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भर्तियों में पारदर्शिता का प्रोपेगैंडा दरअसल भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों को बचाने की कवायद-युवा मंच
मोदी रोजगार दो अभियान में भर्तियों में पारदर्शिता का मुद्दा भी जोरशोर से उठेगा
प्रयागराज, 6/3/2021, युवा मंच के संयोजक राजेश सचान, अध्यक्ष अनिल सिंह, इलाहाबाद यूनिट के महासचिव अमरेंद्र सिंह के नेतृत्व में मोदी रोजगार दो अभियान के तहत म्योराबाद, पटेल चौराहा अल्लापुर, गोबिन्द पुर आदि डेलीगेसियों में छात्रों से संवाद आज भी जारी रहा। संवाद में युवा मंच पदाधिकारियों ने कहा कि कल लखनऊ में पीसीएस-2018 बैच के अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दावा किया गया कि प्रदेश में चयन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है। मुख्यमंत्री का भर्तियों में पारदर्शिता का दावा रोजगार के सफल योगी माडल के प्रोपेगैंडा की तरह है। दरअसल सच्चाई यह है कि योगी सरकार में एक भी ऐसी भर्ती नहीं हुई है जिसमें पेपर लीक, धांधली और भाईभतीजावाद व भेदभाव के गंभीर आरोप न लगे हो, यहां तक कि लोक सेवा आयोग में योगी सरकार द्वारा नियुक्त परीक्षा नियंत्रक को पेपर लीक और अन्य गंभीर आरोपों में जेल भेजा गया, 68500 शिक्षक भर्ती में हुए अभूतपूर्व भ्रष्टाचार के मामले में श्रीमती सुप्ता सिंह को जेल हुई, केएल पटेल, मायापति जैसे शिक्षा माफियाओं आदि को छात्रों के आंदोलन के दबाव में जेल भेजना पड़ा। कल ही बेसिक शिक्षा विभाग की भर्तियों में धांधली के आरोप में साक्षरता निदेशक संजय सिन्हा समेत कई अधिकारियों को निलंबित किया गया है। अगर प्रदेश में चयन प्रक्रिया पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त थी तो इन अधिकारियों व शिक्षा माफियाओं को जेल किन वजहों से भेजा गया, इसका कोई जवाब मुख्यमंत्री के पास नहीं है। इसलिए मुख्यमंत्री की बयानबाजी कि पिछली सरकार के इतर उनकी सरकार में भर्तियां पारदर्शी हैं और भ्रष्टाचार व भाईभतीजावाद से मुक्त हैं पूरी तरह से हास्यास्पद है और यह भ्रष्टाचार में संलिप्त आरोपियों को बचाने और संरक्षण देने की कवायद भर है। दरअसल योगी राज में भर्तियों में भ्रष्टाचार ने पिछली सरकारों को काफी पीछे छोड़ दिया है। विडंबना है कि योगी जी उन चयनित युवाओं से मिल कर और उनके बयानों के हवाले पारदर्शिता का दावा कर रहे हैं लेकिन यहां भ्रष्टाचार के चलते भेदभाव के शिकार युवाओं से मुलाकात की जहमत नहीं उठा रहे हैं उलटे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर उनके विरुद्ध दमनचक्र चलाया गया।
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जिस पीसीएस-2018 बैच के अधिकारियों के नियुक्ति पत्र वितरण में मुख्यमंत्री पारदर्शिता का दावा कर रहे थे इसी भर्ती को लोक सेवा आयोग के इतिहास की सबसे ज्यादा विवादित पीसीएस भर्ती माना गया। लोक सेवा आयोग में पारदर्शिता की स्थिति यह है कि स्केलिंग के बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया जा रहा है, दरअसल स्केलिंग को खत्म कर मनमाने ढंग से नार्मलाईजेशन और भ्रष्टाचार के चलते ही मानविकी विषयों और हिंदी भाषा के प्रतियोगियों का सफाया हो गया। प्रदेश में अभूतपूर्व भ्रष्टाचार, पारदर्शिता के अभाव और अलोकतांत्रिक काम करने की पद्धति के चलते ही चयन प्रक्रिया से संबंधित हजारों विवाद पैदा हो रहे हैं और अक्सर चयन प्रक्रिया न्यायिक प्रक्रिया के पचड़े में उलझ जाती है। उन्होंने कहा कि मोदी रोजगार दो अभियान में चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता के सवाल को भी मजबूती से उठाया जायेगा। संवाद के दौरान ईशान गोयल, तनय शाही, सुधीर ओझा, इंजी. राम बहादुर पटेल, अंकुर यादव, रोहित सिंह सेंगर, धीरेन्द्र कुशवाहा, राजन आदि ने अपनी बाच रखी। संवाद के दौरान युवाओं ने किसान आंदोलन के दमन के विरूद्ध काला दिवस मनाने के राष्ट्रीय आवाहन पर बांहों में काला फीता बांधकर प्रतिवाद दर्ज कराया गया और किसान आंदोलन के पुरजोर समर्थन की अपील युवाओं से की गई जिसमें युवा मंच के संयोजक राजेश सचान,अध्यक्ष अनिल सिंह, अमरेंद्र सिंह, इंजीनियर राम बहादुर पटेल, इंजीनियर ईशान गोयल, सत्यम त्रिपाठी, दिवाकर यादव, अजय कुमार, अतीश त्रिपाठी, संजय तिवारी, संदीप यादव, अजीत, अंकुर यादव, रोहित सिंह सेंगर, अभिषेक श्रीवास्तव आदि शामिल रहे।
भवदीय
अनिल सिंह अध्यक्ष युवा मंच
मोबाइल-9451505685

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