आधुनिक भारतीय इतिहास के भाग 1/ history of modern india part-1
Syllabus
- भारत में यूरोपीय कम्पनियों का आगमन
- ब्रिटिश विजय के समय भारत की स्थिति
- मुगल साम्राज्य का पतन
- स्वायत क्षेत्रीय राज्यों का उदय ब्रिटेन का साम्राज्य विस्तार
- 1857 के पूर्व ब्रिटिश साम्राज्य के विरूद्ध विद्रोह
- 1857 का विद्रोह सामानिक - धार्मिक सुधार आन्दोलन व उसके नेता
सामन्तवाद= ( सामन्त + चर्च )
आधुनिक काल --15 वीं शताब्दी
पुनर्जागरण - फिर से जगना
पुनर्जागरण - तर्कवाद
मानवतावाद
नये नये अविष्कार
- कंपास
- स्ट्रालेब
- जहाज की चाल मापने वाले यंत्र
भारत में यूरोपीय कम्पनियों के आगमन '
- यूरोपीय कम्पनियों के भारत आने के अनेक कारण थे।
- भारत की आर्थिक सम्पन्नता ने यूरोपीय कम्पनियों को भारत आने के लिए आकर्षित किया ।
- मार्को पोलो ( 1254 - 1324-1० ) मे चीन की यात्रा की और अपने विवरण में एशिया के समृद्धि का काफी उल्लेख किया है।
- भारतीय उष्ण कटिबन्धीय वस्तुयो जैसे- सूती वस्त्र, मसाले , नील आदि की यूरोप में काफी माग होती थी। वास्कोडिगामा का अपनी पहली यात्रा के दौरान 60 गुना मुनाफा हुआ था । इसके अलावा पुनर्जागरण का अभ्युदय , कृषि में निवेश कम लाभ वाला सिद्ध होना , कच्चे माल की आवश्यकता , नवीन ' बाजारो की प्राप्ति एव विस्तार , ईसाई मत के प्रसार की उत्कृष्ठ इच्छा एवं यूरोप मे सामन्तवाद के स स्थान पर नवीन ( प् पूंजीवाद) व्यवस्था का स्थापित होना भी कारण था ।
- 1453 एचडी में कुस्तुनतुनिया का पतन हो गया।
- तुर्की ने कुछ तो दुनिया पर नियंत्रण कर लिया।
- यूरोपीय व्यापारी को तुर्की के रास्ते एशिया आने पर रोक लगा दी।
- अतः यूरोपीय द्वारा नवीन व्यापारिक मार्ग की तलाश प्रारंभ हुई
- चुकी इस समय यूरोप में पुनर्जागरण के कारण समुंद्री कंपास, स्ट्रोलैब (अक्षांश देशांतर मापक) जहाज की चाल मापने वाले उपकरणों आदि का अविष्कार हुआ जिससे समुद्री यात्राएं सुरक्षित एवं सुगम हो गए।
- 1487 ईस्वी में बॉर्थोलोमादियास नामक पुर्तगाली अफ्रीका के दक्षिणी सिरे तक पहुंच गया और इस जगह को (केप आफ गुड होप) कहा गया किंतु वह पुनः लिरूबन लौट गया।
- संघ 1498 में वास्कोडिगामा एक हिंदुस्तानी व्यापारी अब्दुल मुनीर की सहायता से भारत के कालीकट तट पर पहुंचा।
पुर्तगाल
- 1502 में वास्कोडिगामा पुनःभारत आया उसने कोचीन 1503 में फैक्ट्री स्थापित की।निजी व्यापारियों की लाश को देखकर पुर्तगाली सरकार ने सरकारी कंपनी की स्थापना की जिसे एस्तादो दा इंडिया कहा गया।इस कंपनी का सर्वोच्च अधिकारी गवर्नर कहलाया जिसे कंपनी के हित में व्यापार युद्ध, संधि ,विस्तार करने की अधिकार दिए गए।
महत्वपूर्ण पुर्तगाली गवर्नर:-
फ्रांसिस्को डी अल्मेडा:-
- यह भारत में प्रथम पुर्तगाली गवर्नर था, इसने पूर्व में स्थापित फैक्ट्रियों की किलेबंदी की तथा उन्हें मजबूत बनाया।
- इसने ब्लू वाटर पॉलिसी जारी की।
- इसका अर्थ था खुद को समुंद्र में मजबूत बनाना तथा व्यापार को नियंत्रित करना।
अल्फांसो डी अल्बुकर्क:-
- इसे पुर्तगालियों का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।
- 1510 ईसवी में बीजापुर से गोवा को छीनकर ठोस शुरुआत की( उस समय बीजापुर का शासक युसूफ आदिलशाह) था ।
- बाद में वहीं गोवा पुर्तगालियों की राजधानी बनी।
- अल्बूकर्क ने हिंदू महिलाओं के साथ विवाह की नीति अपनाई।
- इसने ब्लू वाटर पॉलिसी को और मजबूत किया।
- मेडागास्कर से लेकर हॉर्मुज तट (फारस की खाड़ी )तक एवं मलास्का जलसंधि (इंडोनेशिया) तक नियंत्रण स्थापित किया।
- इसके समय से ही पुर्तगालियों ने ''धार्मिक असहिष्णुता की नीति" अपनाई तथा बलपूर्वक लोगों का धर्म परिवर्तन कराया।
- सर्वप्रथम अल्बूकर्क नहीं भारतीयों को पुर्तगाली सेना में शामिल किया
- अल्बुकर्क ने ही पुर्तगाली प्रभाव क्षेत्र में "सती प्रथा " पर प्रतिबंध लगाया।
पुर्तगालियों का भारत आने का परिणाम:-
- पुर्तगालियों ने भारत में आलू ,मटर, कहवा अनानस आदि फसल लेकर आए।
- पुर्तगाली भारत में मुख्यत मसाले ,सूती वस्त्र ,नील आदि की खरीदारी करते थे।
- बदले में सोने चांदी से भुगतान करते थे।
- यूरोप की वेश-भूषा पहनावा सांस्कृतिक तौर तरीके का भारत में आगमन हुआ।
- उन्होंने स्थानीय नागरिकों से सहयोग कायम किया।
- भारतीय महिलाओं के साथ विवाह किया इससे आपसी सहयोग को बढ़ावा मिला।
- प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना सर्वप्रथम इन्होंने ही किया।
- पुर्तगालियों ने प्रारंभ के लगभग 100 वर्षों तक हिंद महासागरीय क्षेत्र में दबदबा कायम किया, लेकिन बाद में वह अन्य यूरोपीय कंपनियों के आगमन के बाद पिछड़ गए इसके कई कारण थे-
- डचो एवं अंग्रेजों के मुकाबले उनकी नौ सैनिक शक्ति की कमजोर होना।
- भ्रष्टाचार एवं लूटमार करना, उनकी छवि कई जगहों पर लुटेरों जैसी थी।
- भारत में धार्मिक संकीर्णता एवं और अहिसूंता की नीति अपनाना जनसंख्या व संसाधनों की कमी।
- भारत की अपेक्षा ब्राजील के उपनिवेश पर अधिक ध्यान देना।
- एक साथ दो बड़े उपनिवेश को संभालना मुश्किल था पुर्तगाल का सम्राट निरंकुश था।
- इसे सर्वप्रथम पुर्तगालियों द्वारा लागू किया गया इसका उद्देश्य भारत के समुद्रिक व्यापार पर एक आधिपत्य स्थापित करना था इसके तहत भारतीय जहाजों के कप्तानों को पुर्तगाली नियंत्रण वाली समुद्री सीमा में प्रवेश हेतु लाइसेंस या पास लेना पड़ता था , जिससे पुर्तगाली जहाज पर हमला नहीं करते थे।



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