समास की परिभाषा, भेद एवं उदाहरण

समास की परिभाषा



आज हम आपको समास की परिभाषा, भेद एवं उदाहरण के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपके आने वाली सभी प्रतियोगी परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होगीं।  जैसे:- Patwari, Police, SSC, Railway, Banking, UPSC, UPPCS, RPSC, Police, SI & Others में अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं। तथा प्रतियोगी छात्र परीक्षा की दृष्टि से आवश्यक जानकारी से परिचित हो सके ।  

 समास की परिभाषा :- समास का मतलब है संक्षिप्तीकरण। दो या दो से अधिक शब्द मिलकर एक नया एवं सार्थक शब्द की रचना करते हैं। यह नया शब्द ही समास कहलाता है।

यानी कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक अर्थ को प्रकट किया जा सके वही समास होता है।

आपस में सम्बन्ध रखने वाले दो या दो से अधिक शब्दों के मेल को समास कहते है |

समास का अर्थ :- संक्षिप्त, संक्षेप

  • ·       जैसेः- राजा का पुत्र :- राजपुत्र ( राजा पूर्व पद है और पुत्र उत्तर पद है )
  • ·       देश का भक्त
  • ·       देशभक्त, घोड़े पर सवार :- घुड़सवार

समास के भेद :- समास के छः भेद होते है , मुख्य रूप से समास के भेद है  (तत्पुरुष तत्पुरुस समास को दो भागो बाँट गया है  - कर्मधारय समास व द्विगु समास है।)

1.   अव्ययीभाव समास  

2.   द्वंद्व समास

3.   द्विगु समास

4.   कर्मधारय समास

5.   बहुव्रीहि समास

6.   तत्पुरुष समास


अव्ययीभाव समास :- इस समास में  पहला पद प्रधान होता है , दूसरा पद संज्ञा होता है |

अव्यय क्या होते है ?

जिन शब्दों पर लिंगकारककाल आदि से भी कोई प्रभाव न पड़े अर्थात जो अपरिवर्तित रहेंवे शब्द अव्यय कहलाते हैं।

अव्ययीभाव समास के उदाहरण :-

  • यथाशक्ति :- शक्ति के अनुसार
  • अनजाने :- बिना जाने
  • हरघडी :- घडी-घडी
  • प्रतिमास :- प्रत्येक मास

अव्ययीभाव समास के कुछ अन्य उदाहरण :- निस्संदेह, बेशक, बेनाम, बेकाम, बेलगाम, भरपेट, भरपूर, रातभर, दिनभर, रातोंरात, हाथोंहाथ, घडी-घडी, साफ़-साफ़ , यथाशक्तियथासमययथाक्रम, निडर, प्रतिक्षण आदि |

अव्ययीभाव समास की पहचान :- जिन शब्दों के आगे “बे, यथा, प्रति, आ, बा, भर” शब्द आये तो वे अव्ययीभाव समास के अंतर्गत आएगे|  सामान  शब्दों के बीच हाइपर (-) आता है तो वह अव्ययीभाव समास होगा |


ओर पढ़े संज्ञा की परिभाषा, संज्ञा के भेद व उसके उदाहरण


  द्वंद्व समास :- इस समास में दोनों पद प्रधान  होते है |

जैसे :- 

  • माता - पिता = माता और पिता 
  • पाप - पुण्य = पाप और पुण्य
  • दिन - रात = दिन और रात 
  • भाई - बहन = भाई और बहन 
  • अच्छा - बुरा = अच्छा और बुरा 

  द्वंद्व समास के कुछ अन्य उदाहरण :- राधा-कृष्ण, राजा-प्रजा, गुण-दोष, नर-नारी, एड़ी-चोटी, लेन-देन, भला-बुरा, जन्म-मरण, पाप-पुण्य, सीताराम,दयाधर्म आदि |

  द्वंद्व समास की पहचान :- सका विग्रह करने पर बीच में "और" शब्द आता है | इस समास में शब्द एक दुसरे के विलोम /विपरीत  में होते है | तो वह  द्वंद्व समास है |


द्विगु समास :- इस समास में  पहला पद संख्यावाची होता है | 

द्विगु समास  के उदाहरण :-

  • ·        त्रिलोक – तीन लोकों का समाहार

  • ·        नवरत्न – नव रत्नों का समाहार

  • ·        त्रिफला – तीन फलों का समाहार

  • ·        सप्ताह – सात दिनों का समूह

  • ·        चौमासा – चार मासों का समूह

  • ·        दोपहर – दो पहर का समाहार

  • ·        चारपाई – चार पैरों का समाहार

द्विगु समास के कुछ अन्य उदाहरण :- चतुर्मुख,सतसई, त्रिभुवन, दोराहा, अठकोना, छमाही, अष्टधातु, त्रिवेणी, तिमाही, नवरात्र, अठन्नी आदि | (अपवाद - चारपाई, पंजाब दोनों बहुव्रीहि समास के अंतर्गत आते है )

द्विगु समास की पहचान :- समस्तपद का विग्रह करने पर "समूह या  समाहार" शब्द आता है  तो वह द्विगु समास है|



कर्मधारय समास :- वह समास जिसका पहला पद विशेषण एवं दूसरा पद विशेष्य होता है अथवा पूर्वपद एवं उत्तरपद में उपमान – उपमेय का सम्बन्ध माना जाता है कर्मधारय समास कहलाता है।

कर्मधारय समास  के उदाहरण :-

  •  देहलता = देह रूपी लता
  • कमलनयन = कमल के समान नयन
  • नीलकमल = नीला है जो कमल
  • चरणकमल = कमल जैसे चरण
  • नीलगगन = नीला है जो गगन
  • चन्द्रमुख = चन्द्र जैसा मुख

कर्मधारय समास के कुछ अन्य उदाहरण :- विद्याधन, भलामानस, श्यामसुंदर, मुखबिदु, सज्जन, कृष्णसर्प, महात्मा आदि |

कर्मधारय समास की पहचान :- इस समास का विग्रह करने पर " जो , जैसा , रूपी " धब्द आये कर्मधारय समास कहलाता है |


बहुव्रीहि समास :- इस समास के समस्त में  कोई भी पद प्रधान नही होती है ,कोई  तीसरा पद प्रधान होता है |

बहुव्रीहि समास  के उदाहरण :- 

गजानन = गज के समान आनन है जिसका - गणेश 
दशानन = दश है आनन जिसके - रावण
कमलनयन = कलम के समान नयन है जिसके - नारायण
पीताम्बर= पीले है वस्त्र जिसके - श्री कृष्ण
नीलकंठ = नीला है कंठ जिसका - शिव  

बहुव्रीहि समास  के कुछ अन्य उदहारण :- कुरूप, लम्बोदर, चंद्रशेखर, चतुर्भुज आदि |

बहुव्रीहि समास की पहचान :- इस समास का विग्रह करने पर "जिसका" शब्द आये तो बहुव्रीहि समास होगा |



तत्पुरुष समास :- तत्पुरुष समास वह होता है, जिसमें उत्तर/दूसरा  पद प्रधान होता है, अर्थात प्रथम पद गौण होता है एवं उत्तर पद की प्रधानता होती है व समास करते वक़्त बीच की विभक्ति का लोप हो जाता है।
इस समास में कर्ताकारक व  संबोधन करक को छोड़कर सभी करक आते है |

 तत्पुरुष समास के 6 भेद है 

  1. कर्म तत्पुरुष समास
  2. करण तत्पुरुष समास
  3. सम्प्रदान तत्पुरुष समास
  4. अपादान तत्पुरुष समास
  5. सम्बन्ध तत्पुरुष समास
  6. अधिकरण तत्पुरुष समास
कर्म तत्पुरुष समास :- इस में  समास ‘को’ चिन्ह के लोप होता है |

   जैसे :
  • ग्रामगत :- ग्राम को गया हुआ।
  • यशप्राप्त :- यश को प्राप्त।
  • स्वर्गगत : -स्वर्ग को गया हुआ।
  • ग्रंथकार : -ग्रन्थ को लिखने वाला।
  • माखनचोर :- माखन को चुराने वाला।
  • सम्मानप्राप्त :- सम्मान को प्राप्त |
  • जेबकट :- जेब को काटने वाला  |
  • स्वर्गप्राप्त  :- स्वर्ग को प्राप्त |
करण तत्पुरुष समास :- यह समास दो कारक चिन्हों ‘से’ और के द्वारा के लोप से बनता है।
जैसे :-

  • भुखमरा : भूख से मरा
  • रसभरा : रस से भरा
  • मनचाहा : मन से चाहा
  • करुणापूर्ण : करुणा से पूर्ण
  • शोकाकुल : शौक से आकुल
  • कष्टसाध्य : कष्ट से साध्य
  • मनमाना : मन से माना हुआ
सम्प्रदान तत्पुरुष समास :-इस समास में कारक चिन्ह ‘के लिए’ का लोप हो जाता है।
जैसे :- 
  • प्रयोगशाला : प्रयोग के लिए शाला
  • डाकगाड़ी : डाक के लिए गाडी
  • रसोईघर : रसोई के लिए घर
  • पाठशाला : पाठ के लिए शाला
  • देशभक्ति : देश के लिए भक्ति
  • विद्यालय : विद्या के लिए आलय
  • हथकड़ी : हाथ के लिए कड़ी
  • सभाभवन : सभा के लिए भवन
  • यज्ञशाला : यज्ञ के लिए शाला
  • देशार्पण : देश के लिए अर्पण
  • गौशाला : गौओं के लिए शाला
  • सत्याग्रह : सत्य के लिए आग्रह
  • ओर पढ़े सर्वनाम की परिभाषा, सर्वनाम के भेद व उदाहरण
  • अपादान तत्पुरुष समास :- इस समास में अपादान कारक के चिन्ह ‘से’ का लोप हो जाता है। जैसे :-
  • धनहीन : धन से हीन
  • गुणहीन : गुण से हीन
  • विद्यारहित : विद्या से रहित
  • रोगमुक्त : रोग से मुक्त
  • बंधनमुक्त : बंधन से मुक्त
  • दूरागत : दूर से आगत
  • नेत्रहीन : नेत्र से हीन
  • पापमुक्त : पाप से मुक्त
  • जलहीन : जल से हीन
सम्बन्ध तत्पुरुष समास :- सम्बन्ध कारक के चिन्ह ‘का , की , के ' का लोप होता है वहां सम्बन्ध तत्पुरुष समास होता है।
जैसे :- 
  • राष्ट्रगौरव : राष्ट्र का गौरव
  • राजसभा : राजा की सभा
  • पराधीन : दूसरों के आधीन
  • सेनापति : सेना का पति
  • राजदरबार : राजा का दरबार
  • देशरक्षा : देश की रक्षा
  • गृहस्वामी : गृह का स्वामी
अधिकरण तत्पुरुष समास :- इस समास में कारक चिन्ह ‘में’ और ‘पर’ का लोप होता है। 
जैसे :- 
  • पर्वतारोहण  : पर्वत पर आरोहण
  • ग्रामवास : ग्राम में वास
  • आपबीती : आप पर बीती
  • जलसमाधि : जल में समाधि
  • नीतिकुशल : नीति में कुशल
  • नरोत्तम : नारों में उत्तम
तत्पुरुष समास  के अन्य भेद :-

1} अलुक तत्पुरुष समास :-  पूर्व कि विभक्ति  का लोप न होना |
जैसे :- 
  • खेचर = खे विचरण  (खे - खेत)
  • मनसिज = मानसी (मन में ) उत्पन्न
  • युधिष्ठिर = युधि (युद्ध ) में स्थिर 
2नञ् ततपुरुष समास :- पहला  पद निषेधात्मक होता है 
जैसे :- अस्थिर , अनदेखा, अभाव, अधर्म, अयोग्य, असुना आदि |


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