लिख ही लें थोड़ा सुकून इधर से लेकर उधर तक फैल चुके हों जहाँ जर्रा जर्रा बेजुबान
भगवान जी और अल्ला मियाँ
का तो पता नहीं
पर सुबह अच्छी खबर मिली और अच्छा लगा
पता नहीं किसे सुनाई दी
किसे कुछ भी
अब भी पता नहीं चला
आदमी के आदमी ने आदमी पर
लगा कर इल्जाम बता कर गुनाहगार
बोल कर कुछ
दिखा कर कर गया जैसे कोई
शब्दों से कत्लेआम
कर दिया गया अन्दर
बिना पूछे बिना देखे हथियार और कत्ल का सामान
लगा दी गयी धारायें
एक आदमी पर सारी सभी भीड़ की
मानकर उसे एक नहीं कई कई आदमी एक साथ
जैसे हो एक जगह उगाये खुद की ही हजारों जुबान
जैसे हो एक जगह उगाये खुद की ही हजारों जुबान
फ़िर आदमी ने ही कर दिया इन्कार
देने से सजा झूठ की
कुछ बचा हुआ होगा वहाँ शायद इंसान
‘उलूक’ काट लिये दिन सैकड़ों
काल कोठरी में बेगुनाह ने
सजा कौन देगा यंत्रणा देने वाले गुनहगार को
कौन सा अल्ला या कौन सा भगवान ?
चित्र साभार: https://www.gograph.com/
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