प्लाज्मा थैरेपी क्या है? कैसे होता है प्लाज्मा डोनेट? Plasma Therapy in Hindi



प्लाज्मा थैरेपी : कोरोना वायरस के संक्रमण के बीच देश में प्लाज्मा थैरेपी भी चर्चाओं में हैं। जिसे लेकर लोग प्लाज्मा डोनेट करने वालों को तालाश रहे हैं। क्या आपको पता है कि प्लाज्मा थैरेपी क्या होती है? प्लाज्मा थैरेपी कैसे होती है? प्लाज्मा थैरेपी कोरोना के ईलाज के लिए कितनी कारगार है? और प्लाज्मा डोनेट कैसे करते हैं और कौन प्लाज्मा डोनेट कर सकता है? आज हम इन्हीं सवालों का जवाब आपको इस पोस्ट के जरिए देने वाले हैं।



कोरोना वायरस के कारण जहां पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है तो वहीं भारत में पहले इसे इतनी गंभीरता से नहीं लिया गया, जबकि अब दिन प्रतिदिन बढ़ रहे संक्रमण को देखते हुए कोरोना वायरस को लेकर लोग गंभीर हुए हैं। जब से कोरोनावायरस आया है, तभी से देश में कॉन्वलसेंट प्लाज्मा थैरेपी की चर्चा हो रही। दिल्ली समेत देशभर के कई अस्पतालों में बकायदा प्लाज्मा थैरेपी का इलाज भी चल रहा है। लेकिन अब पता चला है कि कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थैरेपी बहुत ज्यादा कारगर नहीं है। यह थैरेपी मृत्‍यु दर रोकने में भी सफल नहीं है। जिसके बाद से प्लाज्मा थैरेपी को लेकर अनेकों चर्चाएं चल रही हैं।


क्या होती है प्लाज्मा थैरेपी?


प्लाज्मा थैरेपी में कोविड-19 से उबर चुके व्यक्ति के रक्त से एंटीबॉडीज लेकर उसे संक्रमित व्यक्ति में चढ़ाया जाता है, ताकि उसके शरीर में संक्रमण से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सके। यानी इम्युनिटी आ जाए। ICMR ने अपनी रिसर्च में पाया कि दोनों तरह के मरीजों (प्लाज्मा थैरेपी और सामान्य इलाज) की मृत्‍यु दर में फर्क बेहद कम (1%) था।

ये भी पढ़े

1. PUBG GAME से पैसे कैसे कमाए? Make Money PUBG Game - Wikipedia Hindi

2.  EMI पर मोबाइल कैसे खरीदें (How to Buy Mobile on EMI) - Wikipedia Hindi

3. WhatsApp से पैसे कैसे कमाए How to make Money Online with Whatsapp - Wikipedia Hindi


प्लाज्मा थैरेपी को हम "उधार की इम्युनिटी" भी कह सकते हैं, क्योंकि इसे बीमारी से उबर चुके व्यक्ति के खून से निकालकर मरीज को दिया जाता है। इसमें एंटीबॉडीज होती हैं, जो कुछ निश्चित समय के लिए प्लाज्मा से चिपक जाती हैं और वायरस के दूसरी बार लौटने पर उससे लड़ने के लिए तैयार रहती हैं।


प्लाज्मा क्‍या होता है?


प्लाज्मा इंसान के खून का तरल हिस्सा है। यह 91 से 92% पानी से बना और हल्के पीले रंग का होता है। इंसान के ब्लड में करीब 55% प्लाज्मा होता है। बचे हुए 45% में रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स होती हैं। प्लाज्मा में पानी के अलावा हार्मोंस, प्रोटीन, कार्बन डाइऑक्साइड और ग्लूकोज मिनरल पाए जाते हैं। ब्लड में हिमोग्लोबिन और आयरन की वजह से खून लाल होता है, लेकिन यदि प्लाज्मा को ब्लड से अलग कर दिया जाए तो यह हल्का पीला तरल बन जाता है।


ये भी पढ़े

> Adhaar Card Se Loan Kaise Le? 2020 में आधार कार्ड से लोन कैसे लें - Wikipedia Hindi


> EMI पर मोबाइल कैसे खरीदें (How to Buy Mobile on EMI) - Wikipedia Hindi


प्लाज्मा का काम हार्मोन, प्रोटीन और पोषक तत्वों को शरीर के विभिन्न हिस्सों तक ले जाना है। जब बॉडी में किसी भी तरह का वायरस या बैक्टीरिया अटैक करता है तो हमारी बॉडी उससे लड़ना शुरू कर देती है, जिसके बाद बॉडी में एंटीबॉडी बनती है। बाद में यही एंटीबॉडी उस बीमारी के खिलाफ लड़ाई लड़ता है।


प्लाज्मा थैरेपी कितनी कारगर?


- प्लाज्मा थैरेपी सपोर्ट ट्रीटमेंट पहले भी था, आगे भी रहेगा। कोरोना के 2% से 5% मामलों में सपोर्ट ट्रीटमेंट के तौर पर इसका इस्तेमाल होता रहेगा।

- ICMR की स्टडी बताती है कि कोरोना केवल प्लाज्मा थैरेपी से नहीं ठीक हो सकती है। हां, एक बात और सच है कि प्लाज्मा थैरेपी के बारे में जितना सोचा गया था, यह उतना कारगर नहीं है। इसलिए ICMR ने भी कहा है कि इसकी उपयोगिता बहुत ज्यादा नहीं महसूस हो रही है, जितनी उम्मीद पहले की जा रही थी।


कोरोना में कितनी कारगर प्लाज्मा थैरेपी?


यह थैरेपी पहले भी मरीजों की मदद कर चुकी है। डॉक्टर्स 1918 में आए स्पेनिश फ्लू के खिलाफ भी कॉन्वलसेंट प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन की मदद ले चुके हैं। हाल ही में यह प्रक्रिया सार्स, इबोला, एच1एन1 समेत कई दूसरे वायरस से जूझ रहे मरीजों पर भी की जा चुकी है। कुछ स्टडीज बताती हैं कि यह एच1एन1 और सार्स समेत कई दूसरी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की हालत सुधारने में मदद कर सकता है।

जब एक व्यक्ति कोविड 19 से रिकवर हो जाता है तो उनके खून में एंटीबॉडीज बन जाती हैं, जो वायरस से लड़ने में मदद करती हैं। चूंकि, यह वायरस नोवल है, इसका मतलब कि इस महामारी से पहले कोई भी इसका शिकार नहीं हुआ है। इसलिए हमारे शरीर में पहले से ही इससे लड़ने के लिए एंटीबॉडीज मौजूद नहीं है। हालांकि, एक्सपर्ट्स अभी भी कोविड 19 से जूझ रहे मरीजों में कॉन्वलसेंट प्लाज्मा के असर के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं।


प्‍लाज्‍मा थैरेपी से कैसे होता है कोरोना का इलाज?


कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के प्लाज्मा को नए कोविड मरीज में ट्रांस फ्यूज किया जाता है। ठीक हो चुके मरीज से जब प्लाज्मा थैरेपी के जरिए एंटीबॉडीज कोविड मरीज की बॉडी में डाली जाती है तो वायरस का असर कम होने लगता है। इस पूरी प्रक्रिया को प्लाज्मा थैरेपी कहा जाता है। कोरोना से ठीक हो चुके एक व्यक्ति के प्लाज्मा को दो कोविड मरीज में ट्रांस फ्यूज किया जा सकता है।


कौन कर सकता है प्लाज्मा डोनेट?


एफडीए के अनुसार, कॉन्वलसेंट प्लाज्मा केवल उन्हीं लोगों से कलेक्ट किया जाना चाहिए जो ब्लड डोनेशन के लिए योग्य हैं। अगर व्यक्ति को पहले कोरोनावायरस पॉजिटिव रह चुका है तो ही वह दान कर सकता है। संक्रमित व्यक्ति कोविड 19 से पूरी तरह उबरने के 14 दिन बाद ही डोनेशन कर सकता है। डोनर में किसी भी तरह के लक्षण नहीं होने चाहिए।


ये भी पढ़े

1. क्रेडिट स्कोर (Credit Score) क्या है? लोन लेने के लिए क्यों है जरूरी?  - Wikipedia Hindi

2. Adhaar Card Se Loan Kaise Le? 2020 में आधार कार्ड से लोन कैसे लें - Wikipedia Hindi





दान देने वाले के शरीर में ब्लड वॉल्यूम ज्यादा होना चाहिए। यह आपके शरीर की लंबाई और वजन पर निर्भर करता है। डोनर की उम्र 17 साल से ज्यादा और पूरी तरह से स्वस्थ्य होना चाहिए। आपको मेडिकल एग्जामिनेशन से गुजरना होगा, जहां आपकी मेडिकल हिस्ट्री की जांच की जाएगी।


निष्कर्ष :

दोस्तों अब तो आप समझ गए होंगे कि आखिर ये प्लाज्मा थैरेपी क्या होती है? प्लाज्मा थैरेपी कैसे होती है? प्लाज्मा थैरेपी कोरोना वायरस से बचाव के लिए कितनी कारगर है? कौन कर सकता है प्लाज्मा डोनेट और कैसे होता है प्लाज्मा डोनेट। उम्मीद करते हैं कि आपको पूरी तरह से समझ आ गई होगी। इसके साथ ही एक बात जो आपको पहले ही बता चुके हैं कि कोरोना वायरस को लेकर लोग सर्तक नहीं है, लेकिन अगर हमें इसके संक्रमण से बचना है तो इससे बचकर रहना होगा। इसलिए आप भी जितना हो अपना परहेज रखें।

अगर आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी पसंद आए तो आगे जरूर शेयर करें। क्योंकि लोग इसे पढ़ना चाहते हैं।


Top Trending Article

1. अगर आपके पास भी हैं एक से ज्यादा बैंक अकाउंट, तो आपके लिए आने वाले हैं बुरे दिन - Wikipedia Hindi

2. मुख्यमंत्री की कुर्सी के दावेदार चौधरी सुनील जाखड़ की राजनीति का सफर

3. अबोहर का इतिहास History Of Abohar - Wikipedia Hindi

4. फेसबुक का इतिहास Facebook History - Wikipedia Hindi

5. Corona Virus Kya Hai कोरोना वायरस क्या है - Wikipedia Hindi


Comments

Popular posts from this blog

Gove confirms mandatory housebuilding targets for councils will be abolished in face of Tory rebellion – UK politics live

Kotak Mahindra Bank Recruitment 2022 Released for Graduate Candidates And Apply Online