पर्यावरण अतिमहत्वपूर्ण तथ्य (Part-2)
1) अधिक समय तक सूर्य के पराबैंगनी विकिरण के शरीर पर पड़ने पर हो सकता है – डीएनए में आनुवांशिक उत्परिवर्तन
2) ‘ओजोन परत संरक्षण दिवस’ मनाया जाता है – 16 सितंबर को
3) क्लोरीन, फ्लोरीन एवं ऑक्सीजन से बना मानव निर्मित गैसीय व द्रवीय पदार्थ है जो कि रेफ्रिजरेटर तथा वातानुकूलित यंत्रों में शीतकारक के रूप में प्रयोग किया जाता है – क्लोरोफ्लोरोकार्बन
4) वायुमंडल के ध्रुवीय भागों में ओजोन का निर्माण धीमी गति से होता है। अत: ओजोन के क्षरण का प्रभाव सर्वाधिक परिलक्षित होता है – ध्रुवों के ऊपर
5) ओजोन परत को सर्वाधिक नुकसान पहुंचाने वाला प्रदूषक है – क्लोरोफ्लोरोकार्बन
6) वायुमंडल में जिसकी उपस्थिति से ओजोनास्फियर में ओजोन परत का क्षरण होता है –क्लोरोफ्लोरोकार्बन
7) ओजोनपरत की क्षीणता के लिए उत्तरदायी नहीं है – विलायक के रूप में प्रयुक्त मेथिल क्लोरोफार्म
8) ओजोनपरत की क्षीणता के लिए उत्तरदायी गैसें हैं – सीएफसी, हैलोजन्स, नाइट्रस ऑक्साइड,ट्राइक्लोरोएथिलीन, हैनोन-1211, 1301
9) वह ग्रीन आउस र्गस जिसके द्वारा ट्रोपोस्फियर में ओजोन प्रदूषण नहीं होता है – कार्बन मोनो ऑक्साइड
10) ओजोन छिद्र का निर्माण सर्वाधिक है – अंटार्कटिका के ऊपर
11) मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल जिसके रक्षण से संबंधित है, वह है – ओजोन परत
12) 1 जनवरी, 1989 से प्रभावी हुआ था – मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल
13) मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल संबंधित है – ओजोन परत के क्षय को रोकने से
14) ‘मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल’ संबंधित है –क्लोरोफ्लोरोकार्बन से
15) समतापमंडल में ओजोनके स्तर को प्राकृतिक रूप से विनियमित किया जाता है –नाइट्रोजन डाइऑक्साइड द्वारा
16) ओजोन परत की मोटाई मौसम के हिसाब से बदलती रहती है। बसंत ऋतु में इसकी मोटाई सबसे ज्यादा होती है तथा वर्ष ऋतु में रहती है – सबसे कम
17) ओजोन परत को मापा जाता है – डॉबसन इकाई (Dobson Unit-DU) में
18) 00C तथा 1 atm दाब पर शुद्ध ओजोन की 01 मिमी की मोटाई के बराबर होता है – 1 डॉबसन यूनिट
19) क्लोरोफ्लोरोकार्बन, जो ओज़ोन-ह्रासक पदार्थो के रूप में चर्चित हैं, उनका प्रयोग होता है – सुघट्य फोम के निर्माण में, ऐरोसॉल कैन में दाबकारी एजेंट के रूप में तथा कुछ विशिष्ट इलेक्ट्रॉनिक अवयवों की सफाई करने में
20) एक अत्यधिक स्थायी यौगिक जो वायुमंडल में 80 से 100 वर्षों तक बना रह सकता है –क्लोरोफ्लोरोकार्बन
21) क्लोरोफ्लोरोकार्बन, हैलोन्स तथा कार्बन टेट्राक्लोराइड तीनों ही पदार्थ हैं –ओजोन रिक्तिकारक
22) सीएफसी, हैलोन्स तथा अन्य ओजोन रिक्तिकराण रसायनों जैसे कार्बन टेट्राक्लोराइड के उत्पादन पर रोक लगाई गई है – मांट्रियल प्रोटोकॉल के अनुसार
23) अंटार्कटिक क्षेत्र में ओजोन छिद्र का बनना चिंता का विषय है। इस छिद्र के बनने का संभावित कारण है –विशिष्ट ध्रुवीय वाताग्र तथा समतापमंडलीय बादलों की उपस्थिति तथा क्लोरोफ्लोरोकार्बनों का अंतर्वाह
24) ऐसा माध्यम जहां क्लोरीन यौगिक ओजोन परत का विनाश करने वाले क्लोरीन कणों मे परिवर्तित हो जाते हैं – ध्रुवीयसमतापमंडलीय बादल
25) फ्रिजों में जो गैस भरी जाती है, वह है – मेफ्रोन
26) प्रशीतक के रूप में बड़े संयंत्रों में प्रयुक्त होती है – अमोनिया
27) सर्वप्रथम वर्ष 1985 में ‘टोटल ओज़ोन मैपिंग स्पेक्ट्रोमीटर’ की मदद से अंटार्कटिका के ऊपर ओज़ोन छिद्र का पता लगाया था – ब्रिटिश दल ने
28) तिब्बत पठार के ऊपर वर्ष 2005 में ‘ओज़ोन आभामंडल’ (ओजोन हैलो) का पता लगाया – जी.डब्ल्यू. केंट मूर ने
29) मनुष्यों में खांसी, सीने में दर्द उत्पन्न करने के साथ-साथ फेफड़ों को भी क्षति पहुंचा सकता है – O3 का उच्च सांद्रण
30) सूर्य के उच्च आवृत्ति के पराबैंगनी प्रकाश की 93-99 प्रतिशत मात्रा अवशोषित कर लेती है (जो पृथ्वी पर जीवन के लिए हानिकारक है) – ओजोन परत
31) ओज़ोन का अवक्षय करने वाले पदार्थों के प्रयोगपर नियंत्रण करने और उन्हें चरणबद्ध रूप से प्रयोग-बाह्य करने (फेजि़ंग आउट) के मुद्दे से संबंद्ध हैं – मॉनिट्रयल प्रोटोकॉल
32) चमोली के रैणी गांव में वन-कटाई के विरोध में आंदोलन चलाया गया – गौरा देवी के नेतृत्व में
33) जिस पारिस्थितिकीय तंत्र में पौधों का जैविक पदार्थ अधिकतम है, वह है – उष्ण्ाकिटबंधीय वर्षा वन
34) अधिकतम पादप विविधता पाई जाती है – उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों में
35) यदि हम घडि़याल को उनके प्राकृतिक आवास में देखनाचाहते हैं, तो जिस स्थान पर जाना सही होगा, वह है – चंबल नदी
36) • भारत में यदि कछुए की एक जाति का वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची । के अंतर्गत संरक्षित घोषित किया गया हो तो इसका निहितार्थ है कि – इसे संरक्षण का वही स्तर प्राप्त है, जैसा कि बाघ को
37) वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम, 1972 के अनुसार किसी व्यक्ति द्वारा, विधि द्वारा किए गए कतिपय उपबंधों के अधीन होने के सिवायजिस प्राणी का शिकार नहीं किया जा सकता, वह है – घडि़याल, भारतीय जंगली गधा एवं जंगली भैंस
38) जलवायु के प्रमुख घटक जो झारखंड राज्य के वन के क्षेत्र की जलवायु को प्रभावित कर रहे हैं – जंगल की आग
39) झारखंड राज्य में जंगलों को ‘सुरक्षित वन’ के रूप में वर्गीकृत करने का उद्देश्य है – बिना अनुमति सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध
40) भारत का वह राज्य जहां सर्वप्रथम ‘मुख्यमंत्रीजन वन योजना’ का प्रारंभी किया गया – झारखंड
41) सदाबहार वन पाए जाते हैं – पश्चिमी घाट में
42) उत्तर-पूर्व भारत और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के 200 सेमी से अधिक औसत वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में पाया जाता है – उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों का विस्तार
43) विषुवतीय-वनों की अद्वितीय विशेषता/विशेषताएं हैं – ऊँचे, घने वृक्षों की विद्यमानता जिनके कीरीट निरंतर वितान बनाते हों, बहुत-सी जातियों का सह-अस्तित्व हो, आधिपादपों की असंख्य किस्मों की विद्यमानता हो।
44) विषुवतीय वन ऐसे उष्ण कटिबंध क्षेत्रों में मिलते हैं, जहां वर्षा होती है – 200 सेंमी से अधिक
45) विश्व भर की लगभग 80 प्रतिशत जैव-विविधता पाई जाती है – विषुवतीय वनों में
46) भारत में उपयुक्त पारिस्थितक संतुलन बनाए रखने के लिए वनाच्छादन हेतु न्यूनतम संस्तुत भूमि क्षेत्र है –33% Environment Notes For Prathmik Shikshak Samvida Varg 3
47) राष्ट्रीय वन नीति में भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र के जितने प्रशित पर वन रखने का लक्ष्य है, वह है – एक तिहाई
48) राष्ट्रीय वन नीति (1952) के अनुसार, जो वन का संवर्ग नहीं है – राष्ट्रीय उद्यान
49) वनों को वर्गीकृत किया गया है – (i) संरक्षित वन (ii) राष्ट्रीय वन (iii) ग्राम वन एवं (iv) वृक्ष-भूमि (Tree-Lands) – राष्ट्रीय वन नीति (1952) के अनुसार
50) देहरादून स्थित भारतीय वन सर्वेक्षण विभाग उपग्रह चित्रण के माध्यम से ‘वन स्थिति रिपोर्ट’ (The State of Forest Report) जारी करता है – प्रत्येक दो वर्ष पर
51) भारत में निर्वनीकरण का प्रभाव नहीं है – नगरीकरण
52) जो एक बार उपयोग होने के बाद पुन: उपयोग में लाए जा सकते हैं – नवीकरणीय संसाधन
53) वनों से पर्यावरण की गुणवत्ता बढ़ती है, क्योंकि वन पर्यावरण से कार्बन डायऑक्साइड का अवशोषण कर मुक्त करते हैं – ऑक्सीजन
54) विकास के चरण के आधार प प्राकृतिक संसाधनों को निम्न समूहों में विभाजित किया जा सकता है – संभाव्य संसाधन, वास्तविक संसाधन, आरक्षित संसाधन, स्टॉक संसाधन
55) जो एक क्षेत्र में स्थित हैं तथा भविष्य में भी प्रयोग में लाए जा सकते हैं – संभाव्य संसाधन
56) जिनका सर्वेक्षण किया गया है तथा उनकी मात्रा एवं गुणवत्ता का पता लगाया गया है और जिनका वर्तमान समय में प्रयोग किया जा रहा है – वास्तविक संसाधन
57) राष्ट्रीय सुदूर संवेदन अभिकरण (NRSA) प्रणाली से चित्रित वह भू क्षेत्र, जो वास्तव में वनाच्छादित होता है, कहलाता है – वनावरण
58) मैंग्रोव वनस्पतियों का विकास अधिकांशत: होता है – तटों के सहारे
59) भारत में मैंग्रोव (ज्वारीय वन) वनस्पति मुख्यत: पाई जाती है – सुंदरबन में
60) ये डेल्टा प्रदेशों तथा समुद्र के ज्वार वाले भागों में होते हैं तथा इन्हें मैंग्रोव वनस्पति के नाम से भी जाना जाता है – ज्वारीय वन
61) मैंग्रोव वनस्पति का सर्वाधिक क्षेत्र सुंदरबन डेल्टा में पाया जाता है। यहांके वनों में विशेष रूप से उल्लेखनीय है – सुंदरी वृक्ष
62) एक संरक्षित कच्छ-वनस्पति क्षेत्र है – गोवा
63) भारत में मैंग्रोव वन, सदापर्णी वन और पर्णपाती वनों का संयोजन है – अंडमान और निकाबार द्वीपसमूह में
64) नागालैंड के पर्वत क्रमश: बंजर होते जा रहे हैं, उसका प्रमुख कारण है – झूम कृषि
65) वह राज्य जिसके द्वारा ‘अपना वन अपना धन’ योजना प्रारंभ की गई है – हिमाचल प्रदेश
66) भारत में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम लागू किया गया था – वर्ष 1972 में
67) वन्य जीवों की तस्करी, अवैध शिकार से रक्षा एवं संरक्षण के लिए भारत सरकार द्वारा पारित किया गया था – वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972
68) भारत में वन संरक्षण अधिनियम कब पारित किया गया – वर्ष 1980 में
69) भारत में वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 लागू होने की तिथि है – 25 अक्टूबर, 1980
70) भारतीय वन्य जीव संस्थ्ज्ञान स्थित है – देहरादून में
71) वन अनुसंधान संस्थान स्थापित है – देहरादून में
72) वन अनुसंधान संस्थान की स्थापना उत्तराखंड के देहरादून जिले में की गई थी – वर्ष 1906 में
73) पर्यावरण से संबंधित है – विज्ञान और पर्यावरण केंद्र, भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण संस्थान, भारतीय वन्यजीव संस्थान
74) विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन राष्ट्रीय सर्वेक्षण और मानचित्रण के लिए भारत सरकार का एक प्राचीनतम विभाग है – भारतीय सर्वेक्षण विभाग
75) जे.आर.बी. अल्फ्रेड (J.R.B.Alfred) की पुस्तक फॉनल डाइवर्सिटी इन इंडिया (Faunal Diversity in India) के अनुसार विश्व के कुल जंतु प्रजातियों (Animal Species) की संख्या का भारत में पाया जाता है – 28% भाग
76) भारत की सबसे बड़ी मछली है – व्हेल शार्क
77) यह भारत की ही नहीं पूरे विश्व की सबसे बड़ी मछली है तथा यह 50 फुट तक लंबी हो सकती है – व्हेल शार्क
78) वर्ल्ड वाइल्डलाईफ फंड (WWF) का प्रतीक जानवर है – जाइन्ट पाण्डा
79) इसका वैज्ञानिक नाम ‘Ailuropoda melanoleuca’ है। इसका निवास स्थान मुख्यत: शीतोष्ण चौड़ी पत्ती वाले और मिश्रित वनों में मिलता है – जाइन्ट पाण्डा (Giant Panda)
80) गैवियलिस (घडि़याल) बहुतायत में पाया जाता है – गंगा में
81) घडि़याल (Gavialis) एक प्रजाति है – मगरमच्छ (Crocodilia) कुल की
82) भारत में पाए जोन वाला मगरमच्छ तथा हाथी हैं – संकटापन्न जातियां
83) ‘चिपको’ आंदोलन मूल रूप से विरुद्ध था – वन कटाई के
84) चिपको आंदोलन का नेता माना जाता है – सुंदरलाल बहुगुणा को
85) देश भर में वनों के विनाश के विरुद्ध हुए संगठित प्रतिरोध को चिपको आंदोलन का नाम दिया गया था –1970 के दशक में
86) ‘चिपको’ आंदोलन के प्रणेता हैं – चंडीप्रसाद भट्ट
87) भारत में वन्य जीव सप्ताह मनाया जाता है – 2 से 8 अक्टूबर के मध्य
88) विश्व संयुक्त राष्ट्र महासभा के 68वें वार्षिक सत्र के दौरान प्रतिवर्ष ‘विश्व वन्य जीव दिवस’ (World Wildlife Day) के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया – 3 मार्च को
89) पगमार्क तकनीक का प्रयोग किया जाता है – विभिन्न वन्य जन्तुओं की जनसंख्या के आंकलन के लिए
90) वन ह्रास का मुख्य कारण है – औद्योगिक विकास
91) राजीव गांधी वन्य जीव संरक्षण पुरस्कार दिया जाता है – शैक्षिक तथा शोध संस्थाओं, वन एवं वन्य जीव अधिकारियों तथा वन्य जीव संरक्षकों को
92) ‘नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेस’ स्थित है – नई दिल्ली में
93) पेड़-पौधों एवं जंतुओं की सर्वाधिक विविधता विशेषता है – ऊष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन
94) उष्ण कटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन ऐसे क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जहां वर्षा होती है – 100 सेमी से 200 सेमी के मध्य
95) बांस, शीशम, चंदन इत्यादित अन्य व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण वृक्षप्रजातियां पाई जाती है –उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन में
96) ये चौड़ी पत्तियों वाले नमी-युक्त वन हैं, जो दक्षिण अमेंरिका के अमेजन बेसिन के एक बड़े भू-भाग पर फैले हैं – अमेज़न वर्षा वन
97) अमेजन वर्षा वन ‘पृथ्वी ग्रह के फेफड़ों’ के रूप में जाना जाता है क्योंकि इनकी वनस्पति लगातार कार्बन डाइऑक्साइडको अवशोषित कर मुक्त करती रहती है – आक्सीजन को
98) पृथ्वी की 20 प्रतिशत से अधिक ऑक्सीजन उत्पादित होती है – अमेजन वर्षा वनों द्वारा
99) वह महाद्वीप जिसमें उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वनों का विस्तार अधिक है – एशिया
100) मानसूनी वन कहते हैं –उष्टकटिबंधीय पर्णपाती वनों को
101) समाचारों में कभी-कभी दिखाई देने वाले’रेड सैंडर्स’ (Red Sanders) – दक्षिण भारत के एक भाग में पाई जाने वाली एक वृक्ष जाति है।
102) इसका वैज्ञानिक नाम टेरोकार्पस सेंटेलिनस (Pterocarpus santalinus) है। यह पेड़ आंध्रप्रदेश के पालकोंडा व सेशाचलम पर्वत श्रेणियों में मुख्यतया पाया जाता है। इसकी लकड़ी सफेद होती है जो कालांतर में लाल रंग के चिपचिपे रस के स्राव के कारण लाल हो जाती है – रेड सैंडर्स (रक्त चंदन) Environment Notes For Prathmik Shikshak Samvida Varg 3
103) आयुर्वेद व सिद्धा दवाइयों को बनाने में, पूजा सामग्री में एवं पारंपरिक खिलौनों को बनाने में किया जाता है – रेड सैंडर्स का प्रयोग
104) राष्ट्रीय वन नीति के मुख्य उद्देश्य क्या थे – सामाजिक वानिकीको प्रोत्साहन देना, देश की कुल भूमि का एक-तिहाई वनाच्छादित करना
105) मरुस्थलीकरण को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (United Nations Convention to Combat Desertification) का/के क्या महत्व है/हैं – इसका उद्देश्य नवप्रवर्तनकारी राष्ट्रीय कार्यक्रमोंएवं समर्थक अंतरराष्ट्रीय भागीदारियों के माध्यम से प्रभावकारी कार्यवाही को प्रोत्साहित करनाहै,यह मरुस्थलीकरण को रोकने में स्थानीय लोगों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने हेतु ऊर्ध्वगामी उपागम (बॉटम-अप अप्रोच) के लिए प्रतिबद्ध है।
106) मरुस्थलीकरण को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (United Nations Convention to Combat Desertification) की स्थापना की गई थी – वर्ष 1994 में
107) यह अकेला काूनन बाध्यकारी समझौता है, जो संयुक्त रूप से पेश करता है – पर्यावरण एवं विकास तथा टिकाऊ भूमि प्रबंधन को
108) भारत में जो नगर वृक्षारोपण में विशिष्टता रखता है – वालपराई
109) वालपराई नगर स्थित है – कोयंबटूर जिले में
110) चीन, भारत, इंडोनेशिय तथा जापान में से जिसके भौगोलिक क्षेत्र का उच्चतम प्रतिशत वनाच्छादित है –जापान का
111) कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के 70% भाग पर वन बनाए रखने का संवैधानिक प्रावधान है – भूटान में
112) एल्युमीनियम को इसके पर्यावरणीय हितैषी स्वरूप और नवीकरणीय योग्य होने के कारण कहा जाता है –हरी धातु
113) पूर्वी दक्कन पठान में प्रमुखतया पाए जाते हैं – शुष्क सदाबहार वन
114) ”वाणिज्यिक दृष्टि से लाभप्रद वृक्षों की एकपादप (Monoculture) कृषि …. की अनुपम प्राकृतिक छटा को नष्ट कर रही है। इमारती लकड़ी का विचारशून्य दोहन, ताड़ रोपन के लिए विशाल भूखंडोंका निर्वनीकरण,मैंग्रोवों का विनाश, आदिवासियों द्वारा लकड़ी की अवैध कटाईऔर अनाधिकार आखेट समस्या को अधिक ही जटिल बनाते हैं। अलवण जल कोटरिकाएं (Fresh water pockets) त्वरित गति से सूख रही हैं, क्योंकि निर्वनीकरण और मैंग्रोवों का विनाश हो रहा है” इस उद्धरण में निर्देशित स्थान है – सुंदरवन
115) वर्ष 2004 की सुनामी ने लोगों को यह महसूस करा दिया कि गरान (मैंग्रोव) तटीय आपदाओं के विरूद्ध विश्वसनीय सुरक्षा बाड़े का कार्य कर सकते हैं। गरान सुरक्षा बाड़े के रूप में जिस प्रकार कार्य करते हैं, वह है – गरान के वृक्ष अपनी सघन जड़ों के कारण तूफान और ज्वारभाटे से नहीं उखड़ते
116) चक्रवात अवरोधक के रूप में कार्य करते हैं – मैंग्रोव वन
117) ओडि़शा के केंद्रपाड़ा जिले में ब्राह्मणी, वैतरणी और महानदी डेल्टा क्षेत्र में स्थित है – भितरकनिका गरान
118) यह मैंग्रोव वनों के लिए प्रसिद्ध है। यह एक रामसर स्थल (वर्ष 2002 में घोषित) भी है – भितरकनिका गरान
119) सही कथन हैं – टैक्सस वृक्ष हिमालय में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है, टैक्सस वृक्ष रेड डाटा बुक में सूचीबद्ध है, टैक्सस वृक्ष से ‘टैक्सॉल‘ नाम औषध प्राप्त की जाती है, जो पार्किन्सन रोग के विरुद्ध प्रभावी है।
120) सही कथन है – विश्व वन्य जीवन कोष की स्थापना 1961 में हुई, जुलाई, 2000 में उड़ीसा के नन्दन वन अभ्यारण्य में 13 शेरों की मृत्यु का कारण ट्राइपनासोमिएसिस रोग रहा, भारत का सबसे बड़ा जीवनशाला कोलकाता में अवस्थित है।
121) यूकेलिप्टस वृक्ष को कहा जाता है – पारिस्थितिक आतंकवादी
122) ये उष्ण कटिबंधीय जलवायु क्षेत्रों में पाए जाते हैं। ये मुख्यत: मध्य एवं दक्षिणी अमेरिका के सदाबहार वनों में पाए जाते हैं – स्पाइडर वानर
123) भारतीय प्राणिजात जो संकटापन्न हैं – घडि़याल, चर्मपीठ कूर्म (लेदरबैंक टर्टल) तथा अनूप मृग
124) भारत में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं – ताराकुछुआ, मॉनीटर छिपकली तथा वामन सुअर
125) भारत में पाई जाने वाली नस्ल ‘खाराई ऊँट’ के बारे में अनूठा क्या है –यह समुद्र-जल में तीन किमी तक तैरने में सक्षम है, यह मैंग्रोव (Mangroves) की चराई पर जीता है।
126) ये ऊँट कच्छ (गुजरात) में पाए जाते हैं – खाराई ऊँट
127) इन ऊँटों को संकटग्रस्त प्रजाति (Endangered Species) घोषित किया गया है – खाराई ऊँट
128) ये वन जैव-विविधता के संरक्षक होने के साथ समुद्र और तट के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं और तट को समुद्र की ओर से आने वाली तीव्र लहरों के विनाश से बचाते हैं – मैंग्रोव (Mangroves)
129) अमृता देवी स्मृति पुरस्कार दिया जाता है – वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए
130) विश्व बाघ शिखर सम्मेलन, 2010 आयोजित किया गया था – पीटर्सबर्ग में
131) विश्व का प्रथम बाघ शिखर सम्मेलन (Tiger Summit) सेंट पीटर्सबर्ग (रूस) में आयोजित किया गया था – 21 से 24 नवंबर, 2010 में मध्य
132) नेपाल एवं भारत में वन-जीवन संरक्षण प्रयासों के रूप में ‘सेव’ (SAVE) नामक एक नया संगठन प्रारंभ किया गया है। ‘सेव’ का उद्देश्य है संरक्षण करना – टाइगर का
133) टाइगर के खाल का प्रयोग आसन लगाने एवं सौन्दर्यीकरण के लिए किया जाता है – तिब्बती बौद्धों द्वारा
134) यदि आप हिमलय से होकर यात्रा करते हैं, तो आपको वहां जिन पादपों को प्राकृतिक रूप में उगतेहुए दिखने की संभावना हैं – बांज और बुरूंश
135) चीड़ इन वनों को मुख्य वृक्ष है परंतु अधिक आर्द्रता वाले भागों में बांज या ओक (Oak) जैसे चौड़ी पत्ती वाले वृक्ष देखे जाते हैं – उपोष्ण कटिबंधीय वन
136) प्रत्येक वर्ष कतिपय विशिष्ट समुदाय/जनजाति, पारिस्थितक रूप से महत्वपूर्ण, मास-भर चलने वाले अभियान/त्यौहार के दौरान फलदार वृक्षें की पौध का रोपण करते हैं। वे समुदाय/जनजाति हैं – गोंड कौर कोर्कू
137) भारत के एक विशेष क्षेत्र में, स्थ्ज्ञानीय लोग जीवित वृक्षों की जड़ों का अनुवर्धन कर इन्हें जलधारा के आर-पार सुदृढ़ पुलों में रूपांतरित कर देते हैं। जैसे-जैसे समय गुज़रता है, ये पुल और आधिक और अधिक मज़बूत होते जोते हैं। ये अनोखे ‘जीवित जड़ पुल’ पाए जाते हैं –मेघालय में
138) अगर किसी पेड़ को काटे बिना उससे पुल बना दिया जाए, तो उस पुल को कहते हैं – जीवित पुल या प्राकृतिक पुल
139) भारतीय पशु कल्याण बोर्ड देश में पशुओं के कल्याण को बढ़ावा देने तथा पशु कल्याण कानूनों पर है –एक ‘सांविधिक सलाहकारी निकाय'(Statutory Advisory Body)
140) राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण एक ‘सांविधिक निकाय’ (Statutory Body) – पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत
141) भारत की पहली राष्ट्रीय वन नीति प्रकाशित की गई – 1894 ई. में
142) स्वतंत्र भारत की पहली राष्ट्रीय वन नीति तैयार हुई – वर्ष1952 में
143) देश के एक-तिहाई अथवा 33.33 प्रशितश क्षेत्र में (पहाड़ी क्षेत्रों में दो-तिहाई अथवा 66.67 प्रतिशत क्षेत्र में) वन अथवा वृक्षावरण होने आवश्यक हैं – राष्ट्रीय वन नीति, 1988 के अनुसार
144) जिनका वृक्ष छत्र घनत्व 40-70 प्रतिशत के बीच होता है – मध्यम सघन वन
145) जिनका वृक्ष छत्र घनत्व 10-40 प्रतिशत के मध्य होता है – खुले वन
146) 10 प्रतिशत से कम वृक्ष घनत्व वालीनिम्नस्तरीय वन भूमि को वनावरण में शामिल नहींकिया जाता तथा इन्हें रखते हैं। – झाड़ी (Scrub) की श्रेणी में
147) ISFR-2017 के अनुसार, देश में झाडि़यों का क्षेत्रफल 45.79 वर्ग किमी है, जो कुल भौगोलिक क्षेत्र का है –40 प्रतिशत
148) ISFR-2017 के अनुसार, देश में कुल वनावरण एवं वृक्षावरण देश के कुल भौगोलिक द्वात्र का है –40 प्रतिशत
149) सर्वाधिक वनावरण प्रतिशतता वाला राज्य/संघीय क्षेत्र – लक्षद्वीप
150) सर्वाधिक वनावरण प्रतिशतता वाला राज्य – मिजोरम
151) कुल वृक्षावरण एवं वनावरण क्षेत्र की दृष्टि से सर्वाधिक क्षेत्रफल वाले 5 राज्य – मध्यप्रदेश > अरुणाचल प्रदेश > महाराष्ट्र > छत्तीसगढ़ > ओडिशा
152) इसी दृष्टि से भौगोलिकक्षेत्र के सर्वाधिक प्रतिशत वाले 4 राज्य/संघ्ज्ञीय क्षेत्र – लक्षद्वीप > मिजोरम > अंडमान एवं निकाबार > अरुणाचल प्रदेश
153) ISFR-2017 के अनुसार, क्षेत्रफल की दृष्टि से सर्वाधिक वनावरण वाले 5 राज्य क्रमश: – मध्यप्रदेश,अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा एवं महाराष्ट्र
154) क्षेत्रफल की दृष्टि से सर्वाधिकवनावरण वाले 5 संघीय क्षेत्र क्रमश: – अंडमान एवं निकोबार, दादरा व नगर हवेली, दिल्ली, पुंडुचेरी तथा लक्षद्वीप
155) सर्वाधिक वनावरण प्रतिशतता वाले 5 राज्य/संघ्ज्ञीय क्षेत्र क्रमश: – लक्षद्वीप (90.33%), मिजोरम (86.27%), अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह (81.73%), अरुणाचलप्रदेश (79.96%), तथा मणिपुर (77.69%)
156) सर्वाधिक वनावरण प्रतिशतता वाले भारत के 5 राज्य क्रमश: –मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय तथा नागालैंड
157) न्यूनतम वनावरण क्षेत्र वाले 5 राज्य क्रमश: हैं – हरियाणा, पंजाब, गोवा, सिक्किम एवं बिहार
158) न्यूनतम वनावरण प्रतिशतता वाले भारत के 5 राज्य क्रमश: – हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, गुजरात
159) सर्वाधिक वनावरण प्रतिशतता वाले भारत के 4 संघीय क्षेत्र है क्रमश: – लक्षद्वीप, अंडमान एवं निकोबार, दादरा एवं नगर हवेली तथा चंडीगढ़
160) वृक्षावरण की दृष्टि से ISFR-2017 में सर्वाधिक क्षेत्रफल वाले 5 राज्य क्रमश: – महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात तथा जम्मू एवं कश्मीर
161) न्यूनतम क्षेत्रफल वाले 5 राज्य क्रमश: – सिक्किम, त्रिपुरा, मणिपुर, गोवा एवं नागालैंड
162) भौगोलिक क्षेत्र के प्रतिशत के रूप में सर्वाधिक वृक्षावरण वाले 5 राज्य क्रमश: – गोवा, केरल, गुजरात, झारखंड तथा तमिलनाडु
163) कुल वृक्षावरण एवं वनावरण क्षेत्र की दृष्टि से सर्वाधिक क्षेत्रफल वाले 5 राज्य क्रमश: – मध्यप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा
164) भौगोलिक क्षेत्र के प्रतिशत वाले 4 राज्य/संघीय क्षेत्र क्रमश: – लक्षद्वीप (97.00%), मिजोरम (88.49%), अंडमान एवं निकोबार (82.15%), तथा अरुणाचल प्रदेश (80.92%)
165) ISFR-2017 के अनुसार, देश के पहाड़ी जिलों में कुल वनावरण 283,462 वर्ग किमी है, जो कि इन जिलों के भौगोलिक क्षेत्रफल का –22%
166) ISFR-2017 के अनुसार, देश के 14 भू-आकृतिक क्षेत्रों (Physiographic Zones) में क्षेत्रफल की दृष्टि से सर्वाधिक वृक्षावरण है –मध्य उच्च भूमियों का
167) लवण सहिष्णु वनस्पति समुदाय जो विश्व के ऐसे उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्ण कटिबंधीय अंत:ज्वारीय (Intertidal) क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जहां वर्षा का स्तर 1000-3000 मिमी के मध्य एवं ताप का स्तर 26-350C के मध्य हो – मैंग्रोव (Mangrove)
168) ISFR-2017 के अनुसार, भारत में मैंग्रोव आवरण विश्व की संपूर्ण मैंग्रोव वनस्पति का है – लगभग 3.3 प्रतिशत
169) भारत में सर्वाधिक मैंग्रोव आच्छादित चार राज्य/संघ्ज्ञीय क्षेत्र क्रमश: – पश्चिम बंगाल (2114 वर्ग किमी), गुजरात (1140 वर्ग किमी), अंडमान एवं निकाबार द्वीपसमूह (617 वर्ग किमी) तथा आंध्रप्रदेश (404 वर्ग किमी)
170) चार सर्वाधिक मैंग्रोव आच्छादित जिले क्रमश: – दक्षिण चौबीस परगना-प. बंगाल (2084 वर्ग किमी), कच्छ-गुजरात (798 वर्ग किमी), उत्तरी अंडमान-अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह (425 वर्ग किमी) तथा केंद्रपाड़ा-ओडि़शा (197 वर्ग किमी) हैं।
171) विश्व में मैंग्रोव का सर्वाधिक क्षेत्र – एशिया में
172) उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक वनावरण क्षेत्र वाले जिले – सोनभग्र, खीरी, मिर्जापुर
173) उत्तर प्रदेश में न्यूनतम वनावरण क्षेत्र वालेजिले – संत रविदास नगर, मऊ, संत कबीर नगर एवं मैनपुरी
174) उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक वनावरण प्रतिशत वाले जिले – सोनभद्र, चंदौली, पीलीभीत
175) उत्तर प्रदेश में न्यूनतम वनावरण प्रतिशत वाले जिले – संत रविदास नगर, मैनपुरी, देवरिया
176) उत्तर प्रदेश में कुल वनावरण 14.679 वर्ग किमी हैं, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का है –09 प्रतिशत
177) उत्तर प्रदेश में कुल वृक्षवरण 7.442 वर्ग किमी है, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का है –09 प्रतिशत Environment Notes For Prathmik Shikshak Samvida Varg 3
178) राज्य में कुल वनावरण एवं वृक्षावरण 22.121 वर्ग किमी है, जो कि राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का है –18 प्रतिशत
179) वन क्षेत्र के संदर्भ में शीर्ष 3 देश – रूसी संघ, ब्राजील, कनाडा
180) सर्वाधिक मैंग्रोव आच्छादित राज्य/संघीय क्षेत्र – पश्चिम बंगाल
181) ‘वैश्विक वन संसाधन आकलन’ (GFRA: Global Forest Resources Assessments) के तहत विश्व के वनों एवं उनके प्रबंधन की नियमित निगरानी करता है – संयुक्त राष्ट्र का खाद्य एवं कृषि संगठन(FAO)
182) उत्तराखण्ड राज्य के जिस राष्ट्रीय पार्क को वर्ष 2016 में ‘प्रोजेक्स टाइगर परियोजना’ के अंतर्गत सम्मिलित किया गया – राजा जी राष्ट्रीय पार्क
183) उत्तराखण्ड के जिस वन्यजीव विहार समूह की स्थिति का पश्चिम से पूर्व की ओर का सही क्रम है, वह है –केदारनाथ-नंदा देवी-बिनसर-अस्कोट
184) M-STrIPES शब्द कभी-कभी समाचारों में जिस संदर्भ में देखा जाता है, वह है – बाघ अभ्यारण्यों का रख-रखाव
185) हाल ही में कुछ शेरों को गुजरात के उनके प्राकृतिक आवास से जिस एक स्थल पर स्थानांतरित किए जाने का प्रस्ताव हैं, वह है – कुनो पालपुर वन्यजीव अभ्यारणय
186) पारिस्थितिक दृष्टिकोण से पूर्वी घाटों और पश्चिमी घाटों के बीच एक अच्छा संपर्क होने के रूप में जिसकामहत्व अधिक है, वह है – सत्यमंगलम बाघ आरक्षित क्षेत्र (सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व)
187) झारखण्ड सरकार ने राज्य के विभिन्न वन्यजीव अभ्यारण्यों में वन्यजीव प्रबंधनयोजना शुरूकी है – 10 वर्ष की अवधि के लिए
188) महुआडांर अभ्यारण्य झारखंड के जिस जिले में है, वह है – लातेहार
189) अंतरराष्ट्रीय ‘टाईगर दिवस’ मनायाजाता है – 29 जुलाई को
190) भारत के अधिकांश वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र घिरे हुए हैं – घने जंगलों से
191) भारत में आज ऐसे कितने राष्ट्रीय उद्यान है, जिन्हें देश के वन्य-प्राणियों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है– 103
192) सरकार की ‘बाघ परियोजना’ का उद्देश्य है – भारतीय बाघ को समाप्त होने से बचाना
193) भारतीय टाइगरों को बचाने के लिए प्रोजेक्स टाईगर प्रारंभ किया गया था – वर्ष 1973 में
194) भारती का राष्ट्रीय जैविक उद्यान स्थित है – नई दिल्ली में
195) भारत में स्थापित पहला राष्ट्रीय उद्यान है – जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान
196) राजीव गांधी नेशनल पार्क अवस्थित है – कर्नाटक में
197) पेरियार गेम अभ्यारण्य प्रसिद्ध है – जंगली हाथियों के लिए
198) बेतला राष्ट्रीय पार्क की स्थापना 1986 में हुई थी– तत्कालीन बिहार (वर्तमान झारखंड) में
199) भारत में सबसे बड़ा बाघ आवास पाया जाता है – आंध्रप्रदेश में
200) एशियाटिक बब्बर शेर (Asiatic Lion) का निवास कहां है – गिर वन
201) केवलादेव घाना राष्ट्रीय उद्यान जिसे पूर्व में भरतपुर पक्षी अभयारण्य के नाम से जाना जाता था, भरतपुर (राजस्थान) में स्थित है। यहां की संरक्षित प्रजाति नहीं है – शेर
202) जीवमंडल आरक्षित परिरक्षण क्षेत्र है – आनुवांशिक विभिन्नता के
203) भारत सरकार ने अब तक 18 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रस्थापित किए हैं, जिनमें यूनेस्को ने जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों के विश्व संजाल में सम्मिलित किया है – 10 को
204) भारत के विभिन्न जैव भंडारों में से जो गारो पहाडि़यों पर फैला हुआ है – नोकरेक
205) नंदादेवी जीव मंडल जिस राज्य में स्थित है, वह है – उत्तराखंड
206) ‘विश्व धरोहर’ स्थल (वर्ल्ड हैरिटेज साइट) घोषित है – नंदादेवी जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र
207) भारत के जैव मंडल रिज़र्व की सूवी में हाल ही में (वर्ष 2009 में) जोड़ा गया है – कोल्ड डेजर्ट (शीत रेगिस्तान) को
208) राष्ट्रीय उद्यानकी सीमा रेखा परिभाषित होती है – विधान से
209) वन्य प्राणी अभ्यारण्य में अनुमति होती है – सीमित जीवीय हस्तक्षेप की
210) जिस वर्ग के आरक्षित क्षेत्रों में स्थानीयलोगों को जीवभार एकत्रित करने और उसके उपयोगकी अनुमति नहीं है – राष्ट्रीय उद्यानों में
211) जिस राष्ट्रीय उद्यान/अभ्यारण्य को ‘विश्व प्राकृतिक धराहर’ के नाम से जाना जाता है – केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, भरतपुर
212) हाथी परियोजनाशुरू की गई थी – फरवरी, 1992 में
213) जंगली गदहों का अभ्यारण्य है – गुजरात में
214) एक सींग वाला गैंडा पाया जाता है – काज़ीरंगा
215) गैंडे को पुनर्वासित करने का कार्य जिस राष्ट्रीय उद्यान में चल रहा है, वह है – दुधवा राष्ट्रीय उद्यान
216) उधव पक्षी विहार अवस्थित है – साहेबगंज में
217) उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश व प.बंगालमें से जिसमें सर्वाधिक संख्या में वन्य जीव अभ्यारण्य (नेशनल पार्क और अभ्यारण्य) हैं – मध्यप्रदेश में
218) सर्वाधिक राष्ट्रीय पार्कों की संख्या 9-9 हैं – अंडमान-निकाबार एवं मध्यप्रदेश में
219) साइबेरियन सारस के लिए आदर्श प्राकृतिक निवास है – राजस्थान
220) सरिस्का एवं रणथम्भौर जिस जानवर के लिए संरक्षित हैं – बाघ
221) बाघों का प्रमुख रिज़र्व ‘सरिस्का’ जिस राज्य में अवस्थित है – राजस्थान (अलवर जिला)
222) ‘सलीम अली राष्ट्रीय उद्यान’ स्थित है – जम्मू और कश्मीर में
223) चन्द्रप्रभा वन्य जीव अभ्यारण्य 78 वर्ग किमी क्षेत्रफल में विस्तारित है – उ.प्र. के चंदौली जिले में
224) करेरा वन्य जीव अभ्यारण्य लगभग 202 वर्ग किमी क्षेत्र में स्थित है –म.प्र.के शिवपुरी जिले में
225) 160 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला जयसमंद वन्य जीव अभ्यारण्य स्थित है – राजस्थान के उदयपुर जिले में Environment Notes For Prathmik Shikshak Samvida Varg 3
226) नाहरगढ़ वन्य जीव अभ्यारण्य एक लघु अभ्यारण्य है, जो है – राजस्थान के बारां जिले में
227) भारत के टाईगर रिजर्व में से जो मिज़ोरम में अवस्थित है – दम्फा
228) बाघ आरक्षित क्षेत्रदो राज्यों में विस्तृत है – पेंच
229) व्याघ्र अभ्यारण्य है –कान्हा, रणथम्भौर, बांधवगढ़
230) काजीरंगा जाना जाता है – गैंडा के लिए
231) असम में मानस अभ्यारण्य जाना जाता है – बाघों के लिए
232) बस्तर क्षेत्र में अवस्थित है – इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान
233) मध्य प्रदेश के शहडोल मंडल के उमरिया जिले में स्थित है – बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान
234) दांडेली अभ्यारण्य स्थित है – कर्नाटक में
235) उत्तराखण्ड के तीन जिलों देहरादून, हरिद्वार और पोड़ी गढ़वाल में अवस्थित है – राजाजी राष्ट्रीय उद्यान
236) केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान – भरतपुर
237) महान हिमालयी राष्ट्रीय उद्यान हिमाचल प्रदेश के मुल्लू क्षेत्र में, राजाजी राष्ट्रीय उद्यान उत्त्राखंड के देहरादून, हरिद्वार और पौड़ी गढ़वाल में, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान के भरतपुर जिले में तथा वन विहार राष्ट्रीय उद्यान विस्तारित है – मध्यप्रदेश राज्य के भोपाल जिले में
238) यलोस्थेन नेशनल पार्क स्थित है – संयुक्त राज्य अमेरिका में
239) सागरीय राष्ट्रीय उद्यान है – मन्नार की खाड़ी में
240) यूनेस्को ने जुलाई, 2016 में भारत के जिस राष्ट्रीय उद्यान को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया वह है – कंचनजंगा (खांगचेंग जोंगा) राष्ट्रीय उद्यान
241) कॉर्बेट तथा राजाजी राष्ट्रीय उद्यान में वन्य जीव प्रबंधन हेतु जिस पैमाने के हवाई छाया चित्र उपयुक्त हैं – लघु पैमाने वाले हवाई छाया चित्र
242) एक नेशनल पार्क इसलिएअनूठा है कि वह एक प्लवमान (फ्लोटिंग) वनस्पति से युक्त अनूप (स्वैंप) होने के कारण समृद्ध जैव-विविधता को बढ़ावा देता है –केइबुल लाम्जाओ नेशनल पार्क
243) चमकीले नीले धब्बों के साथ मखमली काले पंखों वाली ब्लू मारमॉन (Blue Mormin) तितली को सर्वप्रथम ‘राज्य तितली’ के रूप में घोषित किया है – महाराष्ट्र ने
244) सदर्न बर्डविंग (Southern Birdwing) भारत की सबसे बड़ी तितली है, जिसे ‘राज्य तितली’ का दर्जा दिया है – कर्नाटक ने
245) यूनेस्को द्वारा ‘मैन एंड बायोस्फीयर प्रोग्राम’ (MAB) की शुरुआत हुई थी – 1971 में
246) ग्रेट हिमालय राष्ट्रीय पार्क जिसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है, स्थित है – हिमाचल प्रदेश में
247) नीलगिरि, नंदादेवी, सुंदरबन तथा मन्नार की खाड़ी में से यूनेस्को द्वारा प्रमाणित (क्षेत्रफल की दृष्टि से) भारत की वृहत्तम जैवमंडलीय निधि है – मन्नार की खाड़ी
248) मेघालय स्थित गारो-खासी रेंज का एक भाग है – गारो पहाडि़यां
249) लोकटक झील भारत में ताजे पानी (मीठा पानी) की सगसे बड़ी झील है, जो स्थित है – मणिपुर में
250) यह पूर्वी हिमालय जैवविविधता हॉट स्पॉट एरिया में सबसेबड़ा संरक्षित क्षेत्र है – नामदफा राष्ट्रीय उद्यान
251) भारत का सोलहवां जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र ‘शीत मरुस्थल’ स्थित है – हिमाचल प्रदेश में
252) पांच मौसमों का बाग स्थित है –महरौली के समीप
253) समस्त विश्व में बाघों की आकलित संख्या 3000-4000 के मध्य है। भारत में बाघों की संख्या (नवीनतम बाघ गणना के अनुसार) आकलित है – 2226
254) जिस राष्ट्रीय उद्यान ने वन्यजीव प्रबंधन के लिए ड्रोन या मानव-रहित हवाई वाहन का उपयोग करना प्रारंभ कर दिया है – बांदीपुर टाइगर रिज़र्व
255) गिर के शेरों को रखे जाने हेतु जिस राष्ट्रीय पार्क/अभ्यारण्य का चयन किया गया है – पालनुर कूनो
256) पालपुर नामक स्थल पर अवस्थित कूनो वन्य जीव अभ्यारण्य (Kuno Wildlife Sanctuary) का एशियाई शेरों के पुनर्प्रवेश स्थल के रूप में चयन किया गया है – श्योपुर(मध्यप्रदेश) जिले में
257) निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए –
258) पूर्वोत्तर भारतके राज्यों में विशेषत: असम में पाए जाते हैं – हुलुक गिबन
259) ‘ग्रेटइंडियन हॉर्नबिल’ अपने प्राकृतिक आवासमें पाए जाने की सबसे अधिक संभावना कहां है –पश्चिमी घाट
260) इसका प्राकृतिक आवास पश्चिमी घाट है। इस पक्षी का वैज्ञानिक नाम ब्यूसेरसबाइकार्निस (Buceros bicornis) है। यह पक्षी एक विशेष प्रकार का घोंसला बनाता है। वनों की कटाई होने से इस पक्षी की प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है – ग्रेड इंडियन हॉर्नबिल
261) भारत का प्रथम तितली उद्यान, बन्नरघट्टा जैविकी उद्यान है, जो स्थितहै – बंगलुरू में
262) अस्कोट वन्य जीव सैंक्चुअरी जिस जनपद में हैं, वह जनपद है – पिथौरागढ़
263) कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान अपना जल प्राप्त करता है – रामगंगा नदी से
264) नेशनल पार्कों में से जिसकी जलवायु उष्णकटिबंधीय से उपोष्ण, शीतोष्ण और आर्कटिक तक परिवर्तित होती है – नामदफा नेशनल पार्क
265) बुक्सा बाघ परियोजनाभारत के किस राज्य में स्थित है, वह है – पश्चिम बंगाल
266) शुक्लाफांटा वन्यजीव अभ्यारण्य स्थित है – नेपाल में
267) कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान से होकर प्रवाहित होती है – रामगंगा एवं कोसी नदियां
268) ब्रम्हपुत्र, दिफ्लु, मोरा दिफ्लु एवं मोरा धनसिरि नदियां प्रवाहित होती है – काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से होकर
269) साइलैंट वैली राष्ट्रीय उद्यान से होकर गुजरती है – कुंतीपुजहा नदी
270) पंजाब प्रांत में व्यास और सतलुज के संगम पर स्थित है – हरिके आर्द्रभूमि
271) राजस्थान प्रांत के भरतपुर में गंभीर और बाणगंगा नदी के संगम पर स्थित है – केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान
272) आंध्रप्रदेश में कृष्णा और गोदावरी नदी के डेल्टा में स्थित ताजे पानी की झील है – कोलेरु झील
273) भारत के सर्वप्रथम एक समुद्री सैंक्चुअरी, जिसकी सीमाओं के अंतर्गत प्रवाल भित्तियां, मोलस्का, डॉल्फिन, कछुएऔर अनेक प्रकार के समुद्री पक्षी हैं, स्थापित किया गया है – कच्छ की खाड़ी में
274) नीलगिरि की ‘मेघ बकरियां’ पाई जाती हैं –इरावीकुलम राष्ट्रीय पार्क में
275) जिसे मिनी काजीरंगा के नाम से भी जाना जाता है – ओरंग अभ्यारण्य-असम
276) चिनार वन्य जीव विहार अवस्थित है – केरल में
277) सुल्तानपुर बर्ड सैंक्चुअरी स्थित है – गुड़गांव (गुरुग्राम) में
278) तमिलनाडु का पक्षीविहार अवस्थित है – कारीकिली में
279) जिस देश में उसके कुल क्षेत्रफल का 30 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र राष्ट्रीय पार्क के अंतर्गत आता है – भूटान Environment Notes For Prathmik Shikshak Samvida Varg 3
280) विश्व का सबसे बड़ा वानस्पतिक उद्यान स्थित है – क्यू (इंग्लैंड) में
281) बुंदाला जीव मंडल आरक्षित क्षेत्र है जो हाल ही में UNESCO के मानव तथा जीव मंडल (मैन एवं बायोस्फियर- MAB) तंत्र में सम्मिलित किया गया है, यह स्थित है – श्रीलंका में
282) ‘सबके लिए सतत ऊर्जा दशक’ पहल है – संयुक्त राष्ट्र संघ की (वर्ष 2014-2024 तक)
283) ‘अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन’ का प्रथम शिखर सम्मेलन संपन्न हुआ – नई दिल्ली में
284) सौ फीसदी सौर ऊर्जा पर चलने वाला भारत का पहला केंद्रशासित प्रदेश है – दीप
285) कभी-कभी समाचारों में दिखाई पड़ने वाले ‘घरेलू अंश आवश्यकता’ (Domestic content Requirement) पद का संबंध जिससे है, वह है – सौर शक्ति उत्पादन के विकास से
286) शैवाल आधारित जैव ईंधन उत्पादन को स्थापित करने और इंजीनियरी करने हेतु निर्माण पूरा होने तक जरूरत होती है – उच्च स्तरीय विशेषज्ञता/प्रौद्योगिकी की
287) ऊर्जा का एक नवीकरणीय स्रोत है – सौर ऊर्जा
288) सौर, पवन, ज्वारीय, पनबिजली ऊर्जा आदि प्राकृतिक संसाधन उदाहरण हैं – नवीकरणीय ऊर्जा के
289) कभी न समाप्त होने वाली तथा प्रदूषणरहित ऊर्जा है – सौर ऊर्जा
290) वैकल्पिक ऊर्जा का सबसे बड़ा संग्रहागार है – सौर ऊर्जा
291) सौर ऊर्जा प्राप्त होती है – सूर्य से
292) जैविक मात्रा में सर्वाधिक उपयोग की जाती है – सौर ऊर्जा
293) सूर्य के प्रकाश को सौर ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है – फोटोवोल्टोइक तकनीक के द्वारा
294) पेट्रोलिय उत्पाद, वन उत्पाद, नाभिकीय विखंडन तथा सौर सेल में से सर्वोत्तम पर्यावरण अनुकूल है – सौर सेल
295) जीवाश्म ईंधन नहीं है – यूरेनियम
296) पौधे के वे उत्पाद जो कि हजारों वर्षों से पृथ्वी के नीचे दबे पड़े थे या पौधे के वे जीवाश्म जिनका उपयोग हम ईंधन के रूप में करते हैं, कहलाते हैं – जीवश्म ईंधन
297) नाभिकीय ऊर्जा उत्पादन हेतु कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त किया जाता है – यूरेनियम
298) परमाणुओं के संयोजन अथवा विखंडन प्रक्रिया द्वारा उत्पन्न की जाती है – नाभिकीय ऊर्जा
299) न्यूनतम पर्यावरणीय प्रदूषण उत्पन्न करता है – हाइड्रोजन
300) हाइड्रोजन के महत्व को देखते हुए भारत में वर्ष 2003 में गठन किया गया है – राष्ट्रीयहाइड्रोजन बोर्ड का
301) वैज्ञानिकों के अनुसार, भविष्य का ईंधन है – हाइड्रोजन
302) ऊर्जा संकट से तात्पर्य है – कोयला तथा पेट्रोल जैसे जीवाश्म ईंधन के समाप्त होनेका खतरा
303) कोयला, खनिज तेल एवं गैस, जल, विद्युत तथा परमाणु ऊर्जा में से भारत में धारणीय विकास के दृष्टिकोण से विद्युत उत्पाद का सबसे अच्छा स्रोतहै – जल विद्युत
304) सौर शक्ति, जैव पुंज शक्ति, लघु जल विद्युतशक्ति तथा अपशिष्ट से अर्जित ऊर्जा में से भारत में जो नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतसर्वाधिक संभाव्यता वाला है – सौर शक्ति
305) जैव-ईंधन के संबंध में निम्न में से कथन सत्य हैं – जैव-ईधन पारिस्थितिकी अनुकूल होता है। जैव-ईंधन ऊर्जा संकट के समाधान में योगदान दे सकता है। जैव-ईंधन मक्का से भी बनता है।
306) बायोडीज़ल की फसल है – जैट्रोफा
307) एथेनॉल एक प्रसिद्ध एल्कोहल है। इसे ‘एथिल एल्कोहल’ भी कहते हैं, इसका प्रयोग होता है – हरति ईंधन के रूप में
308) पाइन, करंज, फर्न से भी किण्वीकरण कर एथेनॉल प्राप्त किया जाता है, इसे शामिल करते हैं – हरित ईंधन स्रोत में
309) जिसकी खेती एथेनॉल के लिए की जा सकती है, वह है – मक्का
310) जोट्रोफा, पौंगामिया और सूरजमुखी की खेतीकी जा सकती है – बायोडीजल के लिए
311) नाभिकीय शक्ति परियोजनाओं के अंतर्गत पर्यावरणीय प्रभाव, जिनका अध्ययन किया जाना तथा हल निकाला जाना है, वे हैं – वायु, मृदा एवं जल का रेडियोधर्मी प्रदूषण, वन अपरोपण तथा पेड़-पौधों एवं जंतु समूह की क्षति, रेडियोधर्मी अपशिष्ट का निस्तारण
312) अंरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance) को प्रारंभ किया गया था – 2015 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में Environment Notes For Prathmik Shikshak Samvida Varg 3
313) कर्क रेखा व मकर रेखा के बीच स्थित 121 देशों का एक समूह है, जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए सूर्य द्वारा प्राप्त ऊर्जा का उपयोग करने हेतु प्रतिबद्ध है – अंरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance-ISA)
314) फरीदाबाद, हरियाणा में है – ISA का सचिवालय
315) ऊष्मा रासायनिक परिवर्तन द्वारा ठोस बायोमास का, दहन योग्य गैस मिश्रण में रूपांतरण ही है – बायोमास गैसीकरण
316) जीवभार गैसीकरण को भारत में ऊर्जा संकट के धारणीय (सस्टेनेबल) हलों में से एक समझा जाता है। इस संदर्भ में कथन सही हैं – नारियल आवरण, मूंगफली का छिलका और धान की भूसी का उपयोग जीवभार गैसीकरण के लिए किया जा सकता है
317) नारियल आवरण, मूंगफली का छिलका और धान की भूसी द्वारा उत्पन्न गैस का उपयोग, बिली पैदा करनेवाले जेनरेटर से जुड़े उपयुक्त रूप से डिजाइन किए गए अंतर्दहन इंजन में कियाजा सकता है – डीजल की जगह
318) बायोगैस में अप्रत्यक्ष रूप से पाई जाती है – सौर ऊर्जा
319) ‘फ्यूल सेल्स‘ (Fuel Cells) जिसमें हाइड्रोजन से समृद्ध ईंधन और ऑक्सीजन का उपयोग विद्युत पैदा करने के लिए होता है, से संबंधित सही कथन है – यदि शुद्ध हाइड्रोजन का उपयोग ईंधन के रूप में होता है,तो फ्यूल सेल उप-उत्पाद (बाइ-प्रोडक्स) के रूप में ऊष्मा एवं जल का उत्सर्जन करता है
320) फ्यूल सेल में एक रासायनिक अभिक्रिया के माध्यम से उत्पादन होता है, न कि दहन (Combustion) के माध्यम से – विद्युत का
321) फ्यूल सेल से विद्युत उत्पादित होती है – दिष्ट धारा (DC) के रूप में
322) सल्फर डाइऑक्साइड के लिए उत्तरदायी है – कोयले में सल्फर की उपस्थिति
323) सूक्ष्म जैविक ईंधन कोशिकाएं (माइक्रोबियल फ्यूल सैल) ऊर्जा का धारणीय (सस्टैनेबल) स्रोत समझी जाती है क्योंकि – ये जीवित जीवों को उत्प्रेरक के रूप में प्रयुक्त कर कुछ सबस्ट्रेटोंसे विद्युतीय उत्पादन कर सकतीहैं। ये विविध प्रकार के अजैव पदार्थ सबस्ट्रेट के रूप में प्रयुक्त करती हैं। ये जल का शोधन और विद्युत उत्पादन करने के लिए अपशिष्ट जल शेधन संयंत्रों में स्थापित की जा सकती हैं।
324) जैव-परिवर्तनीय सबस्ट्रेट में उपलब्ध रासायनिक ऊर्जा को सीधे विद्युतीय ऊर्जा में परिवर्तित कर देती हैं – सूक्ष्म जैविक ईंधन कोशिकाएं (MFC)
325) भारत में संप्रति उपलब्ध प्रौद्योगिक स्तर को देखते हुए सौर ऊर्जाका सुविधा से उपयोग किया जा सकताहै– आवासीय भवनों को गर्म पानी की पूर्ति करने के लिए, लघु सिंचार्ठ परियोजनाओं हेतु जल की पूर्ति करने के लिए, सड़क प्रकाश व्यवस्था के लिए
326) भारत में जैविक डीजल के उत्पादन के लिए जोट्रोफा करकास के अलावा पौंगामिया पिनाटा केा भी क्यों एक उत्तम विकल्प मानाजाता है, क्योंकि – भारत के अधिकांश शुष्क क्षेत्रों में पौंगामिया पिनाटा प्राकृतिक रूप से उगता है। पौंगामिया पिनाटा के बीजों में लिपिड अंश बहुतायतमें होता है, जिसमेंसेलगभग आधा ओलीइक अम्ल होता है।
327) भू-तापीय ऊर्जा स्रोत नहीं पाए गए हैं – गंगा डेल्टा में
328) पृथ्वी की भूपर्पटी में पाए जाने वाले उष्ण जल से प्राप्त होने वाली वह ऊर्जा जिसका उपयोग मानव अपने विभिन्न कार्यों के लिए करता है, कहलाती है – भू-तापीय ऊर्जा
329) भारत में भू-तापीय ऊर्जा स्रोतके प्रमुख क्षेत्र हैं – हिमालय, खंभात बेसिन, सोनाटा (SO-NA-TA : Son-Narmada-Tapti), पश्चिमी घाट, गोदावरी बेसिन और महानदी बेसिन
330) जैव- मूल ऐस्फाल्ट (बायोऐस्फाल्ट) पर मूल सीमाशुल्क की पूरी छूट प्रदान की गई है, इस पदार्थ का महत्व है – पारंपरिक ऐस्फाल्ट के विपरीत, बायोऐस्फाल्ट जीवाश्म ईंधनों पर आधारित नहीं होता। बायोएस्फाल्ट जैव अपशिष्ट पदार्थों से निर्मित हो सकता है। बायोऐस्फाल्ट से सड़कों की ऊपरी सतह बिछाना पारिस्थितिकी के अनुकूल है।
331) बायोऐस्फाल्ट, डामर का विकल्प है जिसका निर्माण नवीकरणीय स्रोतो से किया जाता है– गैर-पेट्रोलियम आधारित Environment Notes For Prathmik Shikshak Samvida Varg 3
332) हवा में तैरते हुए श्वसनीय सूक्ष्म कणों का आकार होता है – 5 माईक्रोन से कम
333) जलवायु एवं स्वच्छ वायु गठबंधन (Climate and clean air coalition : CCAC) विभिन्न देशों, नागरिक समाजों (Civil Societies) व निजी क्षेत्रों का एक वैश्विकप्रयास है जो अल्पजीवी जलवायु प्रदूषकों को न्यूनीकृत कर प्रतिबद्ध है – वायु की गुणवत्ता को बेहतर बनानेहेतु
334) यह प्रकृति में घटित होने वाली जैव निम्नीकरण प्रक्रिया का ही संवर्धन कर प्रदूषण को स्वच्छ करने की तकनीक है – जैवोपचारण (बायोरेमीडिएशन)
335) जैवोपचारण के लिए विशेषत: अभिकल्पित सूक्ष्म जीवों को सृजित करनेके लिए उपयोग किया जा सकता है – आनुवंशिक इंजीनियरी का (Genetic Engineering)
336) मानव-जनित पर्यावरणीय प्रदूषण कहलाते हैं – एन्थ्रोपोजेनिक
337) वे पदार्थ जिनसे प्रदूषण फैलता है, कहलाते हैं – प्रदूषक
338) जैव निम्नीकरणीय रहित प्रदूषक मुख्यतया पर्यावरण में प्रवेश करते हैं – मानव-जनित (एंथ्रोजेनिक) प्रदूषण के कारण
339) जैव-विघटित प्रदूषक हैं – वाहित मल
340) ऐसे प्रदूषक जो सूक्ष्म जीवों जैसे-जीवाणु आदि के द्वारा समय के साथ प्रकृति में सरल, हानिरहित तत्वों में विघटित कर दिए जाते हैं, कहलाते हैं – जैव-विघटित प्रदूषक
341) कोयला, पेट्रोल, डीजल आदि का दहन मूल स्रोत है – वायु प्रदूषण का
342) जब मानवीय या प्राकृतिक कारणों से वायुमंडल में उपस्थित गैसों के निश्चित अनुपात में (विषाक्त गैसों या कणकीय पदार्थों की वजह से) अवांछनीय परिवर्तन हो जाता है, तो इसे कहते हैं – वायु प्रदूषण
343) वायु प्रदूषण के दो स्रोत्र हैं (i) प्राकृतिक स्रोत और (ii) मानवजनित स्रोत। वनाग्नि तथा ज्वालामुखी उद्गार, जैविक पदार्थों के सड़ने-गलने से निकलने वाली गैसें, जैसे- सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), नाइट्रोजन के ऑक्साइड (NOX) इत्यादि आते हैं – प्राकृतिक स्रोत में
344) जैव अपघटनीय प्रदूषक हैं – सीवेज
345) प्रकाश-रसायनी धूम कोहरे के बनने के समय उत्पन्न होता है – नाइट्रोजन ऑक्साइड
346) प्रकाश रासायनिक घूम कोहरा (Smog) शब्द बना है – Smoke और Fog के मिलने से
347) जहां पर अधिक यातायात रहताहै, वहां पर भी गर्म परिस्थितियों तथा तेज सूर्य विकिरण से निर्माण होता है– प्रकाश-रासायनिक धूम्र कोहरे का
348) नाइट्रोजन के ऑक्साइड (NOX), ओजोन (o3) तथा पेरॉक्सीएसीटिलनाइट्रेट से बनता है – प्रकाश-रासायनिक धूम्र कोहरा
349) सूर्य विकिरण वाले क्षेत्रों में या खास मौसम में धूम्र कोहरा अपूर्ण रूप से बनता है। ऐसी वायु को कहते हैं – भूरी वायु
350) प्रकाश-रासायनिक धूम का बनना किनके बीच अभिक्रिया का परिणाम होता है – NO2, O3 तथा पेरॉक्सीऐसिटिलनाइट्रेट के बीच, सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में
351) गर्म, शुष्क और तीव्र सौर विकिरण वाले महानगरों में वायुमंडलीय हाइछ्रोकार्बन और वाहनों व बिजली संयंत्रों से निकलने वाली नाइट्रोजन ऑक्साइड सूर्य के प्रकाशमें अभिक्रिया करके कई सारे द्वितीयक प्रदूषक बनाती है, जैसे- – ओजोन, फॉर्मेल्डिहाइड और पैरॉक्सीएसिटिल नाइट्रेट (PAN) आदि
352) इन अभिक्रियाओं को प्रकाश रासायनिक कहते हैं क्योंकि इनमें दोनों शामिल होते हैं –सूर्य का प्रकाश और रासायनिक प्रदूषक
353) ऑक्सीजन व नाइट्रोजन के मिलने से नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) बनती है। यह गैस वायु से मिलकर नाइट्रोजन डाइ ऑक्साइड (NO2) का निर्माण करती है। (NO2) है – भूरे रंग की तीखी गैस
354) नवजात ऑक्सीजन (Nascent Oxygen) सूर्य के तीव्र प्रकाश की उपस्थिति में ऑक्सीजन के एक अणु (O2) से क्रिया करके बना लेती है – ओजोन (O3)
355) परऑक्सिल मूलक या तो ऑक्सीजन के अणुओं से मिलकर ओजोन (O3) बना लेते हैं अथवा नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) से मिलकर निर्माण करते हैं – पेरॉक्सीएसीटिल नाइट्रेट (PAN) का
356) यह क्लोरोप्लास्ट को नुकसान पहुंचाता है। इस वजह से प्रकाश-संश्लेषण की क्षमता एवं पौधे का विकास कम हो पाता है। यह कोशिका के माइट्रोकॉन्ड्रिया में होने वाले इलेक्ट्रॉन यातायात प्रणाली (Electron Transport Chain-ETC) को बाधित करता है। यह एंजाइम प्रणाली को भी प्रभावित करता है – PAN Environment Notes For Prathmik Shikshak Samvida Varg 3
357) मनुष्यों की आंखों में बहुत ज्यादा जलन या उत्तेजना पैदा करता है – PAN
358) PAN तथा O3 मिलकर छोटी-छोटी बूंदें बना लेते हैं। वायु में मिलकर PAN तथा O3 धुंध बना लेती है। अधिक धूम्र कोहरे (Smog) के निर्माण से घट जाती है- दृश्यता
359) भारी ट्रक यातायात, निर्वाचन सभाएँ, पॉप संगीत, तथा जेट उड़ान में से अधिकतम ध्वनि प्रदूषण का कारण है – जेट उड़ान
360) किसी वस्तु से उत्पन्न सामान्य आवाज को कहते हैं – ध्वनि
361) ध्वनि की इकाई है – डेसीबल (dB)
362) अनियोजित औद्योगिक विकास, अत्यधिक मोटर वाहनों का प्रयोग तथा यांत्रिक दोषयुक्त विभिन्न प्रकार के वाहनों का परिचालन योगदान देते हैं – ध्वनि प्रदूषण करने में
363) ध्वनि की गति से तेज चलने वाले जेट विमानों से उत्पन्न शोर को कहते है – सोनिक बूम (Sonic Boom)
364) सोनिक बूम को व्यक्त किया जाता है – मैक इकाई (Mach Unit) में
365) जो वस्तुएं ध्वनि की रफ्तार से चलती हैं, उनसे उत्पन्न शोर को कहते है – मैक–1
366) सामान्य स्थितियों में वातावरण में प्रदूषण उत्पन्न करने वाली गैस है – कार्बन मोनोऑक्साइड (CO)
367) कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) जो कि रंगहीन (colourless) तथा अति विषैली (Highly Poisonous) होती है – एक प्रमुख प्राथमिक वायु प्रदुषक (Air Pollutant) है
368) CO वायुमंडल में कम समय के लिए रहती है तथा इसका ऑक्सीकरण हो जाता है – CO2 में
369) एक द्वितीयक प्रदूषक नहीं है – सल्फर डाइऑक्साइड
370) वे वायु प्रदूषक जो प्रदूषक स्त्रोत से सीधे वायु में मिलते हैं, कहलाते हैं – प्राथमिक प्रदूषक
371) ऐसे वायु प्रदूषक जो प्राथमिक वायु प्रदूषकों तथा साधारण वातावरणीय पदार्थों की क्रिया के फलस्वरूप उत्पन्न होते हैं, जाने जाते हैं – द्वितीयक वायु प्रदूषक
372) पीएएन (Peroxyacetyl Nitrate), ओजोन तथा स्मॉग (Smog) है – द्वितीयक प्रदूषक
373) सल्फर के ऑक्साइड (मुख्यत: सल्फर डाइऑक्साइड), नाइट्रोजन के ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड हैं– प्राथमिक प्रदूषक
374) अधूरे प्रज्जवलन के कारण मोटर कार एवं सिगरेट से निकलने वाली रंगहीन गैस है – कार्बन मोनोऑक्साइड
375) यह रक्त के हीमोग्लोबिन के साथ क्रिया करके एक स्थायी यौगिक बना लेती है, जिससे हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन को ऊतकों तक नहीं पहुंचा पाता है। यह मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक गैस है – कार्बन मोनोऑक्साइड
376) मोटर वाहनों से निकलने वाली निम्न में से कौन-सी एक मुख्य प्रदूषक गैस है – कार्बन मोनोऑक्साइड
377) वाहनों में पेट्रोल के जलने से धातु वायु को प्रदूषित करती है – लेड
378) इंजन में नॉकिंग (Knocking) रोकने के लिए प्रयुक्त किया जाता है – लेड को
379) बच्चों में दिमाग के विकास में बाधा पहुंचाता है, उनके बुद्धिलब्धि लेवल (Q .) को घटाता है तथा वयस्कों में हृदय व श्वसन संबंधी बीमारियों को उत्पन्न करता है – लेड
380) वायु प्रदूषकों में से जो रक्त धारा को दुष्प्रभावित कर मौत उत्पन्न कर सकता है – कार्बन मोनोऑक्साइड
381) वायु प्रदूषक ऑक्सीजन की अपेक्षा अधिक शीघ्रता से रक्त के हीमोग्लोबिन में घुल जाता है – कार्बन मोनोआक्साइड
382) यह गैस हीमोग्लोबिन अणुओं से ऑक्सीजन की तुलना में 240 गुना से 300 गुना अधिक तेजी से संयुक्त हो जाती है, जिस कारण वायु में पर्याप्त ऑक्सीजन होने पर भी सांस लेने में कठिनाई होती है और घुटन महसूस होने लगती है – कार्बन मोनोऑक्साइड
383) ओजोन, हाइड्रोजन सल्फाइड, कार्बन डाइऑक्साइड तथा कार्बन मोनोऑक्साइड में से जो वायु प्रदूषक सर्वाधिक हानिकारक है, वह है –कार्बन मोनोऑक्साइड
384) भूमिगत जल को दूषित करने वाले अजैविक प्रदूषक हैं – आर्सेनिक
385) भारत में कई जगहों पर भूमिगत जल आर्सेनिक से सेक्रमित होते हैं। यह संक्रमण मुख्यतया प्रकृति में पाए जाने वाले उत्पन्न आर्सेनिक से होता है, जो उत्पन्न होता है – बेडरॉक (Bed Rock) से
386) आर्सेनिक के लगातार संपर्क से बीमारी हो जाती है – ब्लैक फुट
387) विश्व स्वास्थ्य संगठन ( H.O.) के मानक के अनुसार, आर्सेनिक की मात्रा होनी चाहिए –0.05 मिग्रा/लीटर
388) धान का पौधा बेहतर अवशोषक माना जाता है – आर्सेनिक का
389) भू-जल के जरिए आर्सेनिक अनाज में पहुंच रहा है। इससे प्रभावित हो रही है – समूची खाद्य श्रृंखला Environment Notes For Prathmik Shikshak Samvida Varg 3
390) उर्वरक के अत्यधिक प्रयोग से होता है – मृदा प्रदूषण, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण
391) यह प्रदूषण विभिन्न प्रकार के फसलों के माध्यम से मानव एवं पशुओं के आहार श्रृंखला में भी पहुंचता है तथा विभिन्न प्रकार की गंभीर बीमारियों से मनुष्य एवं पशुओं को ग्रस्त करता है – उर्वरक
392) अकार्बनिक पोषक जैसे फॉस्फेट तथा नाइट्रेट घुलकर जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में आ जाते हैं। यह जलीय पारिस्थितिकीतंत्र में बढ़ाते हैं – सुपोषण (Eutrophication) को
393) अकार्बनिक उर्वरक तथा कीटनाशक अवशेष मृदा के रासायनिक गुणों को बदल देते हैं तथा विपरीत प्रभाव डालते हैं – भूमि के जीवों पर
394) औद्योगिक मलबे से सर्वाधिक रासायनिक प्रदूषण होता है – चमड़ा उद्योग से
395) जल प्रदूषण तथा मृदा प्रदूषण के लिए प्रमुख रूप से यही उद्योग उत्तरदायी है – चमड़ा उद्योग
396) अम्ल वर्षा, निम्नांकित द्वारा वायु प्रदूषण के कारण होती है – नाइट्रस ऑक्साइड एवं सल्फर डाइऑक्साइड
397) सामान्यतया ऐसी वर्षा जिसका pH मान 5-6 से कम हो, कहलाती है – अम्ल वर्षा
398) वातावरणीय प्रदूषण, औद्योगिक नि:सृतों एवं प्रकृति में होने वाली विभिन्न क्रियाओं के फलस्वरूप उत्पन्न सल्फर डाइऑक्साइड तथा नाइट्रस ऑक्साइड गैसें वायुमंडल में पहुंचकर, ऑक्सीजन और बादल के जल के साथ रासायनिक अभिक्रिया कर क्रमश: सल्फ्यूरिक अम्ल तथा नाइट्रिक अम्ल बनाकर वर्षा के साथ पृथ्वी पर गिरती हैं। इससे पृथ्वी पर होता है – अम्ल का जमाव
399) अम्लीयता का लगभग आधा हिस्सा वायुमंडल से पृथ्वी पर स्थानांतरित होकर जमा होता है – शुष्क रूप में
400) मरूस्थलीय क्षेत्र में शुष्क से आर्द्र निक्षेप का अनुपात उच्च रहता है, क्योंकि वहां पर ज्यादा होता है – शुष्क जमाव
401) अम्लीय वर्षा, अम्लीय कोहरे और अम्लीय धुंध को सम्मिलित रूप से कहा जाता है – अम्ल निक्षेप
402) अम्ल वर्षा के लिए उत्तरदायी गैसें हैं – नाइट्रस ऑक्साइड एवं सल्फर डाइऑक्साइड
403) उद्योगों एवं यातायात के उपकरणों से निस्सृत नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) तथा सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) जैसी गैसें वायुमंडल में स्थित जलवाष्प से प्रतिक्रिया करके सल्फ्यूरिक तथा नाइट्रिक अम्ल बनाती हैं और ओस अथवा वर्षा की बूंदों के रूप में पृथ्वी पर गिरने लगती हैं। यही कहलाती है – अम्ल वर्षा
404) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सल्फर के उत्सर्जन में कमी का प्रयास किया जा रहा है – हेलसिंकी प्रोटोकॉल (1985) के तहत
405) मथुरा की तेलशोधनशालाओं से उत्सर्जित SO2 से उत्पन्न अम्ल वर्षा, क्षति पहुंचा रही है – ताजमहल के सौंदर्य को
406) ताजमहल पर अम्ल वर्षा से जनित हानिकारक प्रभाव को रोकने के लिए भारत सरकार दवारा विकसित किया गया है – ताज ट्रेपिजियम( Taz trapzium) जोन
407) SO2 को कैकिंग गैस (Cracking Gas) भी कहते हैं, क्योंकि यदि लगातार यह पत्थर पर प्रवाहित की जाए, तो पत्थर हो जाता है – क्षत-विक्षत
408) अधिक अम्लता के कारण अम्ल वर्षा के हाइड्रोजन आयन एवं मृदा के पोषक धनायन (यथा K+ एवं mg++) के बीच आदान-प्रदान होता है। इसके फलस्वरूप पोषक तत्वों का निक्षालन (Leaching) हो जाता है एवं समाप्त हो जाती है – मृदा की उर्वरता
409) अम्ल वर्षा में वे प्रदूषक जो वर्षा जल एवं हिम को प्रदुषित करते हैं – सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड
410) अम्ल वर्षा होती है – बादल के जल एवं सल्फर डाइआक्साअड प्रदूषकों के मध्य प्रतिक्रिया के फलस्वरूप
411) शंकुधारी वृक्षों के घने कैनौपी में पत्तियों के भूरे रंग के लिए उत्तरदायी होता है – अम्ल वर्षा का निक्षेप
412) अम्ल वर्षा कम हो जाता है – मृदा के pH का मान
413) अम्ल वर्षा जहरीली धातुओं को उनके प्राकृतिक रासायनिक यौगिकों से टूटने में मदद करती है। ये धातु पीने योग्य जल एवं मृदा में प्रवेश कर दुष्प्रभाव डालते हैं – बच्चों के तंत्रिका तंत्र पर
414) वर्षा के पानी में घुलने से वर्षा का पानी अम्लीय (अम्ल वर्षा) हो जाता है – सल्फर ऑक्साइड के कारण
415) एक वायु प्रदूषक गैस है और जीवाश्म ईंधन के ज्वलन स्वरूप उत्पन्न होती है –सल्फर डाइऑक्साइड
416) वायु प्रदूषण से संबंधित नहीं है – युट्रोफिकेशन
417) जल में जब जैविक तथा अजैविक दोनों प्रकार के पोषक तत्वों की वृद्धि हो जाती है, तो इस घटना को कहते हैं – सुपोषण
418) अत्यधिक पोषकों की उपस्थ्िति में शैवालों का विकास तेजी से होने लगता है। इसे कहते हैं – शैवाल ब्लूम (Algal BIoom)
419) एस्बेस्टस फाइबर से घिरे वातावरण में ज्यादा देर रहने से हो जाता है – एस्बेस्टोसिस
420) ‘फ्लाई ऐश’ एक प्रदूषक दहन उत्पाद है, जो जलाने से प्राप्त होता है – कोल (पत्थर के कोयले) को Environment Notes For Prathmik Shikshak Samvida Varg 3
421) कोल के दहन से उत्पन्न प्रदूषक है – फ्लाई ऐश (Fly ash)
422) कोयला आधारित ताप विद्युत घरों से उत्पन्न होने वाले इस सूक्ष्म पाउडर से जीवों में होते हैं – श्वशन संबंधी रोग
423) जिसे वायु में मिलने से रोकने के लिए इलेक्ट्रोस्टेटिक अवक्षेपक (Electrostatic Prescipitator) या अन्य कण निस्यंदन उपकरणों का प्रयोग किया जाता है – फ्लाई ऐश
424) ‘ग्रीन मफ्लर’ संबंधित है – ध्वनि प्रदूषण से
425) विशालकाय हरे पौधे अधिक ध्वनि प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रोपित किए जाते हैं क्योंकि उनमें ध्वनि तंरगों को अवशोषित करने की क्षमता होती है। ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने वाले ये हरे पौधे कहलाते हैं – ग्रीन मफ्लर
426) भोपाल गैस त्रासदी (मिथाइल आइसोसाइनेट- ‘मिक’ रिसाव) की घटना हुई थी – 3 दिसंबर, 1984 को
427) भोपाल मे यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से जो गैस रिस गई थी, वह थी – मिथाइल आइसोसायनेट
428) भोपाल गैस त्रासदी में जिस गैस के रिसने पर बड़े पैमाने पर मृत्यु हुई – एम.आई.सी.
429) भोपाल गैस त्रासदी में संबंधित यौगिक का नाम था – मेथाइल आइसोसायनेट
430) पॉलिथीन की थैलियों को नष्ट नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे बनी होती हैं – पॉलीमर से
431) मूलत: कार्बन एवं हाइड्रोजन के अणुओं के मिलने से बनता है। यह एथिलीन C2 H4 का पॉलीमर (बहुलक) होता है – पॉलिथीन
432) इसकी खोज 1953 ई. इटली के रसायनशास्त्री गिलियो नत्ता और कार्ल जिगलर (जर्मनी) ने की। इन्होंने सर्वप्रथम देखा कि कार्बन एवं हाइड्रोजन के कण आपस में एक श्रृंखला बनाते हैं तथा एकल बन्ध एवं द्विबन्ध के रूप में स्थापित हो जाते हैं। इस खोज के लिए गिलियो नत्ता एवं कार्ल जिगलर को 1963 ई. में रसायन का नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ – पॉलिथीन की
433) वस्तु जो जीवाणुओं से नष्ट नहीं होती – प्लास्टिक
434) जैव-निम्नीकरणीय है – रबर
435) वे पदार्थ जो जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटित हो जाते हैं, कहलाते हैं – जैव-निम्नीकरणीय
436) सिगरेट का टुकड़ा, चमड़े का जूता, फोटो फिल्म तथा प्लास्टिक का थैला में से जिसके क्षय होने में सबसे अधिक समय लगता है – प्लास्टिक का थैला
437) वायु प्रदूषण के जैविक सूचक का कार्य करता है – लाइकेन
438) शैवाल तथा कवक के द्वारा होता है – लाइकेन का निर्माण
439) वायु प्रदूषण का सबसे अधिक प्रभाव लाइकेन पर पड़ता है क्योंकि ये होते हैं, बड़े – संवेदनशील
440) प्रदूषण संकेतक पौधा है – लाइकेन
441) लाइकेन्स सबसे अच्छे सूचक हैं – वायु प्रदूषण के
442) जैविक ऑक्सीजन आवश्यकता (बी.ओ.डी़.) एक प्रकार का प्रदूषण सूचकांक है – जलीय वातावरण में
443) बीओडी का अधिक होना, दर्शाता है – जल के संक्रमित होने को
444) कार्बनिक अपशिष्ट (जैसे-सीवेज) की मात्रा बढ़ने से अपघटन की दर बढ़ जाती है तथा O2 का उपयोग भी इसी के साथ-साथ बढ़ जाता है। इसके फलस्वरूप मात्रा घट जाती है – घुली ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen-DO) की
445) कुछ ही सहनशील प्रजातियों के जीव तथा कुछ कीटों के डिंब ही बहुत अधिक प्रदूषित तथा कम DO वाले जल में जीवित रह सकते हैं, जैसे – ऐनेलीड
446) जिस जलाशय के DO का मान 0 mgL-1 से नीचे हो जाता है। उसे रखा जाता है – संक्रमित(Contaminated) जल की श्रेणी में
447) किसी जल क्षेत्र में बी. ओ. डी. की अधिकता संकेत देती हे कि उसका जल – सीवेज से प्रदूषित हो रहा है
448) नदी में जल प्रदूषण के निर्धारण के लिए घुली हुई मात्रा मापी जाती है – ऑक्सीजन की
449) गंगा नदी में बी. ओ. डी. सर्वाधिक मात्रा में पाया जाता है – कानपुर एवं इलाहाबाद के मध्य
450) जैव उपचारण (Bio-remediation) से तात्पर्य है – जीवों द्वारा पर्यावरण से विषैले (Toxic) पदार्थों का निष्कासन
451) इसके द्वारा किसी विशेष स्थान पर पर्यावरणीय प्रदूषकों के हानिकारक प्रभाव को समाप्त किया जा सकता है। यह जैव रासायनिक चक्र के माध्यम से कार्य करता है – जैव-उपचारण (Bio-remediation) Environment Notes For Prathmik Shikshak Samvida Varg 3
452) जैवोपचार यदि प्रदूषण प्रभावित क्षेत्र में किया जाता है, तो इसे कहा जाता है – स्व-स्थाने जैवोपचार (In-Situ Bio-remediation)
453) यदि प्रदूषित पदार्थ को किसी अन्य जगह पर ले जाकर इस तकनीक का प्रयोग किया जाता है, तो इसे कहते हैं – बाह्य-स्थाने जैवोपचार (Ex-Situ Bio-remediation)
454) प्रदूषकों को जड़ों व पत्तियों में संगृहीत कर जैवोपचार की क्रिया करना कहलाता है – फाइटोनिष्कर्षण (phytoextraction)
455) जल प्रदूषक नहीं है – सल्फर डाइऑक्साइड
456) आर्सेनिक द्वारा जल प्रदूषण सर्वाधिक है – पश्चिम बंगाल में
457) भारत के गंगा-ब्रह्मपुत्र के मैदानी इलाकों तथा बांग्लादेश के पद्मा-मेघना के मैदानी इलाकों में भूमिगत जल अत्यधिक प्रदूषित है – आर्सेनिक प्रदूषण से
458) भारत के सात राज्यों- पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, असम, मणिपुर तथा छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में भूमिगत जल अत्यधिक प्रभावित है – आर्सेनिक प्रदूषण से
459) भूजल में आर्सेनिक की अनुमेय सीमा है – 10 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तक
460) चेर्नोबिल दुर्घटना संबंधित है – नाभिकीय दुर्घटना से
461) रूस में चेर्नोबिल (Chernobyl) स्थित परमाणु केंद्र में नाभिकीय दुर्घटना हुई थी – 26 अप्रैल, 1986 को
462) विघटित होते रेडियोएक्टिव न्यूक्लाइड्स से उत्पन्न होने वाला विकिरण स्रोत है – रेडियोएक्टिव प्रदूषण का
463) विकिरणों के प्रभाव से जीवों के आनुवंशिक गुणों पर भी पड़ता है – हानिकारक प्रभाव
464) जैवीय रूप से अपघिटत होता है – मल
465) स्वचालित वाहन निर्वातक का सबसे अविषालु धातु प्रदूषक है – लेड
466) स्वचालित वाहनों में एन्टीनॉकिंग एजेंट के रूप में प्रयोग किया जाता है – लेड (सीसा) का
467) केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, मस्तिष्क, पाचन तंत्र इत्यादि प्रभावित होते हैं – लेड के कारण
468) पेयजल में कैडमियम की अधिकता से हो जाता है – इटाई-ईटाई रोग
469) पारा (मरकरी) युक्त जल पीने से हो जाता हे – मिनामाटा रोग
470) वर्ष 1987 से इस अधिनियम में ध्वनि प्रदूषण को भी शामिल कर लिया गया है – वायु प्रदूषण एवं नियंत्रण अधिनियम, 1981 के तहत
471) भारत का सर्वाधिक प्रदूषित नगर है – अंकलेश्वर
472) जनवरी माह में उत्पन्न मौसमी कारक था जो उत्तर भारत में असाधरण ठंड का कारण बना – ला नीना
473) अपने प्रदूषकों के कारण ‘जैविक मरूस्थल’ कहलाती है – दामोदर
474) सरसों के बीच के अपमिश्रक के रूप में सामान्यत: निम्नलिखित में से किसे प्रयोग में लाया जाता है – आर्जीमोन के बीज
475) आर्जीमोन मैक्सिकाना मेक्सिको में पाई जाने वाली पोस्ते की एक प्रजाति है। सरसों के तेल में इसकी मिलावट से महामारी फैल सकती है – ड्रॉप्सी नामक
476) प्रदूषण युक्त वायुमंडल को स्वच्छ किया जाता है – वर्षा द्वारा
477) भारत के समुद्री जल में हानिकारक शैवाल प्रस्फुटन में हो रही वृद्धि पर चिंता व्यक्त की गई है। इस संवृत्ति का/के क्या कारक तत्व हो सकता है/सकते हैं – ज्वारनदमुख से पोषकों का प्रस्राव, मानसून में भूमि से जलवाह, समुद्रों में उत्प्रवाह
478) ‘एशियाई भूरा बादल’ (Asian Brown Cloud) 2002 अधिकांशत: फैला था – दक्षिण एशिया में Environment Notes For Prathmik Shikshak Samvida Varg 3
479) ‘एशियाई ब्राउन क्लाउड’ या एशियाई भूरा बादल उत्पन्न होता है – वायु प्रदूषण के कारण
480) एक रंगहीन, गंधहीन रेडियोएक्टिव अक्रिय गैस है – रेडान
481) फेफड़े का कैंसर (Lung Cancer) तथा रक्त कैंसर होने की संभावना होती है – रेडान गैस से
482) घरेलू गतिविधियों के कारण उत्पन्न होने वाले प्रदूषण को कहा जाता है – घरेलू वायु प्रदूषण
483) WHO के अनुसार, प्रतिवर्ष लाखों लोगों की मृत्यु होती है – घरेलू वायु प्रदूषण के कारण
484) सिगरेट के धुएं में मुख्य प्रदूषक है – कार्बन मोनोऑक्साइड व बैन्जीन
485) शरीर में श्वास अथवा खाने से पहुंचा सीसा (लेड) स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। पेट्रोल में सीसे का प्रयोग प्रतिबंधित होने के बाद से अब सीसे की विषाक्तता उत्पन्न करने वाले स्रोत हैं – प्रगलन इकाइयां,पेंट
486) घरों में पुताई के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पेंट में असुरक्षित स्तर तक है – सीसे की मात्रा
487) मनुष्य के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क को नुकसान पहुंच सकता है – सीसे की अधिक मात्रा से
488) ऐेस्बेस्टस जहरीला पदार्थ है, इसकी धूल से हो सकता है – फेफड़े का कैंसर
489) पारे की विषाक्तता से उत्पन्न होती हैं – उदर संबंधी समस्याएं
490) रक्त में घुलकर कोशिकीय श्वसन को बाधित करती है तथा यह हृदय को क्षति पहुंचाती है – कार्बन मोनोऑक्साइड
491) मानव शरीर में कैंसर उत्पन्न कर सकते हैं – नाइट्रोजन के ऑक्साइड
492) भारत में इस्पात उद्योग द्वारा मुक्त किए जाने वाले महत्वपूर्ण प्रदूषकों में चारों ही शामिल हैं – कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), सल्फर के ऑक्साइड (SOX), नाइट्रोजन के ऑक्साइड (NO X) तथा कार्बन डाइऑक्साइड (CO2)
493) ऑक्सीजन की सीमित आपूर्ति में कार्बन के ऑक्सीकरण से कार्बन मोनोऑक्साइड उत्पन्न होती है – वात्या भट्टी (Blast Furnace) में
494) अम्ल वर्षा से वे देश जो सर्वाधिक प्रभावित होते हैं – कनाडा, नार्वे
495) जर्मनी तथा यूनाइटेड किंगडम में स्थित मिलों से उत्सर्जित SO 2 तथा नाइट्रोजन के ऑक्साइड के कारण में अधिक वर्षा होती है – नार्वे तथा स्वीडन में
496) अम्ल वर्षा को कहा जाता है – झील कातिल (Lake Killer)
497) चीन, जापान, नार्वे तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में से जिस देश में सर्वाधिक अम्लीय वर्षा होती है – नार्वे में
498) अंतरराष्ट्रीय अम्ल वर्षा सूचना केंद्र स्थापित किया गया है – मैनचेस्टर में
499) उत्सर्जन उष्मीय शक्ति संयंत्रों में कोयला दहन से उत्सर्जित होता है/होते हैं – कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), नाइट्रोजन के ऑक्साइड (N2O), सल्फर के ऑक्साइड (SO2)
500) ईधन के रूप में कोयले को उपयोग करने वाले शक्ति संयंत्रों से प्राप्त ‘फ्लाई ऐश’ के संदर्भ में सही कथन हैं– फ्लाई ऐश का उपयोग भवन निर्माण के लिए ईंटों के उत्पादन में किया जा सकता है, फ्लाई ऐश का उपयोग कंक्रीट के कुछ पोर्टलैंड सीमेंट अंश के स्थापन्न (रिप्लेसमेंट) के रूप में किया जा सकता है
501) कोयला आधारित विद्युत संयंत्रों से विघुत उत्पादन के फलस्वरूप उपोत्पाद (By Product) के रूप में प्राप्त होता हैं – फ्लाई ऐश
502) यह सूक्ष्म पाउडर होता है, जो वायु के साथ दूर तक यात्रा करता है। इसमें सीसा, आर्सेनिक, कॉपर जैसी जहरीली भारी धातुओं के कण भी होते हैं – फ्लाई ऐश में
503) अनाजों और तिनहनो के अनुपयुक्त रखरखाव और भंडारण के परिणामस्वरूप आविषों का उत्पादन होता है, जिन्हें एफ्लाटॉक्सिन के नाम से जाना जाता है, जो सामान्यत: भोजन बनाने की आम विधि द्वारा नष्ट नहीं होते। जिसके द्वारा उत्पादित होते हैं, वह है – फफूंदी
504) मुख्यतया, एस्पर्जिलस फ्लेवस (Aspergillus flavus) के द्वारा उत्पन्न होता है। – एफ्लाटॉक्सिन (Aflaoxin)
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