5 Short Hindi Horror Stories 2021: घोस्ट ट्रेन, मनहूस कार | शरारती भूत
5 Short Hindi Horror Stories 2021
5 शोर्ट हिंदी हॉरर स्टोरीज 2021
तोंगोगोरा का भूत | Tongogara Ka Bhoot
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शरारती भूत | Shararti Bhoot
मेलबर्न (आस्ट्रेलिया) के बाहरी क्षेत्र के बे-साइड उपनगरीय क्षेत्र में बना लूना पार्क आरम्भ से ही इस मशहूर नगर की विशेष पहचान बन चुका था। जानकारी के लिए बता दें कि यह एक मनोरंजक पार्क है और यहां का पुराना, खूबसूरत 'रोलर कोस्टर' इसका विशेष आकर्षण है।
इसे 'घोस्ट ट्रेन' यानि प्रेत की गाड़ी भी कहा जाता है। पर अब यह एक गुजरी हुई बात हो चुकी है। प्रमाणिकता के अभाव में इसे कपोल-कल्पना भी मान लिया गया है। लेकिन 1900 के आरम्भ के कुछ महीनों में यहां एक भूत जोकर के भेष में प्रकट होकर मेहमानों के साथ चुहल करता था।
ये शरारत-पसंद भूत था...कभी ट्रेन में सवार लोगों के बीच में बैठ जाता, तो कभी तरह-तरह की अठखेलियां करता। आरम्भ में तो लोगों को उसकी वास्तविकता का कोई विशेष पता नहीं चला, पर जब वहां आने वालों ने उसकी चर्चा प्रबंधकों से की तो प्रबंधकों ने ऐसे किसी भी जोकर की उपस्थिति से साफ इनकार कर दिया।
अब लोगों को उस जोकर से भय लगने लगा, क्योंकि उसका स्पर्श को वे एक हवा के झोंके से ज्यादा महसूस नहीं कर सकते थे, पर एक जोकर-नुमा पारदर्शी छाया उन्हें भाति-भांति की मुद्राओं में अवश्य दिखती थी। लोगों की शिकायतें बढ़ीं तो प्रबंधक उसका उपाय सोच रहे थे कि अचानक प्रेत जोकर ने वहां आना बंद कर दिया।
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मनहूस कार | Manhush Car
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हाथ की छाप | Hath Ki Chhap
सन् 1860 और 1870 के दशकों की बात है। अमेरिका में मजदूर आंदोलन जोरों पर था। यह आंदोलन पेन्सिल्वानिया की कोयला खदानों की दयनीय और भयावह कार्य स्थितियों को लेकर आरम्भ किया गया था। इस संघर्ष को ज्यादा प्रभावी रूप से चलाने के लिए कामगारों ने 'मौली भाग्वावर्स' नाम का एक गुप्त संगठन स्थापित किया।
मगर स्थिति ऐसी बिगड़ी कि आंदोलन दंगों में बदल गया। कामगारों और यूनियन नेताओं की धरपकड़ आरम्भ हुई और करीब डेढ़ सौ लोगों को गिरफ्तार किया गया। हड़ताल से निबटने के लिए मालिकों ने एक गुप्तचर संस्था 'पिंकरटन डिटेक्टिव एजेंसी' की सहायता ली, जिसके एजेंटों ने 'मौली भाग्वावर्स' में अपनी घुसपैठ बना ली।
मजदूरों को भड़काने वालों के खिलाफ सबूत इकट्ठे किए गए और मुकदमें चलाए गए। परिणामस्वरूप करीब दर्जनभर लोगों की मौत की सजा सुनाई गई। 1877 में 'येलो जैक' नाम के व्यक्ति को 'लहाई कोल एंड नेविगेशन कंपनी' के फोरमैन की हत्या के इल्जाम में मुख्य दोषी पाया गया और फांसी दे दी गई।
उसके तीन अन्य साथियों को भी विभिन्न हत्याओं के इल्जामों में फांसी की सजा सुनाई गई। इनमें से दो तो खामोशी से फांसी पर चढ़ गए, मगर कोठरी नम्बर 17 में बंद उनका तीसरा साथी, एलेक्जेंडर कैंपबेल, आखिर तक यही चिल्लाता रहा कि वह निर्दोष है।
जब उसे कोठरी से खींचकर फांसी के तख्ते पर ले जाने लगे, तो उसने फर्श की मिट्टी से कोठरी की दीवार पर अपने हाथ की छाप बना दी और चीख-चीखकर कहा, 'मेरा यह हाथ मेरी बेगुनाही के सबूत के तौर पर हमेशा के लिए यहां बना रहेगा।'
फांसी के तख्ते पर पहुंचने तक वो बार-बार यही कहता रहा और फांसी पर लटकाए जाने के करीब 15 मिनट पश्चात् उसके प्राण निकले। कैंपबेल तो मर गया मगर अपने हाथ की छाप वहां छोड़ गया। कैंपबेल का यह हाथ अमेरिका में अन्याय का एक ज्वलंत सबूत बन गया। कई लोगों ने इसे तरह-तरह से मिटाने की कोशिश की, मगर कामयाब नहीं हुए।
आखिरी बार इसे मिटाने की कोशिश की गई 1978 में । उस पर पेंट पोता गया मगर नया पेंट भी उस हाथ की छाप को छिपाने-मिटाने में सफल न हो सका। उसके पश्चात् ये कोठरी सदा-सदा के लिए बंद कर दी गई, लेकिन उसकी दीवार पर कैंपबेल का हाथ की छाप आज तक बना हुआ है।
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डायरी का रहस्य | Diary Ka Rahasya
उस वक्त द्वितीय विश्व युद्ध पूरे जोरों पर था। 10 मई 1941 को जर्मन वायुसेना बमवर्षक विमानों ने लंदन पर बमों की भारी वर्षा की। इस हमले में लंदन का अत्यधिक प्रसिद्ध होटल अलेक्जेंड्रा पूरी तरह नष्ट हो गया। इस होटल में ठहरे मेहमानों के साथ इंग्लैंड के मशहूर प्रकाशक एंड्रयू वर्दी भी मारे गए। उस दिन की लंदन पर हुई यह सबसे भयानक बमवर्षा थी।
एंड्रयू वर्दी की मौत के पश्चात् उनके प्रकाशन संस्थान के संचालन की सारी जिम्मेदारी उनके पुत्र जेम्स वर्दी के कंधों पर आ पड़ी।
एक दिन कोई खास जानकारी पाने के लिए जेम्स अपने पिता की 1914 की डायरी देख रहा था। तब यह देखकर वह बहुत आश्चर्य में पड़ गया कि उस डायरी में 10 मई का पन्ना बिल्कुल खाली था, यहां तक कि उस पर 10 मई की तारीख भी नहीं छपी थी।
चूंकि यह डायरी खुद उन्हीं के प्रकाशन संस्थान ने अपने एजेंटों, पुस्तक-विक्रेताओं और ग्राहकों में वितरण के लिए छापी थी, अतः जेम्स को यह भय हुआ कि कहीं ऐसा न हुआ हो कि यह गलती सभी डायरियों में रह गई हो। जेम्स ने गोदाम में रखी बची हुई सारी डायरियों की जांच कराई। पता लगा कि किसी भी डायरी में 10 मई का पन्ना खाली नहीं था।
जिन लोगों को डायरियां भेजी गई थीं उन सभी को पत्र भेजे गए, लेकिन सभी ने स्वीकारा की सभी की डायरियां दुरुस्त थीं। किसी भी एजेंट या पुस्तक विक्रेता या ग्राहक ने इससे पहले भी डायरी के 10 मई के पन्ने के खाली होने की शिकायत नहीं की थी।
बस एंड्रयू वर्दी की डायरी में ही 10 मई 1941 का पन्ना खाली था। 10 मई 1941 यानि मृत्यु का दिन। यह रहस्य आज भी पहेली बना हुआ है कि आखिर एंड्रयू वर्दी की डायरी में ही 10 मई का पन्ना कोरा क्यों था?
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Team Hindi Horror Stories

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