श्री हनुमान चालीसा : जय हनुमान ज्ञान गुन सागर - Hanuman Chalisa lyrics in Hindi

श्री हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa lyrics in Hindi) : नमस्कार दोस्तों 'Wikipedia Hindi' में आपका स्वागत है। आज हम बात करने वाले हैं श्री हनुमान चालीसा के बारे में। हनुमान चालीसा में पवनपुत्र श्री हनुमान जी की सुंदर स्तृति की गई है। 

हनुमान चालीसा का अर्थ है : हनुमान तो पवनपुत्र हनुमान जी और चालीसा मतलब 40 क्योंकि हनुमान चालीसा में 40 छंद है। इसलिए इसे हनुमान चालीसा कहा जाता है। आज यहां पर हम आपके लिए श्री हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa lyrics) लेकर आए हैं, जो आपको बेहद पसंद आएगी।

Hanuman Chalisa lyrics in Hindi

बता दें कि श्री हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित काव्यात्मक कृति है। जिसमें प्रभु श्री राम के महान भक्त हनुमान जी के गुणों एवं कार्यों का चालीस चौपाइयों में वर्णन किया गया है। इसलिए प्रभु श्रीराम जी के भक्त हनुमान जी को हर दुख-तकलीफ में याद करने के लिए श्री हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa lyrics Hindi) को पढ़ा जाता है।

दोस्तों अगर आप किसी संकट में फंस गए हैं तो आप हनुमान चालीसा के साथ-साथ श्री हनुमान जी की आरती (Hanuman aarti in Hindi) भी पढ़ सकते हैं। लेकिन श्री हनुमान चालीसा (jai Hanuman Chalisa lyrics in Hindi) पढ़ने से हनुमान जी खुद आपके घर पर वास करते हैं और आपके जीवन से सभी दुख-दर्दाे को दूर करते हैं।  

श्री हनुमान चालीसा का एक-एक शब्द इतना प्रभावशाली है कि अगर आज पूरे मनोयोग से इसे प्रतिदिन 7 बार, 11 बार या फिर 108 बार पढ़ते हैं तो आपके जीवन की हर बाधा दूर होने लगती है, हर रास्ता सरल और हर काम सफल होने लगता है। इसलिए हम आपके लिए लेकर आए हैं श्री हनुमान चालीसा :

दोहा 


श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्धा देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।



चौपाई 


जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।
 
संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।
 
विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।
 
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।
 
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।
 
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।
 
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
 
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
 
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।
 
जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।
 
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।
 
जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
 
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
 
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
 
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
 
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।
 
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।
 
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
 
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
 
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।
 
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।
 
साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।
 
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।
 
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।
 
तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।
 
अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।
 
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
 
जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
 
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।
 
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
 
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।

दोहा
 
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।



दो शब्द : दोस्तों अगर आप भी हनुमान चालीसा पढ़ना चाहते हैं तो हमने यहां आपको हिंदी में हनुमान चालीसा दिया है। जिसे आप कहीं भी और कभी भी आसानी के साथ पढ़ सकते हैं। इसलिए अगर कभी भी आपको कोई संकट आता है तो आप हनुमान जी को याद कर सकते हैं।

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