खाली लिखने लिखाने से कुछ नहीं होना है गिरोह खुद ही होना होगा या किसी गिरोह में शामिल होना ही पड़ेगा
आसान
नहीं होता है
एक गिरोह हो जाना
बहुत
मुश्किल है
बिना गिरोह में शामिल हुऐ
कुछ
अपने मन से
सही कुछ
कहीं कर ले जाना
जमाना
आज गिरोहों का है
सरदार कौन है
कौन सदस्य है
किसे पूछना है
अपनी इच्छा से हो सके
कोई
अपने फायदे का काम बस यही सोचना है
गिरोह
हो जाने के
कोई नियम कायदे नहीं होते हैं
क्रमंचय या संचय का
प्रयोग करना होता है
काम कैसे हो जायेगा
बस यही सोचना और यही देखना होता है
बाहर से चेहरे में लिखा
बहुत कुछ नजर आये तब भी
आँख बंद कर
उससे कहीं पीछे की ओर देखना होता है
दल
दल बदल
झंडा डँडा सब दिखाने के होते हैं
काम कराने के तरीके के रास्तों के
अलग कुछ फसाने होते हैं
अकेला आदमी
कुछ अच्छी सोच लिये
अच्छे काम कर पाने के सपने खोदता है
उसी आदमी की
अच्छाई की तस्वीर को
कहीं एक गिरोहबाज
तेल पोत लेने के फसाने ढूंढता है
अच्छे अच्छा और अच्छाई
अभिशाप हो लेते हैं
तेल पोतने वाला
किसी और गिरोह का सहारा ले कर
अच्छाई की कबर खोदता है
जमाना गिरोह
और
गिरोहबाजों का चल रहा है
समझदार
कोई भी
अपने हिसाब के किसी गिरोह के
पैर धोने के लिये
उसके
आने जाने के ठिकाने ढूंढता है
‘उलूक’ कुछ करना कराना है तो
गिरोह होना ही पड़ेगा
खुद ना कर सको कुछ
कोई गल नहीं
किसी गिरोहबाज को
करने कराने के लिये
कहना कहाना ही पड़ेगा
हो क्यों नहीं लेता है
कुछ दिन के लिये बेशरम
सोच कर अच्छाई
हमाम में
सबके साथ नहाना है
खुले आम कपड़े खोल के
सामने से तो आना ही पड़ेगा।
चित्र साभार: https://clipart-library.com/
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