जानिए कौन हैं राकेश टिकैत | Rakesh Tikait का जीवन परिचय हिंदी में

Rakesh Tikait Wikipedia in Hindi : किसान आंदोलन के हीरो माने वाले जाने राकेश टिकैत इन दिनों सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा छाए हुए हैं। अब हर किसी के मन में एक सवाल जरूर उठ रहा है कि राकेश टिकैन (Rakesh Tikait) कौन हैं? आज इसी सवाल का जवाब देने के लिए आज हम यह पोस्ट लिख रहे हैं, जिसमें आपको राकेश टिकैत का जीवन परिचय, उनके पिता महेंद्र सिंह टिकैत और उनके संघर्ष की कहानी विस्तार से बताएंगे।

Rakesh Tikait Wikipedia in Hindi
स्त्रोत : ट्वीटर


दोस्तों 26 जनवरी को दिल्ली के लाल किले पर हुई हिंसा के बाद अगर आज किसान आंदोलन दोबारा से अपने खड़ा हुआ है तो उसके पीछे सबसे बड़ा कारण राकेश टिकैत हैं, जो भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। उनकी एक हुंकार से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और यूपी से लाखों की संख्या में किसान दोबारा से दिल्ली में एकत्र हो गए हैं और आंदोलन दोबारा से रंग में आ गया है।

भारतीय किसान यूनियन एक ऐसा किसान संगठन है, जिसकी पहचान पूरे देश में है और इसके अध्यक्ष राकेश टिकैत के बड़े भाई नरेश टिकैत हैं। लेकिन व्यवहारिक तौर पर यूनियन से जुड़े फैसले राकेश टिकैत ही लेते हैं। राकेश टिकैत एक बड़े किसान नेता होने के साथ-साथ भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष रहे स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत के दूसरे बेटे हैं।

कौन है राकेश टिकैत?


राकेश टिकैत एक बहुत बड़े किसान नेता हैं। जिनकी एक हुंकार पर पूरे देश के किसान उनके साथ खड़े हो जाते हैं। किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के दूसरे बेटे राकेश टिकैत के पास इस वक्त भारतीय किसान यूनियन की कमान है और यह संगठन उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के साथ-साथ पूरे देश में फैला हुआ है।

राकेश टिकैत का जन्म मुजफ्फरनगर जनपद के सिसौली गांव में 4 जून 1969 को हुआ था। उन्होंने मेरठ यूनिवर्सिटी से एम.ए. की डिग्री प्राप्त की और 1992 में दिल्ली में बातौर कांस्टेबल के पद नौकरी ज्वाइन की। लेकिन 1993-1994 में दिल्ली के लाल किले पर स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में चल रहे किसानों के आंदोलन के दौरान राकेश टिकैत ने दिल्ली पुलिस की नौकरी छोड़ दी और भारतीय किसान यूनियन के सदस्य के रूप में विरोध में शामिल हो गए।

दिल्ली पुलिस की नौकरी छोड़ने के बाद राकेश टिकैत ने भारतीय किसान यूनियन के साथ किसानों की लड़ाई में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। पिता महेंद्र सिंह टिकैत की कैंसर से मृत्यु के बाद राकेश टिकैत ने पूरी तरह से भारतीय किसान यूनियन की कमान संभाल ली।

नरेश टिकैत बने भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष


स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत बालियान खाप से आते थे और उनकी खाप के नियम अनुसार बड़े बेटे को ही मुखिया बनाया जा सकता है। इसलिए महेंद्र सिंह टिकैत की मृत्यु के बाद उनके बड़े बेटे नरेश टिकैत को भारतीय किसान यूनियन का अध्यक्ष बनाया गया। लेकिन व्यवहारिक तौर पर यूनियन से जुड़े फैसले राकेश टिकैत ही लेते हैं। इसलिए राकेश टिकैत को बीकेयू का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया और जिसकी जिम्मेवारी वह बाखूबी निभा रहे हैं।

राकेश टिकैत का विवाह और बच्चे


राकेश टिकैत का विवाह 1985 में बागपत जनपद के दादरी गांव की सुनीता देवी के साथ हुआ था। उनके घर एक बेटा चरण सिंह और दो बेटियां सीमा व ज्योति हैं। राकेश टिकैत से सभी बच्चों का विवाह हो चुका है।

कैसे बनी भारतीय किसान यूनियन


भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) की नींव 1987 में उस वक्त रखी गई थी, जब बिजली के दाम को लेकर किसानों ने शामली जनपद के करमुखेड़ी में महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में एक बड़ा आंदोलन किया था। जिसमें दो किसान जयपाल और अकबर पुलिस की गोली लगने से मारे गए थे। उसके बाद भारतीय किसान यूनियन का गठन किया गया था। जिसका अध्यक्ष स्वर्गीय चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को बनाया गया।

15 मई 2011 को लंबी बीमारी के चलते महेंद्र सिंह टिकैत के निधन के बाद उनके बड़े बेटे नरेश टिकैत को पगड़ी पहनाकर भारतीय किसान यूनियन का अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद छोटे बेटे राकेश टिकैत को यूनियन का राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया गया। बताया जाता है कि महेंद्र सिंह टिकैत के चार बेटे थे, दो यूनियन के साथ जुड़े हैं, जबकि दो अन्य काम करते हैं।

राजनीति में फेल हो चुके राकेश टिकैत


राकेश टिकैत ने दो बार राजनीति में भी आने की कोशिश की, लेकिन उन्हें निराशा का ही सामना करना पड़ा। पहली बार 2007 में राकेश ने मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था और उसके बाद 2014 में अमरोहा जनपद से राष्ट्रीय लोक दल पार्टी से लोकसभा का चुनाव भी लड़ा, लेकिन दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

किसान विरोधी बिल के खिलाफ आंदोलन की जान बने राकेश टिकैत

Rakesh Tikait Wikipedia in Hindi
स्त्रोत : ट्वीटर

2020 में राकेश टिकैत दिल्ली में चल रहे किसान विरोधी बिल के रोष में आंदोलन कर रहे हैं। पिछले दो महीने से वह लाखों की संख्या में किसानों के साथ गाजीपुर बॉर्डर पर कमान संभाले हुए हैं। लेकिन दिल्ली लाल किले पर 26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद जहां एक बाद एक बार पूरा देश किसानों के विरोध में खड़ा हो गया था तो उस समय राकेश टिकैत ने एक ऐसी हुंकार भरी कि आंदोलन में फिर से जान फूक दी।

राकेश टिकैत के आह्वान पर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पूरे देश से किसान बड़ी संख्या में दिल्ली बॉर्डर पर पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक मोदी सरकार कानून रद्द नहीं करेगी, तब तक आंदोलन इसी प्रकार से जारी रहेगा, फिर चाहे उन्हें अपनी जान ही क्यों न देनी पड़े। उनका नारा : किसान मजदूर एकता जिंदाबाद

दोस्तों कैसे लगा आपको राकेश टिकैत का जीवन परिचय। अब आप इसे पढ़ने के बाद यह तो जान गए हैं कि कौन है राकेश टिकैत। अगर आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी पसंद आए तो कृप्या इसे आगे जरूर शेयर करें। धन्यवाद.

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