बुजुर्ग बिगाड़ सकते हैं अमेरिका का चुनावी समीकरण

America electoral equation can spoil the elderly - World News in Hindi
बीजिंग। अमेरिका में कोविड-19 महामारी लगातार भयावह रूप लेती जा रही है। अब तक 84 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 14 लाख से ज्यादा नागरिक संक्रमित हुए हैं। इसके बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप व उनका प्रशासन गंभीर नहीं लग रहा है। शायद उन्हें चुनावों और अर्थव्यवस्था की चिंता ज्यादा सता रही है। यहां बता दें कि अमेरिका में इस महामारी से बुजुर्ग व गरीब लोग इस महामारी से सबसे ज्यादा त्रस्त हैं। ताजा रिपोर्ट की मानें तो अमेरिका के ओल्ड एज होम्स और अन्य जगहों पर लगभग 26 हजार बुर्जुर्ग व कर्मचारियों की मौत हुई है।

अमेरिका में उम्रदराज लोगों की मौत का आंकड़ा यह दर्शाता है कि ट्रंप सरकार उन्हें बीमारी के चंगुल में फंसने से बचाने में नाकामयाब रही है। उम्र के अंतिम पड़ाव में पहुंचे लोगों की स्थिति बहुत दयनीय हो रही है। बताया जाता है कि अब तक अमेरिका में हुई कुल मौतों का एक तिहाई से ज्यादा बुजुर्ग हैं। भले ही अमेरिका सरकार ने अब तक इस तरफ ज्यादा ध्यान न दिया हो। पर चुनाव नजदीक हैं ऐसे में बुजुर्गों की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है। माना जाता है राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुजुर्गों के मतों पर निर्भर रहते आए हैं। वहीं विपक्षी डेमोक्रेट्स उम्मीदवार युवाओं के बीच ज्यादा लोकप्रिय हैं।

हालिया रिपोर्ट कहती है कि बुजुर्गो के साथ कोरोना वायरस महामारी के दौरान जो व्यवहार किया गया है, उससे यह वर्ग नाराज है। ऐसे में आने वाले चुनावों पर कुछ न कुछ असर तो जरूर पड़ेगा।

हालांकि ट्रंप चुनाव पर नजरें गढ़ाए बैठे हैं। लेकिन चुनाव जीतने का रास्ता इस महामारी से ही होकर गुजरता है। क्योंकि अगर अमेरिका में कोविड-19 की स्थिति बेहतर नहीं हुई और बुजुर्गों और अन्य लोगों के मरने का सिलसिला जारी रहा तो ट्रंप के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। इसलिए समय की दरकार है कि अमेरिकी सरकार वायरस को काबू में करने की दिशा में काम करे। (आईएएनएस)

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