संस्मरण - माँ - डॉ वंदना मिश्र "मोहिनी

मां
तू कितनी अच्छी है.... हूं। इस लॉकडाउन में घर रहते हुये मैंने जाना कि कितना कुछ रह गया था माँ के ह्दय मुझे बताने के लिये हमारा रिश्ता जैसे भावनाओं का सैलाब, हमारे बीच इस समय एक अद्भुत रिश्ते ने जन्म ले लिया वह रिश्ता था सहेली का ।इस दौरान मैंने जाना कि माँ कितना कुछ ऐसा था जिससे में अछूती थीं। अपनी व्यस्तताओं के रहते में माँ से कभी इस ठहराव से बात ही नहीं कर पायी थीं। जैसे अब करती हूं मैंने उनसे कितनी व्यंजनों को इस दौरान सीखा जो वो बेहतर बनाती थी। रोज वीडियो कॉल पर मुझे कितने वेद और पुराणों की रोचक कथाएँ मुझे सुनाती है। उनके बचपन वो किस्से जो शायद किसी को नहीं पता कि किस तरह वो नर्मदा में शिकारा चलाते हुये पकड़ी गयी और नाना जी पिटाई की थी घण्टों इस तरह अपने बचपन के किस्से सुनाकर बहुत खिलखिला कर हँसते हुये पहली बार देख रही हूँ 76 साल की इस उम्र में उन्हें आज भी नई चीजों को सीखने का कितना शौक था यह मैंने अब जाना ग्रामीण परिवेश और कम पढ़ी लिखी होने के बावजूद भी रिश्तों की कितनी मजबूत पकड़ थी उन्हें मैं हैरान हूं। मुझे इस अवकाश के दौरान माँ के रूप बहुत अच्छी दोस्त मिली जो मेरी कितनी समस्याओं को सुलझाने में मददगार साबित हुई।
रोज सुबह मुझे जल्दी मॉर्निंग वॉक ओर योगा प्रणायाम के लिये उठाती है फिर मेरे साथ वो भी विडियो काल पर रोज आसन प्राणायाम करती हैं। क्योंकि अभी -अभी स्मार्टफ़ोन ओर व्हाट्सएप चलाना सीखा है।
पिता के जाने बाद इतना खुश में अब उन्हें देख रही हूं इस दौरान मुझे अनुभव हुआ कि मैंने इतने सालों में कितना कुछ छोड़ दिया था जिसे माँ ने वापस मुझे लौटा दिया। अपनी व्यस्तताओं के चलते कितने रिश्ते बेजान हो गये थे माँ ने उन्हें इन दिनों वापस जीवंत कर दिया । मैंने जाना कि एक माँ की भूमिका में आप हमेशा सर्वश्रेष्ठ रही है पहले भी ओर आज भी। आपने मुझे सदैव भावनाओं से पोषित किया , जीवन में आने वाले सभी व्यक्तियों को सम्मान एवं उनके सुविचारों को ग्रहण करना कितना आवश्यक है-यह मैंने आप से ही इस दौरान बड़ी गहरायी से समझा। सही मायनों में नारी के विभिन्न स्वरूपों को आपको देख कर ही जाना और उसकी गूढ़ समझ वहीं से पैदा हुई , आपके आशीर्वाद और अनंत प्रेम के सागर में मुझे काफ़ी लंबे समय तक गोते लगाने का अवसर मिलता रहें, उस परमात्मा से यहीं प्रार्थना है। खुश रहना माँ । हैप्पी मदर्स डे।
डॉ वंदना मिश्र "मोहिनी 166 कान्यकुब्ज नगर इंदौर
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