ चलते चलते उसकी याद आये तो,
उसके साथ बिताया लम्हा गर तुम्हें रुलाये तो,
तुरन्त पोंछ लेना आँसू आँखों से क्योंकि,
ऐसा इंसान याद करने के काबिल नहीं होते हैं।
चलो मिलकर एक नया आयाम पाते हैं।
बांहें फैलाकर जिंदगी को खुशियों के नाम करते हैं।
हम खुद को दूसरे के सहारे क्यों कर देते हैं?
हम खुद की नौका की पतवार क्यों नहीं होते हैं?
अरे हममें भी है जज्बा कुछ कर गुजरने का,
तो अब दूसरे शख्स को खुद की कमजोरी नहीं बनाते हैं।
चलो मिलकर एक नया आयाम बनाते हैं।
बांहें फैलाकर जिंदगी को खुशियों के नाम करते हैं - 2।
रजनी पटेल
डायरी के पन्ने
डायरी के कोरे पन्नों में,
जीवन की गाथा भर्ती हूँ।
हर सुख दुःख बचपन से,
प्रिय डायरी से साझा करती हूँ।
मेरी डायरी मुझसे बात करती हैं,
उदास होती हूँ तो हंसाती है।
तन्हाइयों,अकेलेपन,अपनों के डांट में भी
मेरी डायरी हमसाया हुआ करती हैं,
मुरझाये चेहरे, माथे की सिलवटें भी,
डायरी पङते मिट जाया करती है।
मेरी डायरी मुझसे बात करती है,
उदास होती हुं तो हंसाती हैं।
मेरी डायरी मेरे अकेलेपन की
हमराज हुआ करती है,
बेबसी, मजबूरी, इश्क, मोहब्बत की,
गुप्त गूं भी दिल में दबा कर रखती है।
मेरी डायरी मुझसे बात करती हैं,
उदास होती हूँ तो हंसाती है।
रजनी पटेल
औरत के रूप अनेक
कभी मां, कभी बेटी तो
कभी सौतन होती हैं।
औरत ही औरत की
बङी दुश्मन होती हैं।
वही औरत मां बनकर
बेटी पर प्यार लुटाती हैं।
फिर वहीं सास बनकर बहू से
क्यों दुश्मनों सा बैर निभाती हैं।
कभी मां, कभी बेटी तो
कभी सौतन होती हैं।
औरत ही औरत की
बङी दुश्मन होती हैं।
वही औरत बेटी बनकर
कर्तव्य समझकर सबकी सेवा करती हैं।
फिर वही औरत बहू बनकर
क्यों सास पर राज चलाती हैं।
कभी मां कभी बेटी तो
कभी सौतन होती हैं।
औरत ही औरत की
बङी दुश्मन होती हैं।
रजनी पटेल
कोरोना आया
कोरोना आया कोरोना आया
देशवासियों को दुख पहुंचाया
कलयुग का है रावण आया
इसने गंदगी को दूर भगाया।
बच्चों बूढ़े की चिंता इसने बङाई है
गंदगी में रहने वाले की सफाई से पहचान कराई हैं।
कोरोना आया कोरोना आया
देशवासियों को दुख पहुंचाया
ताजे बासी समाचार में
कोरोना और कोरोना छाया
बङो को अनेक योजनाओं
से लाभ कराया।
कोरोना आया कोरोना आया
देशवासियों को बहुत डराया।
हिन्दू मुस्लिमों में पुनः विद्रोह कर डाला
सरकार के चेहरे पर चिंता
का प्रभाव डाला।
कोरोना आया कोरोना आया
देशवासियों को दुख पहुंचाया
इतने कितनी वक्त का
नामोनिशान मिटा डाला।
अपने देश को अब तक
21 साल पीछे कर डाला।
कोरोना आया कोरोना आया
देशवासियों को बहुत डराया।
रजनी पटेल
माँ
जन्म देने वाली माँ
माँ शब्द अपने आप में ही
विशाल सागर है।,
माँ है तो हम हैं वरना
हम कुछ भी नहीं।
जन्म देने वाली माँ तो,
खुद बच्चों पर कुर्बान होती हैं।
मुश्किल वक्त में भी बच्चों को,
भोजन का निवाला खिलाती हैं।
अशिक्षित होकर भी अपनी,
संतानों को शिक्षित बनाती है।
जिस बेटी को नाजों से पालती हैं।
उसे दुल्हन बनाकर दूजे घर विदा करती हैं।
माँ तो आखिर माँ होती हैं।
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एक हैं सासू माँ
अपनी पूरी जिंदगी की कमाई,
अपने बेटे को बहू को सौंपती है।
जो अपनी सबसे कीमती,
दौलत बहू को सौंपती हैं।
अगर वो थोड़ा डांटे,फटकारे तो
सहने में क्या हर्ज हैं।
माँ तो आखिर माँ होती हैं।
चाहे वो जन्म देने वाली माँ हो
या बहू को बेटी समझने वाली सासू माँ।
रजनी पटेल
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