आधुनिक भारतीय इतिहास के भाग 2/ history of modern india part- 2
डच (नीदरलैंड /हालैंड)
- नीदरलैंड की संसद द्वारा भारत से व्यापार करने के लिए 1602 में एक कंपनी का गठन किया गया।
- जिसे वेरिगदे ओस्ट इंडिसे कंपनीज कहा गया।
- डच कंपनी एक अर्ध सरकारी कंपनी थी जो एक निदेशक मंडल द्वारा चलाई जाती थी।
- व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए इस ने भारत में अपनी प्रथम फैक्ट्री 1605 में मूसली पत्तनम मैं स्थापित किया गया।
- इसके बाद डचो ने क्रमशः पुलकिट, नेगीपत्तनम, बालासोर आदि स्थानों पर अनेक फैक्ट्रियां स्थापित की।
- डच भारत से सूती एवं रेशमी ,वस्त्र, धागा ,मसाले ,नील ,अफीम ,चीनी आदि वस्तुओं का निर्यात करते थे तथा वे सोना , चांदी, पारा, कांच की वस्तुएं आदि भारत लाए थे।
डचो की नीति:-
- डचो की नीति कंपनियों से अधिक उदार थी।
- डचों ने जहाजों पर माल ढूलाई एवं दूसरे कार्यों में स्थानीय लोगों को रोजगार प्रदान किया तथा उन्हें उचित पारिश्रमिक भी देते थे।
- डचों ने स्थानीय शिल्पी को अग्रिम धनराशि देकर वस्तुओं की खरीददारी की उनका शोषण नहीं किया।
- इन्होंने पुर्तगालियों की भांति धार्मिक कट्टरता की नीति नहीं अपनाई।
डचों का पिछड़ना/पतन:-
- अंग्रेजों की नौसैनिक श्रेष्ठता डचों से अधिक थी।
- डचों ने भारत के साथ - साथ इंडोनेशिया को अपना मुख्य ठिकाना बनाया जिससे दो स्थानों पर एक साथ नियंत्रण करना कठिन था।
- डच कंपनी राष्ट्रीय अधिकारिता में भी थी।
- जिससे डच कर्मियों में अंग्रेजी कंपनी के कर्मचारियों के समान नेतृत्व की भावना तथा उत्साह का अभाव था।
- डच कंपनी के अधिकारियों का वेतन बहुत कम था इसलिए वे अपने निजी व्यापार में ही ज्यादा सक्रियता दिखाते थे।
- हालैंड लंबी अवधि तक पराधीन तथा इसलिए उसके पास का संसाधनों की कमी थी जबकि इंग्लैंड सदैव स्वाधीन था।
EIC का गठन:-
- 31 दिसंबर 1600 ई को ब्रिटेन की महारानी "एलिजाबेथ प्रथम" ने एक चार्टर (आदेश पत्र) जारी कर के गवर्नर और लंदन की कंपनी के व्यापारियों को पूर्व में व्यापार करने हेतु अनुमति प्रदान की प्रारंभ में यह विशेषाधिकार 15 वर्षों के लिए प्रदान किए गए थे इस कंपनी का प्रारंभिक नाम THE GOVERNOR AND COMPANY OF MERCHANTS OF LONDON TRAEDING TO THE EAST था। बाद में यह EIC के नाम से लोकप्रिय हुआ।
- EIC एक निजी कंपनी थी जो शेयरधारकों से मिलकर बनी थी इस शेयरधारकों के समूह को Court of propriters (COP) कहा जाता था। कंपनी को चलाने के लिए एक 24 सदस्य दल (Board of directors) का गठन किया गया, इस का सर्वोच्च अधिकारी गवर्नर था।
- 1603 ई0 मैं महारानी एलिजाबेथ प्रथम की मृत्यु के बाद जेम्स -2 इंग्लैंड के राजा बने।
- जेम्स प्रथम न जेम्स-1 1609 ईस्वी में कंपनी द्वारा पूर्व से व्यापार करने की अवधि 15 वर्ष बढ़ाकर 20 वर्ष कर दी गई,साथी अंग्रेजी कंपनी को व्यापारिक उद्देश्यों के लिए युद्ध करने , संधिया करने, सेना रखने आदि के अधिकार प्रदान किए गए थे।
- शुरू में ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपना ध्यान मसालों के व्यापार विशेष रूप से इंडोनेशिया के काली मिर्च और मसाला प्राप्त होने वाले दीपों पर केंद्रित रखा।
- शीघ्र ही अंग्रेजों ने भारत की वस्तुओं विशेषकर कपड़ों का महत्व समझा और वह उसका उपयोग मसाला खरीदने के लिए करने लगे।
- कंपनी ने इस उद्देश्य हेतु गुजरात के सूरत में कारखाना खोलने की योजना बनाई और कैप्टन हॉकिंस को मुगल सम्राट जहांगीर के दरबार में भेजा गया।
- जहांगीर एवं कंपनी:-
- कैप्टन हॉकिंस 1608 इसवी के अंत में एक्टर नामक समुद्री जहाज से सूरत पहुंचा था वह 1609 ईसवी के प्रारंभ में जहांगीर के दरबार (आगरा )पहुंचा।
- और उसने फारसी भाषा में जहांगीर से बात की।
- जहांगीर ने उसे 400 का मनसब देकर सम्मानित किया तथा उसे "खान" नामक उपाधि भी दी थी।
- हॉकिंस पुर्तगालियों के दबाव के कारण सूरत में कारखाना खोलने की अनुमति प्राप्त करने में असफल रहा।
- 1611 ई मैं अंग्रेज नौसैनिक कप्तान मिडलेटन ने सूरत के निकट स्वाली हॉल में पुर्तगालियों के जहाज बड़े को परास्त किया तो जहांगीर ने प्रभावित होकर 1613 ईस्वी में सूरत में स्थाई कारखाना स्थापित करने की अनुमति दे दी।
- हॉकिंस के पश्चात सर टॉमस रो व्यापारिक सुविधाएं प्राप्त करने हेतु 1615 ईस्वी में भारत आया।
- रामा शुरू की जाएगी से सर्वप्रथम मुलाकात अजमेर में हुई थी।
- टॉमस रो कोई ठोस व्यापारिक समझौता करने के सफल नहीं हो पाया था वह फरवरी 1619 में भारत छोड़ चला गया।
- औरंगजेब के समय 1698 में कंपनी के लिए एक बड़ा अवसर सृजित हुआ।
- बंगाल में औरंगजेब के गवर्नर अजीमुशान ने कंपनी को 3 गांव सुतानती, काली घाट तथा गोविंदपुर की जमीदारी (भू राजस्व वसूली का अधिकार दिया) प्रदान किया।
- इन्हीं 3 गांव को मिलाकर कंपनी ने किलाबंदी की (1700 ई0) जिसे फोर्ट विलियम कहां गया।
- आगे यही कोलकाता शहर बना तथा अंग्रेजों का महत्वपूर्ण नियंत्रणकारी केंद्र बना।
- 1717 ई0 मैं अंग्रेजों का एक दूत मंडल (जॉन सरमन के नेतृत्व में) फर्रूखसियर से मिलने आया इस दल के एक डॉ हेमिल्टन ने बादशाह को एक गंभीर बीमारी का इलाज कर दिया, इससे खुश होकर कंपनी को कई सहूलियत प्रदान की जिसे फर्रूखसियर का फरमान कहा जाता है।
- फर्रूखसियर के फरमान की मुख्य बातें-
- EIC:-को कोलकाता के आसपास के और अधिक क्षेत्रों में राजस्व वसूली के अधिकार प्रदान किए गए।
- 10000 रुपए सालाना राशि देने के एवज में सूरत के सभी करो से उन्हें मुक्ति मिल गई।
- मुंबई में ढाले गए कंपनी के सिक्के को पूरे मुगल साम्राज्य में वैधता प्रदान कर दी गई।
- 30000 चलाना रुपए के बदले कंपनी को बंगाल में चुंगी मुक्त व्यापार की अनुमति दी गई।
- डेनिस कंपनी की स्थापना डेनमार्क में 1616 ईस्वी में हुई।
- इसका उद्देश्य पूर्वी देशों से व्यापार करना था।
- भारत में प्रथम डेन फैक्ट्री 1620 में त्राइंबकोर (तमिलनाडु) मैं स्थापित हुई, आगे आगे मुस्लिपटनम ,कासिम बाजार, श्री रामपुर आदि में भी डेन फैक्ट्रियां स्थापित हुई।
- डेल कंपनी ने अपना मुख्य ध्यान दक्षिण पूर्व एशिया में लगाया, भारत में उनका व्यापार अन्य कंपनियों की अपेक्षा सीमित था।
- डेन कंपनी ने ईसाई मशीनरी शिक्षा के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य किया।



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