चिट्ठे में चिपकाई जाने वाली पन्द्रह सौ पैंतीसवीं वर्ष दो हजार बीस की सैंतालिसवीं गद्य टाईप पद्य बकवास
लिखना
और
लिखे हुऐ पर
कभी किसी मनहूस घड़ी पर
किसी और दिन
दूसरी बार चिंतन करना
अदभुत होता है
लिखने वाले के लिये भी
और
लिखे हुऐ को दुबारा
पाठक के रूप में
पढ़े जाने के लिये भी
लिखते समय का
बेवकूफ
परिपक्व हो चुका होता है
जब पाठक हो कर
सामने आता है
अपना लिखा अपना पढ़ना
टिप्पणी भी
किसी की
मजबूरी में दी हुई
लेखक
टिप्पणी दे आया
टिप्पणीकार की तरह
एक अनमोल रचना पर
बहुत सुन्दर की
सुन्दर से
बहुत सुन्दर होते हुऐ
लाजवाब से
गजब वाह से लेकर अदभुद
लिखना सफल
फिर
उसके बाद
किसे कौन बताये कौन समझाये
लिखना पढ़ना छोड़
बातें करना इधर उधर की
लिखने को छोड़ कर बाकी सब
चिट्ठाकारी चिट्ठे ब्लागिंग में भी
चल रहा है
चलता रहा है
अंडरवर्ड
बहुत सारी कहानियाँ हैं
लेखन में भी हैं
दबँग
एक नहीं कई हैं ‘उलूक’
रात का प्राणी
दिन में भी देख लेता है
जय ब्लॉगिंग ।
चित्र साभार: https://in.pinterest.com/
और
लिखे हुऐ पर
कभी किसी मनहूस घड़ी पर
किसी और दिन
दूसरी बार चिंतन करना
अदभुत होता है
लिखने वाले के लिये भी
और
लिखे हुऐ को दुबारा
पाठक के रूप में
पढ़े जाने के लिये भी
लिखते समय का
बेवकूफ
परिपक्व हो चुका होता है
जब पाठक हो कर
सामने आता है
अपना लिखा अपना पढ़ना
टिप्पणी भी
किसी की
मजबूरी में दी हुई
लेखक
टिप्पणी दे आया
टिप्पणीकार की तरह
एक अनमोल रचना पर
बहुत सुन्दर की
सुन्दर से
बहुत सुन्दर होते हुऐ
लाजवाब से
गजब वाह से लेकर अदभुद
लिखना सफल
फिर
उसके बाद
किसे कौन बताये कौन समझाये
लिखना पढ़ना छोड़
बातें करना इधर उधर की
लिखने को छोड़ कर बाकी सब
चिट्ठाकारी चिट्ठे ब्लागिंग में भी
चल रहा है
चलता रहा है
अंडरवर्ड
बहुत सारी कहानियाँ हैं
लेखन में भी हैं
दबँग
एक नहीं कई हैं ‘उलूक’
रात का प्राणी
दिन में भी देख लेता है
जय ब्लॉगिंग ।
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