अघोरियों की‌ दुनिया का रहस्य जानें

     अघोरी जिन्हें देख कर मुझे बहुत डर लगता था, लाल‌ लाल आंखें, जटाएं, पुरे शरीर भस्म लगा कुछ कपड़े पहनते कुछ बस लंगोट। उनके जीवन के बारे में जानने की बड़ी इच्छा रहती थी मै अपने बाबा (दादाजी) से पुछती- बाबा ये सब ऐसे क्यों रहते तो बाबा कहते उनकी तपस्या, पूजा यही है। और इसी तरह वो भगवान की पूजा कर उनको प्रसन्न करते। उनके बारे में जानने की इच्छा बड़े होने पर भी बनी रही। अब तो डर कुछ हद तक खत्म हो गई जानने की इच्छा ने उनसे पुछने पर भी मजबूर कर दिया। हम इस पोस्ट में अघोरी बाबा की दुनिया का रहस्य बताने जा रहे हैं। पढ़ें आपको कैसा लगा अवश्य बताएं....

    अघोरियों की‌ दुनिया का रहस्य....

    अघोरी बाबा ‌जो भगवान शिव को मानने वाले लोग होते हैं। ये लोग भगवान शिव की पूजा शव पर बैठ करते हैं। ये तांत्रिक पूजा कर उनको प्रसन्न करते हैं। अघोरी का मतलब उजाला या जो घोर नहीं हो, डरावना नहीं हो‌ सरल हो। अघोरी अपनी जिंदगी श्मशान में ही व्यतीत करते हैं। ये शव साधना करते जिसमें शव को मांस और मदिरा का भोग लगाते, शव पर‌ एक पैर रख तपस्या करते फिर श्मशान में शव के अस्थि, कपाल से हवन करते।

    ये अपनी तांत्रिक विद्या का सही प्रयोग भी करते हैं और बुरे प्रयोग भी करते हैं। ये श्मशान के अधजले‌ शवों का कच्चा मांस खाते हैं। उनके साथ शारीरिक संबंध भी बनाते हैं। इसका मुख्य कारण है कि ये सब इनके साधना का एक अंश है। ये सब करने का मतलब है कि ये उस अधजले शरीर को भी घृणित नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि वो उस वीभत्स शरीर में भी इश्वर के प्रति समर्पित है। इस अवस्था में भी वो भगवान की मन से साधना करते हैं।



     वो नागा साधुओं की तरह शुद्ध ब्रह्मचैर्य नहीं ‌रहते है। वो‌ शव के अलावा भी शारीरिक संबंध बनाते हैं वो भी श्मशान में शव की राख पर, पुरा शरीर लपेटे राख ढोल, नगाड़े बजाकर तब संबंध बनाते हैं। वो‌ महिलाओं के मासिक धर्म के समय ऐसा करते उनका मानना है कि ऐसा करने से उनकी शक्ति बढ़ जाती है।

     अघोरी तप साधना कहा करते हैं और शव कहां से मिलता.....

      अघोरी अपनी पूजा में लाशों को शामिल करते हैं। कहा जाता है कि वो शव से बात भी करते लेकिन ये कितना सच है पता नहीं। हिंदू धर्म में सांप काटने या 5 साल से कम उम्र के बच्चों के मरने पर जलाया नहीं जाता है। उनको गंगा नदी में प्रवाहित कर देते हैं। वही सब शव लेकर ये लोग अपनी तंत्र साधना करते। ऊपर से हर साल ना‌ जाने कितने लोग पानी में डूब जाते या नदी में बह कर चल जाते, उन सबको निकाल कर अघोरी साधना करते हैं।

     हमारे यहां बंगाल का तारापीठ, असम का कामख्या मंदिर, काशी का मणिकर्णिका घाट, ज्योतिर्लिंग त्र्यंबकेश्वर नासिक यहां सब घाट पर हमेशा अघोरी बाबा अपनी धूनी रमाए रहते। बंगाल में तो जादू तंत्र का गढ़ माना जाता है।
    
    अघोरी बहुत हठी होते हैं जो ठान लें कर के रहते। उनका आशीर्वाद आपको अगर फायदा पहुंचाता तो गुस्से में कहीं बात शाप से कम नहीं होती। वो जल्दी गुस्सा नहीं होते और जब गुस्सा होते तो बहुत भयंकर होता। ये गाय का मांस छोड़ सब कुछ खाते, यहां तक कि मल-मूत्र सब कुछ शामिल रहता हैं। श्मशान में एक कुटिया बना‌ कर रहते हैं एक धुनी जलती रहती साथ में एक कुत्ता पालते हैं।

    उनके मन में किसी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं रहता, उनके लिए सब समान है जिस कारण उनको जला मांस हो‌ या पकवान‌ मिठाई सब अच्छे ही लगते हैं।

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