Story in hindi karj to chukana hoga kahani | hindi kahani

यह एक life of pie है इस story में ऐसे व्यक्ति की है जिसको अपने वंस की चिंता में किस तरह की मुसीबतो का सामना करना पड़ा इस 


the sun is rising a man is standing in the river
(Photo credit: OMKAR NAIDU from Pexels) 

बात बहुत पहले की है एक गांव की life of pie जिसमे एक विद्वान ब्राह्मण रहते थे उन्हें कोई औलाद न थी वो परेशान थे कि मेरी वंश कैसे आगे चलेगा। इसी चिन्तन में ब्राह्मण काफी कमजोर हो चुके थे।

तो एक दिन निराश होकर ब्राह्मण घर से निकल जाते है और एक घने जंगल मे पहुचते है सोचते है कि मेरे घर का क्या हालत होगा, मगर उन्हें मूल चिंतन वंश की रहती है ।

इसी चिंतन में वो सो जाते है उन्हें स्वप्न में बहुत ही सुंदर लड़का दिखाई पड़ता है पूर्णतः सफेद वस्त्र पहने उन्हें लगता है ये कोई बहुत बड़ी आत्मा है। वो सुंदर बालक बोलता है ब्राह्मण क्यो चिंता कर रहे है,आप जहाँ है वहाँ से एक किलोमीटर दूर एक पेड़ है उस पेड़ पे फल लगा है उसे लेकर घर जाइये आप की मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी।

वह ब्राह्मण उस पेड़ की तलाश में निकल जाता है तकरीबन एक किलोमीटर दूर जाते है तो एक बहुत विशाल कदम का वृक्ष दिखाई देता है, लेकिन उस वृक्ष में कोई फल नही था। फिर भी वो सोचे चलो फल नही तो कम से कम वही बैठकर आराम करुगा और अपने प्रभु का स्मरण भी करूँगा।

यही सोच कर वह वहा  वृक्ष का सहारा ले कर बैठ जाते है फिर उन्हें हल्की सी नीद आ जाती है फिर स्वप्न में वही सुंदर बालक आता है और बोलता है ब्राह्मण आपके पास में ही फल है उठा लीजिये और घर को प्रस्थान कीजिये तभी ब्राह्मण की नीद खुल जाती है और पास में कदम का फल नजर आता है और वो लेकर घर को चल देते है।

जब ब्राह्मण गांव के पास पहुचते है तो एक छोटा सा बालक आया और बोला ब्राह्मण आप कहा चले गये थे, गांव में ना कोई पूजा करने वाला था और ना ही इस गांव में कोई शुभ कार्य होता था। 

आपकी पत्नी की बहुत हालत खराब हो गयी है आप जल्दी से घर जाइये, ये सुनते ही ब्राह्मण घर की तरफ भागते है। भागे भागे जब ब्राह्मण घर पहुचे तो देखे कि पत्नी की तबियत काफी खराब थी फिर वैद्य जी को बुलाये और इलाज शुरू किए। पूजा पाठ करने लगे कि उनकी पत्नी जल्दी ठीक हो जाये। तीन चार दिन में ब्राह्मण के पत्नी की तबियत ठीक हो गयी।

ब्राह्मण ने अपनी पत्नी को जंगल की सारी बात बताई और कदम का फल उन्हें खाने को दिया।

कुछ ही समय बाद ब्राह्मण के घर एक सुन्दर बालक का जन्म होता है। वो बालक बहुत ही होनहार और ज्ञानी था धीरे धीरे वो बालक बड़ा हुआ और ब्राह्मण के कार्य मे हाथ बटाने लगा।

उस बालक को गांव के सभी लोग बहुत प्रेम करते थे वो था भी ऐसा की सबका मन मोह लेता था। एक दिन ब्राह्मण के एक कार्य के चलते वो शहर जाता है और वहा से कार्य को सम्पूर्ण कर अपने घर की ओर निकल पड़ता है।

जब वह अपने गांव के पास पहुचता है तभी उसे सांप काट लेता है और वो वही गिर जाता है।

उसके गांव के कुछ लकड़हारे उसे जमीन पर पड़ा देकते है तो उसके पास जाते है और पहचान जाने पर उसे उठा के वैद्य के यहां ले जाते है और ब्राह्मण को खबर करने एक लोग जाते है जब तक गांव वाले जाकर ब्राह्मण से बोलते है और ब्राह्मण को वैद्य के यहां पहुचने से पहले ब्राह्मण के बेटे का शरीर प्राण छोड़ देता है।

ब्राह्मण की पत्नी को यह खबर लगती है तो वह पीड़ा बर्दास्त नही कर पाती वो भी दम तोड़ देती है। अब ब्राह्मण के सिर पे आसमान टूट पड़ा वो अब किसी से कुछ नही बोलते बस चुप हो जाते है ।

वह दोना माँ और बेटे की अंतिम यात्रा के बाद वह जंगल की तरफ चले जाते है। और उसी कदम के वृक्ष के पास बैठ कर भगवान की कठिन तपस्या शुरू कर देते है। 

तकरीबन पांच साल तपस्या करने के बाद भगवान ने ब्राह्मण को दर्शन दिये और बोले ब्राम्हण देव आपको क्या चाहिए। तो ब्राह्मण बोलते है प्रभु मुझे मेरे बेटा मुझे दे दीजिए भगवान विष्णु जी बोलते है ये तो नामुमकिन है तो पुनः ब्राह्मण बोलते है तो ठीक है मुझे मेरे बेटे के पास पहुचा दीजिये मैं उससे जानना चाहता हूं कि जब उसे मुझे इतना बड़ा घाव देना था तो वो क्यो आया मेरा बेटा बनकर।

तो भगवान बोले ठीक है चलिए। तो ब्राह्मण भगवान के साथ चल पड़ते है आगे जाने के बाद एक बड़ा दरवाजा खुलता है।

वहा भगवान जी ने ब्राह्मण के बेटे को बुलाते है तब वही खूबसूरत बालक आता है। ब्राह्मण उस बालक से कहते है तुम तो मुझे फल का स्थान बताये थे पर तुम मेरे बेटे तो नही हो? 

तो वो बालक मुस्करा कर बोला मैं ही आप के बेटे के रूप में जन्म लिया था और  आप पहचान नही रहे है। पुनः ब्राह्मण ने बोले कि तुम मेरे साथ चलो मैं बिल्कुल अकेला हु। बालक पुनः बोला अब मैं जमीन पे नही जा सकता क्योंकि मृत्युलोक में अब मेरा कोई कार्य नही है।

ब्राह्मण बोले कि तुम्हारा पुत्र धर्म अभी बाकी है। इसके लिए तुम्हें चलना होगा। तो बालक बोला कि वो धर्म ही निभाने गया था जो अब पूर्ण हो गया है। ब्राह्मण बोले क्या मतलब, तुम तो मुझे घाव देने के लिए हमारे घर में जन्म लिया।

तो बालक बोला आप सही समझे। क्योकि इससे पहले दो जन्म में मैं तुम्हारा पिता था और तुम भी अल्प आयु में मुझे छोड़ गये थे। एक 14 वर्ष में जो तुम खुद मरे थे और दूसरा 21 वर्ष की आयु में तुम मरे थे।

तुम्हारे दुख में तुम्हारा भाई भी गुजर गया था, जो इस जन्म में तुम्हारी पत्नी बनी थीं। मैं सदमा नही बर्दास्त कर पाया तुम्हारे मौत का कारण मान कर एक अन्य व्यक्ति को मार डाला जो इस जन्म में मुझे सांप बनकर काटा है और वही मेरी मौत का कारण बना है।

अतः आप वापस जमीन पे जाइये अपने कर्म को पूरा करिये मैं आप के साथ नही जा सकता। मौत प्रभु के ही हाथो में होती है कारण कोई भी बन सकता है किये हुए कर्म का फल एक जन्म में नही कई जन्म लेकर चुकाना पड़ता है। 

अतः मैंने अपना कर्ज चुका दिया आप पुनः वापस जमीन पे जाइये और रिश्ते जमीन पे होता है आत्मा का आत्मा से कोई रिश्ता नही होता सिर्फ आत्मा का रिश्ता परमात्मा से होता है। कर्म का कर्ज सबको चुकाना ही पड़ता है।

Writed by - संजय कुमार मिश्रा

hindi kahani - खाने के लिए जीते है 

Story in hindi- SECRETS To BENEFITS OF STORY TELLING IN HINDI

आप भी कहानियां लिखने के शौकीन है तो आप अपनी कहानी हमे भेजिए हम आप की कहानी अपने ब्लॉग पर लगाएंगे।

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